रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को नवचयनित 1042 इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य को खेलगांव के टाना भगत इंडोर स्टेडियम में नियुक्ति पत्र वितरित किया। इस कार्यक्रम में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, सांसद महुआ माजी समेत विभाग के वरीय अधिकारी मौजूद थे। नव चयनित आचार्य प्राथमिक और मध्य विद्यालय में अपना योगदान देंगे।इनमें पहली से पांचवीं क्लास के प्राइमरी के 274 इंटर प्रशिक्षित एवं स्नातक प्रशिक्षित 768 सहायक आचार्य शामिल हैं।
नियुक्ति पत्र सहायक आचार्यो को सौंपने के बाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब आप सरकार के एक अंग के रूप में काम करेंगे। आपको एक ऐसे क्षेत्र का जिम्मा दिया जा रहा है जहां आने वाले समय में इस राज्य का बौद्धिक क्षेत्र का आयाम कैसा हो, ये आप लोग तय करेंगे। हमारी आने वाली पीढ़ी अपने पैरों पर कैसे खड़ा हो इसको आप लोग तय करेंगे। सरकारी संस्थानों पर बहुत सारी कमियां-खामियां दिखाई देती है, कुछ खबरें सही भी होती है, कुछ गलत भी होती है। कुल मिलाकर कहे तो झारखंड में सरकार की जिम्मेदारी सवा तीन करोड़ लोगों की है। सभी लोग सरकारी कर्मचारी, आईएएस-आईपीएस पदाधिकारी, बुढ़ा-बुजुर्ग, किसान, बच्चे, नौजवान, छात्र-छात्राएं हर वर्ग यहां तक की हवा-पानी इन सबकी जिम्मेदारी सरकार की है। विधि-व्यवस्था कि जिम्मेदारी सरकार की है क्योंकि सरकार आम लोगों के द्वारा चुनी जाती है। ये मैं मानता हूं कि सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ राज्य के नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। नागरिक और सरकार अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाएं तो कोई समस्या नहीं होगी।
कुछ लोग रहे है समाज का वातावरण खराब
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आगे कहा कि देश और राज्यों में क्या स्थिति है इसकी भी आप जानकारी रखें। आज किस तरीके का वातावरण तैयार हो रहा है सिर्फ राजनीतिक हितों को साधने के लिए। ये वातावरण ठीक नहीं है, कुछ विकृत विचार वाले लोग है, समाज में इस तरीके के आग लगाने में लगे हुए है जो आग सबको परेशान करेगा। आग किसी का जात-धर्म नहीं पूछता है, वो अपना काम कर जाता है, ये भी हमें ध्यान रखें कि हम अपने आसपास ऐसे वातावरण को जन्म लेने नहीं दें, जहां हम एक-दूसरे को अलग-अलग नजरों से देखे। आप आप लोग में भी द्वेष उत्पन्न होगा तो सबसे पहले समाज को नुकसान होगा। इसमें सभी को नुकसान हो सकता है। बचपन में स्कूल के किताबों में एक कहानी हुआ करती थी कि एक अकेला लकड़ी को तोड़ना आसान है, लेकिन अगर लकड़ी की गठरी बन जाती थी उसे तोड़ना बहुत कठित है। आप सभी सहायक शिक्षक एक गठरी में बंध गए इसका टूटना आसान है क्या, ये सब आप पर निर्भर है।
झारखंड के स्कूलों में छात्रों के साथ बर्बरता बर्दाश्त नहीं-CM
मुख्यमंत्री ने आगे शिक्षकों को हिदायत देते हुए कहा कि अभी इंस्ट्राग्राम में हमने देखा कि महाराष्ट्र की एक आंगनबाड़ी सेविका तीन साल की एक बच्ची को बहुत बुरी तरीके से व्यवहार करती दिखी। अंत में सोशल मीडिया की खबर सरकार तक पहुंची और उस महिला को दंडित भी किया। हमने स्कूल की भी खबरें देखी जहां छोटे से बच्चे के साथ किस तरीके से बर्बरता हुई। ये खबरें आप सभी के विद्यालयों से नहीं आए। अगर ऐसी खबरें आएंगी तो सरकार जितने जिम्मेदारी के साथ आप लोगों के आगे बढ़ने का सोच रखती है, उतने तेजी से भी कदम खींच लेगी। सरकार की चीजों पर, सरकार की व्यवस्था पर हमें गर्व हो और उसको जितना हम बेहतर कर सके, इसपर हमें काम करना होगा। आज कहीं न कहीं हम अपनी व्यवस्था को हम कमजोर करते है, जिसकी वजह से प्राइवेट संस्थाने अपनी बिसात बैठाने लगी और यही परिकल्पना हमारे सरकारी स्कूलों पर उंगलियां उठाई जाती थी, वहीं मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय को हमने निजी स्कूलों के बराकर खड़ा कर दिया है। 9 हजार 10 हजार सीट के लिए 40 हजार से ज्यादा आवेदन आते है। हम लोग वैसे नहीं है जो अपनी लकीर बढ़ाने के लिए दूसरी की लकीर को रबड़ से मिटा देते है।


