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CBSE Class 12 re-evaluation result: साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम में झारखंड के छात्र बने नेशनल टॉपर, अवनी केजरीवाल और आदित्य मिश्रा ने बढ़ाया सम्मान

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Live Dainik

June 22, 2026

CBSE Class 12 re-evaluation result: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं कक्षा के छात्रों का री-इवैल्युएशन और री-चेकिंग का रिजल्ट जारी कर दिया गया है। काफी जद्दोजहद और परेशानियों के बाद 12वीं कक्षा के छात्रों को अब शायद थोड़ी राहत मिलेगी। अपने 12वीं कक्षा के अंक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले छात्र डिजीलॉकर पर अपना 12वीं कक्षा का परिणाम देख सकते हैं। छात्रों को इसके लिए जरूरी क्रेडेंशियल के साथ results.digilocker.gov.in पर लॉगइन करना होगा।

DPS रांची और DPS बोकारो के छात्र नेशनल टॉपर
री-इवैल्युएशन और री-चेकिंग के बाद झारखंड के दो छात्र अब नेशनल टॉपर बन गए है। डीपीएस रांची की अवनी केजरीवाल कॉमर्स की नेशनल टॉपर बन गई है और बोकारो डीपीएस के आदित्य मिश्रा साइंस स्ट्रीम में संयुक्त रूप से नेशनल टॉपर बन गए है।दोनों स्कूलों ने प्रेस रिलीज जारी कर इस बात की जानकारी साझा की है। इस अवसर पर डीपीएस रांची की प्राचार्या डॉ. जया चौहान ने कहा, “अवनी द्वारा 500 में से पूर्ण 500 अंक प्राप्त कर राष्ट्रीय टॉपर बनने की यह उपलब्धि पूरे डीपीएस रांची परिवार के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। उनकी सफलता न केवल उनकी असाधारण मेहनत और समर्पण का परिणाम है, बल्कि उस उत्कृष्टता की संस्कृति का भी प्रतिबिंब है, जिसे हमारा संस्थान निरंतर प्रोत्साहित करता है। मैं अवनी, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को इस अद्भुत उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देती हूँ। मेरी कामना है कि वह भविष्य में भी नई ऊँचाइयों को छूएँ और अनगिनत युवा प्रतिभाओं को बड़े सपने देखने तथा उन्हें साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देती रहें।”इस ऐतिहासिक सफलता का उत्सव मनाते हुए डीपीएस रांची ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि उत्कृष्टता केवल घोषणा से नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, समर्पण और शिक्षा की शक्ति में अटूट विश्वास से प्राप्त होती है।

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अब तक विज्ञान संकाय में झारखंड स्टेट टॉपर रहे आदित्य का पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के उपरांत कुल प्राप्तांक 99.20 प्रतिशत से बढ़कर 99.60 प्रतिशत हो गया। आदित्य ने विगत 13 मई, 2026 को घोषित परीक्षा-परिणाम में अपने बायोलॉजी के रिजल्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली को चुनौती दी थी। उन्होंने री-इवैल्युएशन के लिए सीबीएसई को आधिकारिक रूप से आवेदन किया, जिसका परिणाम छात्र की अपेक्षा के अनुरूप और सुखद रहा। पुनर्मूल्यांकन में आदित्य के बायोलॉजी के मार्क्स अब 96 से बढ़कर 99 हो हो गए। इसके साथ ही अब वह कानपुर की छात्रा सोनाक्षी गोयल के साथ संयुक्त रूप से विज्ञान संकाय के नेशनल टॉपर हो गए। अब इन दोनों विद्यार्थियों के कुल प्राप्तांक 99.60 प्रतिशत हैं। विदित हो कि आदित्य ने तीन विषयों – इंग्लिश कोर, केमिस्ट्री और पेंटिंग में 100 में 100 अंक हासिल किए हैं। जबकि, फिजिक्स में उन्हें 99 अंक मिले। उक्त विषयों के अलावा अन्य सभी में उन्होंने ए1 ग्रेडिंग अर्जित की है।
 


