रांचीः गैंगस्टर सुजीत सिन्हा रविवार रात पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। जामताड़ा पुलिस हिरासत में भागने के दौरान पुलिस मुठभेड़ में सुजीत सिन्हा मारा गया। साहिबगंज जेल में बंद सुजीत सिन्हा को धनबाद शिफ्ट किया जा रहा था। इसी बीच रात करीब 10 बजे जामताड़ज्ञ थाना क्षेत्र के हाइवे स्थित सुपायडीह के पास कैदी वैन पंक्चर होने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गयी। मौके पर दूसरे वाहन में शिफ्ट करने के क्रम में सुजीत सिन्हा मौके का फायदा उठा कर एक जवान से हथियार छीन कर भागने लगा और पुलिस पर फायरिंग की। इसके बाद पुलिस की ओर से की गयी फायरिंग में सुजीत सिन्हा मारा गया। जामताड़ा में डाॅक्टर नीलेश कुमार और डाॅक्टर दिनेश प्रसाद ने मौत की पुष्टि की।

बरहरवा एसडीपीओ नितिन खंडेलवाल और राजमहल एसडीपीओ विमलेश त्रिपाठी के संरक्षण में सुजीत सिन्हा को रविवार की शाम साहिबगंज से धनबाद जेल शिफ्ट करने के लिए ले जाया जा रहा था। इसी दौरान आगे चलन रही कैदी वैन पंक्चर होने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गयी। सुरक्षा कारणों से सुजीत सिन्हा को अलग-अलग जेलों में रखा गया था। हाल के दिनों में उसे साहिबगंज जेल से धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था। पुलिस को आशंका थी कि उसके गिरोह के सदस्य उसे छुड़ाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से सुरक्षा के विशेष इंतजाम किये गये थे। उसे पलामू से 12 अक्टूबर 2025 को साहिबगंज मंडल कारा लाया गया था। घटना की सूचना मिलते ही एसपी शंभू कुमार सिहं समेत जिले के कई वरीय पुलिस पदाधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गयी और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गयी। सुजीत सिन्हा पर 75 से अधिक अपराधिक मामले दर्ज है। प्रिंस खान और सुजीत सिन्हा गैंग एक साथ मिलकर अभी अपराधिक घटनाओं को अंजाम दे रहे थे। सुजीत सिन्हा गैंग ने रंगदारी के पैसे से पाकिस्तान से हथियार मंगवाया था।
पलामू का रहने वाला सुजीत सिन्हा रंगदारी के पैसे से पाकिस्तान से मंगवाता था हथियार
पलामू के रेडमा मोहल्ले का रहनेवाला सुजीत सिन्हा झारखंड के चर्चित गैंगस्टरों में शामिल था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, शस्त्र अधिनियम और संगठित अपराध से जुड़े 75 से अधिक मामले विभिन्न थानों में दर्ज बताये जाते हैं। वह पहले गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव गिरोह से जुड़ा था बाद उसने अपना अलग आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया। पुलिस के अनुसार उसका नेटवर्क पलामू, गढ़वा, लातेहार, रांची, धनबाद, चतरा और अन्य जिलों तक फैला हुआ था। उस पर कोयला कारोबार, सड़क निर्माण, ठेकेदारी, क्रशर, ट्रांसपोर्ट और अन्य व्यवसायों से लेवी वसूलने का आरोप रहे है। जांच एजेंसियों का दावा रहा है कि जेल में बंद रहने के दौरान भी वह अपने गिरोह का संचालन करता था, जो पुलिस के लिए चुनौती बन गया था।
सुजीत सिन्हा पाकिस्तान में छिपकर बैठे कुख्यात प्रिंस खान के साथ मिला हुआ था। दोनों ने मिल कर लंबे समय तक रांची समेत पूरे झारखंड में रंगदारी, गोलीबारी और संगठित अपराध की वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस के अनुसार, दोनों गिरोह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से अवैध हथियार मंगाते और रंगदारी की रकम के जरिये पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। रांची पुलिस ने गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा समेत पांच लोगों को गिरफ्तार करने के बाद इस बात का खुलासा किया था। रिया सिन्हा के अलावा कांके के चंदवे निवासी इमानुल हक उर्फ बबलू खान, मो. शाहिद उर्फ अफरीदी खान, मो. सेराज उर्फ मदन तथा पंडरा निवासी रवि आनंद उर्फ सिंघा को पकड़ा था।
एनआईए भी कर रही थी मामले की जांच
दिसंबर 2020 में लातेहार जिले के बालूमाथ में कोयला परिवहन से जुड़े वाहनों में आगजनी, पुलिस पर फायरिंग और विस्फोटक के इस्तेमाल के मामले में जांच एजेंसियों ने सुजीत सिन्हा को प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल किया था। बाद में इस मामले में जांच एनआईए तक पहुंची। दिसंबर 2025 में झारखंड सीआईडी ने सुजीत सिन्हा और उसके गिरोह से जुड़े चार महत्वपूर्ण मामलों ती जांच अपने हाथ में ले ली। सुजीत सिन्हा का अपराध वर्ष 2016 में अपने चरम पर पहुंच गया था जब रंगदारी मांगने के साथ उसने कारोबारी की हत्या कर दी थी। उस समय रांची पुलिस सक्रिय हुई तो वो ओडिशा भाग गया था। वहां चिल्का झील के पास पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। तब से वो जेल में ही था और वहीं से अपराधिक घटनाओं को अंजाम देता था। यह उसकी 16वीं जेल शिफ्टिंग थी जिसमें भागने के दौरान उसका एनकांउट हुआ। 11 मार्च 2025 को पलामू जिले में हुई अमन साहू के एनकाउंटर के बाद ये दूसरा सबसे बड़ा हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर है। अमन साहू का रायपुर से रांची लाये जाने के दौरान एनकाउंटर हुआ था।






