पटनाः बिहार पुलिस ने कुख्यात जमीन माफिया संतोष डॉन को आखिरकार दबोच ही लिया। पिछले ही महीने ईओयू की टीम ने संतोष डॉन के कई ठिकानों पर एक साथ रेड डाली थी। इस रेड के दौरान कई कागजातों को खंगाला भी गया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे पटना के खुसरूपुर थाने को सौंप दिया है। संतोष डॉन पर हत्या के प्रयास, रंगदारी और जमीन कब्जाने जैसे दो दर्जन से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हैं।
छापेमारी के दौरान क्या-क्या मिला
छापेमारी के दौरान संतोष डॉन के ठिकानों से 5.60 लाख रुपये नकद, कई जमीनों के एग्रीमेंट, निवेश संबंधी दस्तावेज, एक फॉर्च्यूनर, एक स्कॉर्पियो और एक महिंद्रा जीप जब्त की गई थी। गिरोह के अन्य सदस्यों के यहां से भी नकदी और बड़ी संख्या में जमीन से जुड़े दस्तावेज मिले थे।
संतोष डॉन का इतिहास
संतोष डॉन ने 2015 में अपराध की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज उस पर पटना, नालंदा और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में करीब दो दर्जन से अधिक केस दर्ज हैं। इनमें रंगदारी, रंगदारी के लिए हत्या, हत्या का प्रयास और जमीनों पर अवैध कब्जे जैसे अपराध शामिल हैं।सबसे ज्यादा मामले पटना जिले के खुसरूपुर थाने में दर्ज हैं। इसके अलावा फतुहा, नालंदा के भगवान बिगहा और सोहसराय थानों में भी उस पर आर्म्स एक्ट और जानलेवा हमले के मुकदमे चल रहे हैं।
गरीब किसानों की जमीन हड़पना और रंगदारी वसूलना था पेशा
इलाके में संतोष डॉन का खौफ और रसूख इतना था कि वह गरीब किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा कर लेता था। फर्जी कागजात तैयार कर सरकारी और निजी जमीनों को हड़पना उसका मुख्य काम था। इसके अलावा वह बड़े कारोबारियों से मोटी रंगदारी वसूलता था।बात न मानने पर सरेआम धमकाना और गोलीबारी करना उसके लिए आम बात थी। उसने अपने ही गांव में कई लोगों के घरों पर भी कब्जा कर रखा था और अपने रिश्तेदारों के नाम पर अकूत संपत्ति बना रखी थी।


