रांचीः जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा धांधली मामले में सीआईडी (CID) की जांच के दौरान टीडीपीएल (TDPL) के तकनीकी कर्मी मोहम्मद एबाद ने ओएमआर शीट (OMR Sheet) और ओएसएम (OSM) में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ और डिजिटल टेंपरिंग करने की बात कबूल कर ली है। एबाद के इस कबूलनामे के बाद झारखंड में चल रहे इस बड़े भर्ती घोटाले में सिंडिकेट के 12 से अधिक सहयोगियों के नामों का भी खुलासा हुआ है।
टीडीपीएल के कर्मचारी उत्तर प्रदेश के रौनाही निवासी मो. एबाद ने पूछताछ में स्वीकारा कि जेपीएससी परीक्षा में ऑप्टिकल मार्क रिकॉग्निशन (ओएमआर) और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) से छेड़छाड़ की गई थी।उसने सिंडिकेट से जुड़े 12 से अधिक सहयोगियों के नाम का भी खुलासा किया है। इनमें बिहार निवासी अतुल वत्स व मिथिलेश सिंह मुख्य रूप से शामिल हैं। इनके अलावा उसने टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह, अरविंद कुमार, राजेश सिंह, आदित्य पांडेय, सुनील कुमार, संतोष सिंह, ब्रजेश कुमार, अली, इमरान, अजय संग्राम सिंह, प्रमोद पाठक, कृष्णा यादव और मो. उस्मान का नाम भी अपने सहयोगियों के तौर पर लिया है। इस प्रकरण में अतुल वत्स का नाम सामने आने के बाद जांच एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं।

सीआईडी की राडार पर हैं ये 7 फरार आरोपी आदित्य पांडेय: पेप्सी ग्राउंड, नामकुम पवन कुमार सिंह: हरिनगर, टाटीसिलवे रविशंकर कुमार: बारालोटा, पलामू संतोष कुमार सिंह: हमीदगंज, पलामू सानंद प्रकाश: सेक्टर 3, बोकारो लालू कुमार यादव: कोर्रा, हजारीबाग सौरभ कुमार पांडेय: हथगर, बेंगाबाद, गिरिडीह।
अभ्यर्थियों को पेपर नहीं देते थे, जवाब रटवाते थे जांच में पता चला है कि गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों को सीधे प्रश्न पत्र नहीं देते थे। उन्हें एक स्थान पर ले जाकर उत्तर रटवाते थे। उत्पाद सिपाही भर्ती के दौरान भी अभ्यर्थियों के पास से उत्तर लिखे कागज मिले थे। ऐसे में अब सीआईडी अब इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि कहीं उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा और सीजीएल में धांधली के तार आपस में तो नहीं जुड़े हैं। इसमें अतुल वत्स और मिथिलेश सिंह की मिलीभगत तो नहीं थे। अब जांच एजेंसी आरोपियों से मिले इनपुट का सत्यापन कर रही है।