इस ऐतिहासिक प्रदर्शन पर डीपीएस बोकारो परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। सोमवार को विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने आदित्य को उनके पिता प्रजेश चन्द्र मिश्रा के साथ सम्मानित किया। प्राचार्य ने उन्हें माला पहनाई और मिठाई खिलाकर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना व्यक्त की। डॉ. गंगवार ने आदित्य की इस उपलब्धि को न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे बोकारो और समस्त झारखंड प्रदेश के लिए अत्यंत ही गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आदित्य शुरू से ही प्रतिभावान छात्र रहा है और अपनी मेधाविता, लगन व परिश्रम की बदौलत विद्यालय के कुशल शिक्षकों को मार्गदर्शन में राष्ट्रीय मानचित्र पर उसने डीपीएस बोकारो का परचम लहराया है। इस मौके पर विद्यालय के वरीय उपप्राचार्य अंजनी भूषण व उपप्राचार्या शालिनी शर्मा सहित अन्य शिक्षकगण मौजूद रहे।

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सफल डॉक्टर बन मानवता की सेवा करना चाहता है साइंस टॉपर आदित्य
99.60 फीसदी अंक लाकर डीपीएस बोकारो का झंडा राष्ट्रीय पटल पर बुलंद करने वाले सीबीएसई 12वीं बोर्ड के संयुक्त साइंस टॉपर आदित्य मिश्रा की हार्दिक अच्छा आगे चलकर एक सफल चिकित्सक बन मानवता-सेवा करने की है। सेल की रिफैक्ट्री यूनिट (एसआरयू) में मुख्य महाप्रबंधक (वित्त) प्रजेश चन्द्र मिश्रा एवं गृहिणी सस्मिता मिश्रा का होनहार पुत्र आदित्य शुरू से ही मेधावी छात्र रहा है। पुनर्मूल्यांकन के बाद उसके कुल प्राप्तांक अब 500 में 498 अंक हो चुके हैं। एक सवाल के जवाब में आदित्य ने कहा कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए वह रोजाना लगभग छह घंटे पढ़ाई किया करता था। अपनी कामयाबी का श्रेय उसने अपने माता-पिता व परिजनों के साथ-साथ विद्यालय के शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया है। आदित्य को 10वीं में कुल 96.8 प्रतिशत अंक मिले थे। डीपीएस बोकारो में उसने शुरू से ही पढ़ाई की है और हमेशा ही अपनी मेधाविता का परिचय दिया है। हालांकि, इस साल नीट की परीक्षा रद्द होने पर वह काफी दुःखी था और रविवार को दोबारा री-नीट की परीक्षा दी। बता दें कि आदित्य एनएसईजेएस- 2022 में पूरे राज्य से अकेले सफल रहा था। इसके अलावा, विभिन्न ओलंपियाडों में शानदार प्रदर्शन के लिए बेस्ट ओलंपियाड विनर का पुरस्कार, साइंस ओलंपियाड फाउंडेशन द्वारा शैक्षणिक उत्कृष्टता छात्रवृत्ति, साइंस ओलंपियाड में ओलंपियाड रैंक 1, एसओएफ नेशनल साइंस ओलंपियाड में जोनल रैंक 1, क्रिप्टिक क्रॉसवर्ड में देश में दूसरा स्थान आदि उसकी कामयाबियों की फेहरिस्त में शामिल हैं। इसी साल आईएपीटी की जीव-विज्ञान परीक्षा एनएसईबी में भी सफलता पाई थी। आदित्य को फुटबॉल और कबड्डी खेलना भी पसंद है। एक प्रश्न के जवाब में आदित्य ने बताया कि कोरोना काल उसके जीवन की पढ़ाई में टर्निंग प्वाइंट रहा, जहां से उसने अपनी पढ़ाई को एक नई दिशा दी। ऑनलाइन क्लास में उसकी पढ़ाई शिथिल हो गई थी, जिससे परिणाम प्रभावित होने लगे, जिससे उसने सीख लेते हुए कठिन परिश्रम शुरू किया और पढ़ाई में निरंतरता लाई। इसी का नतीजा रहा कि उसने बोर्ड परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ सफलता अर्जित की।

