जमशेदपुर: पूर्व सांसद और झारखंड आंदोलनकारी शैलेंद्र महतो ने जयराम महतो और धनबाद के बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बीच वायरल बातचीत के ऑडियो पर सरकार से कई सवाल पूछे हैं । उन्होंने 1983 में विधायक तुलसी रजक को मनोहरपुर थाना प्रभारी द्वारा अपमानित करने पर तात्कालिन मुख्यमंत्री द्वारा निलंबित करने की मिसाल दी ।
शैलेंद्र महतो ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि “मामला 1983 की है। जुगसलाई विधानसभा के विधायक तुलसी रजक एक कार्यक्रम में मनोहरपुर गए थे। मामला मजदूरों का था। विधायक तुलसी रजक को किसी बात पर तत्कालीन सिंहभूम जिला (अब पश्चिम सिंहभूम) के मनोहरपुर थाना प्रभारी द्वारा अपमानित किया गया था, अभद्रता से पेश आया। यह मामला जब बिहार विधानसभा में पहुंचा तो बिहार के मुख्यमंत्री ने थाना प्रभारी को निलंबित करने का आदेश दिया था । उस समय के मझगांव से कांग्रेस विधायक और बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे देवेंद्रनाथ चांपिया जीवित है, आप उनसे जानकारी ले सकते हैं। अब आपको तय करना है कि विधायिका और कार्यपालिका में क्या अंतर है? “

पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने यहां स्पष्ट करते हुए कहा कि झारखंड की परंपरा में, आचार- विचार में कोई गाली- गलौज का स्थान नहीं है और ऐसी हरकतों की मैं घोर निंदा करता हूं। मुझे लगता है, झारखंड पुलिस एसोसिएशन उपनिवेशवादी शक्तियों के इशारे पर शिखंडी की भूमिका निभा रही है, और उनके द्वारा हेमंत सरकार को अल्टीमेटम दिया गया है कि विधायक जयराम महतो को 5 दिनों के अंदर गिरफ्तार किया जाए, नहीं तो… या माफी मांगे। आरोप है जयराम महतो ने बरवाअड्डा के थाना प्रभारी को गाली- गलौज किया है ? इस पर थाना में जयराम महतो के खिलाफ एफआइआर भी हो चुका है। एफआईआर करना तो थाना प्रभारी के हाथ में है। विधायक जयराम महतो और थाना प्रभारी के बीच जो गरमा- गरम बहस हुई उसका भी वीडियो वायरल हो गया। यह वीडियो किसने जारी किया? कहा जा रहा है कि पूरी वीडियो नहीं है, इसे कांट-छांट किया गया है। एक कहावत है “ताली एक हाथ से नहीं बजती”। जरूर दोनों हाथ से बजी होगी? अब यह जांच का विषय है। मामले को बिना छानबीन किए पुलिस एसोसिएशन चाहती है कि जयराम महतो को गिरफ्तार किया जाए या माफी मांगे। माननीय विधायक थाना प्रभारी से माफी मांगे, यह भी सवाल है? झारखंड क्या “अंधेर नगरी चौपट राज ” है ? बिरसा मुंडा को भी गिरफ्तार कराने में कोई झारखंडी ही शिखंडी था। यह इतिहास में दर्ज है।”
शैलेंद्र महतो ने कहा कि थाना एक ऐसी जगह है जहां बिना गाली- गलौज के कोई काम नहीं होता है,समय कटता नहीं है। वहां तो स्कूल जैसा नैतिकता का पाठ पढ़ाया नहीं जाता। पिछले दिनों एक राजू दास नामक गेरूवा वस्त्र पहना हुआ व्यक्ति दूरदर्शन में बैठकर खुलेआम मां- बहन की गाली दे रहा था, उस पर कोई कार्रवाई नहीं। ऐसे कई उदाहरण है जिसका गिनती करना मुश्किल है। एससी- एसटी छोड़कर गाली गलौज का शायद कोई केस होता होगा , यह मेरी जानकारी में नहीं है ?
उन्होंने मांग की कि “झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रविंद्र कुमार महतो से अपील करता हूं कि एक जनप्रतिनिधि/ विधायक जयराम महतो बनाम झारखंड पुलिस एसोसिएशन के मामले में हस्तक्षेप करें और मामले का निष्पादन करें। आप लोग चुप क्यों हैं?’





