रांचीः झारखंड आंदोलनकारी और पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आंदोलनरत माँगो को समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अविलंब अपने पद से इस्तीफ़ा देने की मांग की है। सूर्य सिंह बेसरा पूर्व विधायक ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि पर्यावरण एवं शिक्षाविद सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। उनकी आमरण अनशन का आज 20 वॉ दिन है। इस स्थिति की नज़ाकत को देखते हुए श्री सूर्य सिंह बेसरा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक त्राहिमाम संदेश भेज कर संज्ञान लेने तथा हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। सूर्य सिंह बेसरा ने चिंता जताए है कि कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आंदोलनरत तथा शिक्षाविद सोनम वांगचुक द्वारा आमरण अनशन एक गंभीर मामला ही नहीं बल्कि अति संवेदनशील हो गई है। इसके मद्देनजर माननीय सुप्रीम कोर्ट को भी सतह संज्ञान लेना चाहिए। पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने भारत सरकार को आगाह करते हुए कहा है कि अग़र लोकतंत्र के महानायक सोनम वांगचुक ने प्राण त्याग दे दिया,तो सम्पूर्ण देश में युवाओं की शोले की चिंगारी भड़क जाएगी और इसकी प्रतिवाद स्वरूप श्री नरेन्द्र मोदी सरकार को गंभीर परिणाम भुगतनी होगी।
त्यागी विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने एक उदाहरण देकर कहा है कि जिस प्रकार 1952 में आन्ध्र के एक स्वतंत्रता सेनानी शहीद पुट्टी श्रीरामुलु ने 56 दिनों तक आमरण अनशन किया था और अंत में वो प्राण त्याग कर दिया था। इतिहास गवाह है कि श्रीरामुलु की शहीद होने के परिणामस्वरूप ही 1993 में भाषा के आधार पर आंध्रप्रदेश बना और तो और तत्पश्चात् 1956 में देश में पहली बार ” राज्य पुनर्गठन आयोग” बना और भाषा के आधार पर कई राज्यों का पुनर्गठन हुआ, जो भारत में राज्यों का विभाजन का इतिहास रहा है।
यह सर्वविदित है कि सूर्य सिंह बेसरा न सिर्फ़ एक त्यागी विधायक हैं,बल्कि वे बहुआयामी प्रतिभाशाली व्यक्तित्व है जो झारखंड राज्य निर्माताओ में से एक है और तो और वो झारखंड रत्न के साथ साथ साहित्य अकादमी नई दिल्ली द्वारा पुरस्कृत संताली में एक महाकवि भी है। बेसरा की 50 वर्षों की झारखंड आंदोलन के संघर्ष गाथा भी काफ़ी चर्चित है,,, उनकी देश के करोड़ों युवाओं अपील है कि हम कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आंदोलनरत माँगो को समर्थन करते हुए सोनम वांगचुक की जान को बचाए साथ ही भारत की संविधान आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने के लिए 1974 की तरह जय प्रकाश नारायण के आह्वान पर सम्पूर्ण क्रांति की तर्ज़ पर सत्ता और व्यवस्था परिवर्तन के लिए आंदोलित हो, चूंकि युवा ही देश की ऊर्जा शक्ति है और युवा ही देश की दशा और दिशा बदल सकती है।