वहीं दूसरी ओर CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन और अंक सत्यापन प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। संशोधित परिणाम जारी होने के बाद कई छात्रों ने ऐसे मामलों की शिकायत की है।जिनमें या तो सही उत्तर लिखे होने के बावजूद अंक नहीं दिए गए या फिर उन विषयों के अंक बदल गए, जिनके लिए छात्र ने पुनर्मूल्यांकन का आवेदन ही नहीं किया था। इन मामलों ने बोर्ड की मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
केमिस्ट्री-सीएस में नंबर बढ़ने थे, फिजिक्स में हो गए कम
एक छात्र ने बताया कि उसने केवल रसायन विज्ञान और कंप्यूटर साइंस विषय में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था, लेकिन संशोधित परिणाम जारी होने पर उसे पता चला कि भौतिकी विषय के अंक 23 से घटकर 17 हो गए हैं।छात्र और उसके अभिभावकों का कहना है कि जब भौतिकी विषय के लिए न तो कोई आवेदन किया गया था और न ही उस विषय की उत्तर पुस्तिका दोबारा जांच के लिए मांगी गई थी, तो फिर उसमें अंक परिवर्तन कैसे हो गया।जिस विषय में थे पास, उसमें भी कर दिया फेल
वहीं, एक अन्य छात्रा ने भी इसी तरह का दावा किया। उसने रसायन विज्ञान में पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया, क्योंकि उसमें रिपीट लिख कर आ रहा था। लेकिन 21 जनवरी को जारी पुनर्मूल्यांकन परिणाम में बोर्ड ने उसे भौतिकी में भी फेल कर दिया जबकि वो उसमें पहले उत्तीर्ण थी।
एक अन्य छात्र ने दावा किया कि उसने परीक्षा में एक प्रश्न का उत्तर पूरी तरह सही लिखा था। मूल परिणाम में उस उत्तर के लिए उसे शून्य अंक दिए गए थे। छात्र ने उम्मीद की थी कि पुनर्मूल्यांकन के दौरान इस त्रुटि को सुधारा जाएगा।लेकिन संशोधित परिणाम में भी उसे उसी प्रश्न के लिए शून्य अंक ही मिले। एक अन्य छात्र ने कहा कि उसके मूल परिणाम में गणित में 12 अंक थे, पुनर्मूल्यांकन के बाद ये बढ़कर 21 अंक हो गए, लेकिन पासिंग मार्क्स तक नहीं पहुंचे।
अंक बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ
कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने उत्तर पुस्तिका की कापी देखने, अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए निर्धारित शुल्क जमा किया, लेकिन अंतिम परिणाम में कोई बदलाव नहीं हुआ।कुछ छात्रों का कहना है कि जिन उत्तरों पर उन्हें आपत्ति थी और उम्मीद थी कि इसमें 15 से 20 अंक बढ़ेंगे, वे पुनर्मूल्यांकन के बाद भी वैसे ही बने रहे।उनका आरोप है कि बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन में कापी की जांच सही से नहीं कराई और अगर कराई तो उसमें बस खानापूर्ति की गई है। छात्रों ने कहा कि कई मामलों में पुनर्मूल्यांकन अब केवल औपचारिकता बनकर रह गया है।
87 प्रतिशत विद्यार्थियों के परिणाम जारी हो चुके
इस वर्ष CBSE को 1.6 लाख से अधिक पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन आवेदन प्राप्त हुए थे। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों के कारण बोर्ड की पूरी परिणाम बाद की प्रक्रिया प्रभावित हुई और कंपार्टमेंट परीक्षा के आवेदन तक शुरू नहीं हो सके।हालांकि, बोर्ड ने संशोधित परिणाम जारी करने शुरू कर दिए हैं, अब तक आवेदन करने वालों में से 87 प्रतिशत विद्यार्थियों के परिणाम जारी हो चुके हैं। बाकियों के चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाएंगे।
शिक्षा विशेषज्ञ बोले-इन केसों की स्वतंत्र जांच हो
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया का उद्देश्य मूल्यांकन में हुई संभावित त्रुटियों को दूर करना होता है। ऐसे में यदि पुनर्मूल्यांकन के बाद भी सही उत्तरों को अंक नहीं मिलते या बिना आवेदन वाले विषयों में अंक बदल जाते हैं, तो इन मामलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।इससे छात्रों का भरोसा भी कायम रहेगा और मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी। छात्रों और अभिभावकों ने मांग की है कि CBSE मुफ्त में पुनर्मूल्यांकन की उत्तर-पुस्तिकाएं उपलब्ध कराएं और सत्र 202-26 के लिए 33 प्रतिशत उत्तीर्णता मानदंड कम किया जाए।छात्रों ने अनचेक किए गए एमसीक्यू, स्टेप मार्किंग न किए जाने, धुंधली उत्तर पुस्तिकाएं और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। CBSE से छात्रों के दावों को लेकर सवाल पूछा गया पर कोई जवाब नहीं मिला।

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