लोहरदगा : शहर के बीचोंबीच स्थित श्री जगन्नाथ महाप्रभु ठाकुरबाड़ी मंदिर में सोमवार को भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का वैदिक मंत्रोच्चार एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ महा स्नान अनुष्ठान संपन्न हुआ। महा स्नान के बाद भगवान को एकांतवास में ले जाया गया। इस अवसर पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दर्शन कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। श्री जगन्नाथ महाप्रभु ठाकुरबाड़ी मंदिर समिति के मनोज दास ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा पर महा स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद वे 15 दिनों तक एकांतवास में रहते हैं। इस अवधि में भगवान शयन कक्ष में विश्राम करते हैं और उनकी औषधीय सेवा की जाती है। मान्यता है कि दिव्य औषधियों और विशेष सेवा के बाद भगवान पुनः स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इधर, रथ यात्रा को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। श्रद्धालुओं में भगवान जगन्नाथ के नगर भ्रमण और रथ यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

खिचड़ी का लगेगा भोग, औषधीय काढ़ा होगा अर्पित
एकांतवास की अवधि में भगवान को प्रतिदिन सादा भोजन के रूप में खिचड़ी का भोग अर्पित किया जाएगा। साथ ही पारंपरिक विधि से तैयार औषधीय काढ़ा भी अर्पित किया जाएगा। इस दौरान नियमित पूजा-अर्चना जारी रहेगी, लेकिन श्रद्धालुओं को भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होंगे।

नेत्रदान के बाद रथ पर सवार होंगे महाप्रभु
श्री जगन्नाथ महाप्रभु ठाकुरबाड़ी मंदिर के मनोज दास ने बताया कि एकांतवास की अवधि पूरी होने के बाद भगवान का नेत्रदान अनुष्ठान संपन्न होगा। इसके उपरांत आषाढ़ शुक्ल पक्ष में विशेष पूजा, हवन और अनुष्ठान के बाद भगवान भक्तों को दर्शन देंगे। 15 जुलाई 2026 को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथ पर आरूढ़ होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे। वहां नौ दिनों तक विश्राम करने के बाद पुनः रथ यात्रा के माध्यम से ठाकुरबाड़ी मंदिर लौटेंगे।

भंडरा ठाकुरबाड़ी मंदिर में जगन्नाथ महाप्रभु का हुआ देवस्नान
भंडरा प्रखंड के ऐतिहासिक ठाकुरबाड़ी मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ स्वामी, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के विग्रहों का पारंपरिक देव स्नान अनुष्ठान पूरी श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ। आचार्य विभाकर पाठक के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी विग्रहों को पवित्र जल से स्नान कराया गया। इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान के मुख्य यजमान राधा मोहन शर्मा, किशोरी शर्मा रहे, जिन्होंने पूरे नियम-निष्ठा के साथ इस अनुष्ठान को संपन्न कराया।


