रांचीः गिरिडीह निवासी 2024 बैच के आईएएस अधिकारी आशीष मोदी के ओबीसी प्रमाणपत्र पर विवाद खड़ा हो गया है। इसे लेकर केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने राज्य सरकार को पत्र भेजा है। इसमें आशीष मोदी के ओबीसी प्रमाणपत्र से संबंधित तथ्यों की स्पष्ट जानकारी मांगी गयी है।
विभाग ने राज्य सरकार से मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट देने को कहा है। आशीष मोदी राजस्थान के सीकर जिले के कलेक्टर पद पर नियुक्ति हैं। आरोप है कि वह सामान्य श्रेणी से आते हैं, जबकि यूपीएससी में उनका चयन ओबीसी श्रेणी के तहत हुआ। ओबीसी श्रेणी का लाभ मिलने से 350वीं रैंक के बाद भी उन्हें आईएएस सेवा आवंटित हुई। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आशीष का परिवार राजस्थान के फतेहपुर से आकर गिरिडीह में बसा था। इसी पृष्टिभूमि में उनके जाति प्रमाणपत्र और ओबीसी श्रेणी के दावे की जांच को लेकर डीओपीटी ने झारखंड सरकार से तथ्य मांगे है। आईएएस में चयन के बाद उन्हें प्रारंभ में नागालैंड कैडर मिला था, बाद में राजस्थान कैडर की आईएएस अधिकारी भारती दीक्षित से विवाद के बाद उनका कैडर राजस्थान स्थानांतरित किया गया।

केंद्र सरकार ने झारखंड के मुख्य सचिव अविशना कुमार को जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार के इस पत्र को गिरिडीह के डीसी को भेजा। फिर डीसी ने गिरिडीह के सदर अनुमंडल पदाधिकारी धीरेंद्र प्रसाद को भेजा। एसडीओ इसकी जांच कर रहे है। इधर, प्राप्त जानकारी के अनुसार आशीष मोदी की पत्नी भारती दीक्षित ने भी गिरिडीह जिला प्रशासन को एक पत्र भेजा है, जो एसडीओ के पास पहुंच गया है। इसमें लिखा गया है कि आशीष मोदी ओबीसी कैटेगरी से हैं। कानूनी और तकनीकी आधार पर गिरिडीह से उनका ओबीसी का जाति प्रमाण पत्र बना है, जो सही है। आशीष मोदी का परिवार वर्षो पहले गिरिडीह बाया था। उनके पूर्वज मूल रूप से गुजरात के हैं, जहां मोदी ओबीसी कैटेगरी में है।
इस मामले में एसडीओ धीरेंद्र प्रसाद ने कहा है कि एसआईआर से जुड़े काम में अत्यधिक व्यस्तता के कारण जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। व्यस्तता कम होते ही संबंधित अभिलेखों और जाति प्रमाण पत्र से जुड़े दस्तावेजों की बिंदुवार जांच की जाएगी। जांच में प्रमाण पत्र से संबंधित दावों और उपलब्ध अभिलेखों का मिलान किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट डीसी को सौंपी जाएगी।





