लोहरदगा: झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के जिला अध्यक्ष किशोर उरांव के नेतृत्व में गुरुवार को जिला कलेक्टर मैदान, लोहरदगा में एक दिवसीय भूख हड़ताल का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, पुरुष एवं पार्टी कार्यकर्ता धरना स्थल पर मौजूद रहे और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों को रखा।


भूख हड़ताल के दौरान वक्ताओं ने 10 अगस्त को छात्र आंदोलन के दौरान हुए लाठीचार्ज एवं आंसू गैस छोड़े जाने की घटना की कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने इस घटना की न्यायिक जांच कराने तथा दोषी पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की मांग की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेएलकेएम जिला अध्यक्ष किशोर उरांव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।


किशोर उरांव ने अपने संबोधन में लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत और स्थानीय विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि संसद में जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलनों और राष्ट्रीय मुद्दों पर आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधि झारखंड के छात्रों और युवाओं के आंदोलन के समय मौन साधे हुए हैं।
उन्होंने कहा, “जब दिल्ली के जंतर-मंतर में आंदोलन होता है तो हमारे सांसद सदन में मजबूती से अपनी बात रखते हैं, लेकिन जब झारखंड के बेटे-बेटियां अपने हक और अधिकार के लिए सड़कों पर उतरते हैं तो न सांसद दिखाई देते हैं और न ही विधायक। ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर दोनों जनप्रतिनिधियों का मौन रहना बेहद दुखद और निराशाजनक है।”
उन्होंने आगे कहा कि लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के युवा मतदाता, अभिभावक और छात्र-छात्राएं सब कुछ देख और समझ रहे हैं। आने वाले समय में जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी। उन्होंने दावा किया कि युवाओं की अनदेखी करने वाले जनप्रतिनिधियों को जनता सबक सिखाने का काम करेगी।


धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य मंत्री के एक बयान पर भी नाराजगी व्यक्त करते हुए उसे जनभावनाओं के खिलाफ बताया। वक्ताओं ने कहा कि सरकार को विरोध की आवाज को दबाने के बजाय युवाओं की समस्याओं के समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।भूख हड़ताल सुबह 6 बजे से शुरू होकर निर्धारित समय तक चली। कार्यक्रम के समापन पर राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा गया, जिसमें छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों की न्यायिक जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई तथा युवाओं की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई।इस अवसर पर जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए महिला-पुरुष कार्यकर्ताओं, छात्र-युवाओं तथा जेएलकेएम के पदाधिकारियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।







