लोहरदगा : विश्व जनजातीय दिवस की पूर्व संध्या पर झारखंड का लोहरदगा जिला गुरुवार को राष्ट्रीय पहचान के नए मुकाम पर पहुंच गया। पहली बार जिले में आयोजित पांच दिवसीय नेशनल ट्राइबल मीट-2026 का रंगारंग आगाज कुडू प्रखंड के चिरी स्थित डायट परिसर में हुआ। भारत स्काउट एवं गाइड, झारखंड के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय समागम में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे स्काउट-गाइड, प्रशिक्षक, अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने एक साथ भारत की जनजातीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू, एसडीपीओ श्रद्धा केरकेट्टा, पूर्व एमएलसी प्रवीण कुमार सिंह तथा अन्य अतिथियों ने पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अतिथियों का पारंपरिक पगड़ी, अंगवस्त्र और बैज पहनाकर स्वागत किया गया। पूरा परिसर पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन, जनजातीय गीतों और रंग-बिरंगी वेशभूषा से सजे प्रतिभागियों की मौजूदगी से उत्सवमय हो उठा। नेशनल ट्राइबल मीट-2026 के पहले दिन ही यह स्पष्ट हो गया कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय विरासत, राष्ट्रीय एकता, युवा नेतृत्व और सांस्कृतिक संवाद का ऐसा राष्ट्रीय मंच है, जो आने वाले वर्षों तक लोहरदगा की पहचान बना रहेगा। उद्घाटन समारोह में एसडीपीओ श्रद्धा केरकेट्टा, पूर्व एमएलसी प्रवीण कुमार सिंह, विधायक प्रतिनिधि निशीथ जायसवाल, राजेश महतो, निश्चय वर्मा, जिला सचिव शैलेंद्र कुमार सुमन, पवन पोद्दार, सतीश महतो, सत्यजीत देवघरिया, सतीश कुमार सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

जनजातीय संस्कृति भारत की आत्मा, इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी : धीरज प्रसाद साहू
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व राज्यसभा सदस्य धीरज प्रसाद साहू ने कहा कि जनजातीय संस्कृति केवल किसी एक समाज की पहचान नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा और सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज ने सदियों से प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवित रखा है। आज जरूरत है कि नई पीढ़ी इन परंपराओं को जाने, समझे और आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि लोहरदगा जैसे छोटे जिले को राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी मिलना पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है। इससे जिले की सांस्कृतिक पहचान देशभर में और मजबूत होगी। उन्होंने युवाओं से स्काउट-गाइड की भावना को अपनाते हुए सेवा, अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। धीरज साहू ने कहा कि ऐसे आयोजन विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करते हैं और एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अवधारणा को व्यवहारिक रूप देते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे यहां से केवल पुरस्कार ही नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, सांस्कृतिक सम्मान और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी लेकर जाएं।

लोकनृत्य, लोकगीत और जनजातीय वेशभूषा ने जीता दिल
उद्घाटन समारोह के बाद शुरू हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बने। दक्षिण-पूर्व रेलवे, ओडिशा और झारखंड की टीमों ने स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान, छत्तीसगढ़ और एनएफ रेलवे की टीमों ने अपनी-अपनी जनजातीय एवं लोक संस्कृति की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन, आकर्षक लोकनृत्य और रंग-बिरंगी वेशभूषाओं ने ऐसा माहौल बनाया कि दर्शक देर तक तालियां बजाते रहे। मंच पर भारत की सांस्कृतिक विविधता का ऐसा दृश्य दिखाई दिया, जिसने आयोजन को राष्ट्रीय एकता के उत्सव में बदल दिया।

देशभर से आए बच्चों के चेहरे पर दिखी नई जगह देखने की खुशी
राष्ट्रीय ट्राइबल मीट में झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार, तमिलनाडु, उत्तराखंड सहित कई राज्यों से पहुंचे स्काउट-गाइड के बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागी एक-दूसरे की संस्कृति, भाषा और लोक परंपराओं को जानने-समझने के लिए उत्साहित नजर आए। कई प्रतिभागियों ने कहा कि लोहरदगा में उन्हें जिस आत्मीयता से स्वागत मिला, वह हमेशा याद रहेगा। स्थानीय लोगों का अपनापन, जनजातीय संस्कृति की समृद्ध झलक और आयोजन की बेहतर व्यवस्था ने उन्हें प्रभावित किया। बच्चों ने एक-दूसरे के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, सांस्कृतिक अनुभव साझा किए और नई दोस्ती की शुरुआत की।

पांच दिनों तक संस्कृति, कला और परंपराओं का महाकुंभ
नेशनल ट्राइबल मीट के दौरान अगले पांच दिनों तक प्रतिभागियों के लिए कई प्रतियोगिताएं और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इनमें जनजातीय लोकनृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प प्रदर्शनी, पारंपरिक व्यंजन, ग्रामीण मेला, रंगोली, चित्रकला, पोस्टर निर्माण, वॉल पेंटिंग, बैंड डिस्प्ले, पारंपरिक खेल और सांस्कृतिक झांकियां प्रमुख आकर्षण रहेंगी। आयोजन के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों की जनजातीय विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

नौ अगस्त को ग्रैंड कैंप फायर रहेगा सबसे बड़ा आकर्षण
भारत स्काउट एवं गाइड के जिला संगठन आयुक्त सह झारखंड स्टेट ग्रोथ कोऑर्डिनेटर गौतम लेनिन ने बताया किविश्व जनजातीय दिवस के अवसर पर 9 अगस्त की शाम ग्रैंड कैंप फायर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें राज्यपाल संतोष गंगवार सहित कई विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है। यह कार्यक्रम विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों के बीच सांस्कृतिक संवाद, मित्रता और राष्ट्रीय एकता को नई मजबूती देगा।

लोहरदगा को मिली नई राष्ट्रीय पहचान
भारत स्काउट एवं गाइड के जिला संगठन आयुक्त सह झारखंड स्टेट ग्रोथ कोऑर्डिनेटर गौतम लेनिन ने कहा कि यह आयोजन लोहरदगा के लिए ऐतिहासिक अवसर है। पहली बार जिले को राष्ट्रीय स्तर के जनजातीय समागम की मेजबानी मिली है, जिससे यहां की सांस्कृतिक विरासत को पूरे देश में नई पहचान मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रतिभागियों के आवास, भोजन, सुरक्षा, चिकित्सा और अन्य व्यवस्थाओं को उच्च स्तर पर सुनिश्चित किया गया है।










