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NCPI के होंगे TMC के बागी सांसद, NDA को समर्थन, जानिये नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया का इतिहास

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Live Dainik

June 15, 2026

NCPI के होंगे TMC के बागी सांसद, NDA को समर्थन, जानिये नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया का इतिहास

डेस्कः तृणमूल कांग्रेस में तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच बागी सांसदों ने एक नये राजनीतिक दल में शामिल होने और बीजेपी के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को समर्थन देने का फैसला किया है। रविवार को दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके घर पर सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में मुलाकात के बाद तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के 20 सांसदों ने इसकी घोषणा कर दी। बागी सांसद जिस दल में शामिल होने जा रहे हैं उसका नाम नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) है।
अभिषेक बनर्जी के पत्र के बाद बदली रणनीतिः बागी सांसदों ने पहले लोकसभा अध्यक्ष से मिलकर पार्टी के ही एक गुट के रूप में मान्यता देने और सदन में बैठने की अलग व्यवस्था करने की मांग करने वाले थे। मगर टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के उस पत्र के बाद उन्होंने अपनी रणनीति बदल ली, जिसे लेकर ममता बनर्जी का साथ निभा रेह पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के घर पहुंचे और पत्र उन्हें सौंपा। इस पत्र में अभिषेक बनर्जी ने अनुच्छेद-4 का हवाला देते हुए उनसे पार्टी से अलग हुए किसी भी गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया है। इसमें तर्क दिया गया कि संविधान किसी मौजूदा राजनीति दल के भीतर एक अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देता।
काकोली घोष ने कहाकि हम पीएम मोदी के नेतृत्व में NDA के साथ मिलकर काम करेंगे। बागी गुट के पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन है।बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और शताब्दी रॉय ने कहा कि उनका गुट पहले ही एनसीपीआई में विलय कर चुका हैं।सवाल उठता है कि टीएमसी के बागी लोकसभा सांसदों की पसंद एनसीपीआई क्यों बनी? एनसीपीआई पार्टी का गठन कब हुआ और कौन इस पार्टी को चलाता है। कैसे जीरो से देश की पांचवी सबसे बड़ी पार्टी सांसदों के लिहाज से बन गई है?

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ममता से अलग हुए 20 बागी सांसदों के नाम…

लोकसभा सीटसांसदलोकसभा सीटसांसद
बारासातकाकोली घोष दस्तीदारघाटालदीपक अधिकारी (देव)
कूचबिहारजगदीश चंद्र बसुनियाझाड़ग्रामकालीपद सोरेन
जांगीपुरखलीलुर रहमानमेदिनीपुरजून मालिया
बहरामपुरयूसुफ पठानबांकुड़ाअरूप चक्रवर्ती
मुर्शिदाबादअबू ताहेर खानबर्धमान पूर्वडॉ. शर्मिला सरकार
बैरकपुरपार्थ भौमिकहावड़ाप्रसून बंधोपाध्याय
मथुरापुरबापी हलदारबोलपुरअसित कुमार माल
जादवपुरसायोनी घोषबीरभूमशताब्दी रॉय
कोलकाता दक्षिणमाला रॉयहुगलीरचना बनर्जी
आरामबागमिताली बागकोलकाता उत्तरसुदीप बंद्योपाध्याय

एनसीपीआई का गठन कब हुआ? 
नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) त्रिपुरा की रजिस्टर्ड, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है। एनसीपीआई गठन त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले 20 जनवरी 2023 को हुआ। चुनाव आयोग में एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत किया गया था। इस पार्टी का चुनाव निशान पेन निब (कलम की नोक) है।
चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी को केवल 1.13 लाख रुपये का कुल चंदा मिला था। एनसीपीआई के दस्तावेजों में शेली कुंडू का नाम पार्टी के कोषाध्यक्ष के रूप दर्ज है, लेकिन वो राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर है।एनसीपीआई के पते पर पंजीकृत दो संगठनों में भी शेवली कुंडू निदेशक हैं। बिस्वबाजार प्राइवेट लिमिटेड और पश्चिम बंगा असंगठित महिला कर्मी एसोसिएशन, जो सामाजिक कार्य गतिविधियों में शामिल एक संगठन है।
एनसीपीआई का पंजीकृत पता बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में स्थित है। पार्टी के अध्यक्ष शेली कुंडू के पति उत्तिया कुंडू हैं। उत्तिया कुंडू का वेस्ट बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ एक तस्वीर साझा की थी।
त्रिपुरा में पहला चुनाव लड़ी NCPI
बंगाल में पंजीकृत होने के बावजूद एनसीपीआई ने त्रिपुरा से अपना चुनावी पदार्पण करने का विकल्प चुना। त्रिपुरा में एनसीपीआई का कामकाज शांतनु डे संभाल रहे। पार्टी ने त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद क्षेत्र में वंचित आदिवासी  समुदायों का प्रतिनिधित्व करने के घोषित उद्देश्य के साथ त्रिपुरा की राजनीति में प्रवेश किया था।
त्रिपुरा की सात विधानसभा सीटों पर एनसीपीआई ने अपने उम्मीदवार खड़े किए थे, लेकिन चार सीटों पर उसके उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज कर दिए गए थे।ऐसे में एनसीपीआई के उम्मीदवारों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर केवल दो सीटों पर चुनाव लड़ा था और एक सीट पर निर्दलीय को समर्थन किया था। छवामनु सीट पर 536 वोट और कैलाशहर सीट पर 286 वोट मिले थे। तीसरे उम्मीदवार कृष्ण कुमार देबबर्मा ने अंबासा से निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा और 376 वोट प्राप्त किए। त्रिपुरा चुनाव के बाद पार्टी गायब हो गई।
जीरो से 20 संसद तक का सफर
शांतनु डे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि शुरू में 2023 के पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी, लेकिन ऐसा करने में असमर्थ रहे। कथित तौर पर त्रिपुरा चुनावों के बाद आंतरिक विवाद पैदा हो गए थे, जिसमें फंड को लेकर असहमति के कारण संगठनात्मक कामकाज ठप हो गया था।शांतनु डे ने कहा कि उन्होंने बाद में पार्टी नेतृत्व से 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की तैयारी करने का आग्रह किया, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।
एनसीपीआई भले ही 2024 का लोकसभा चुनाव न लड़ी है, लेकिन अब उसके 20 सांसद हो गए हैं। टीएमसी के दो-तिहाई सांसदों वाले समूह ने एनसीपीआई के साथ अपना नाता जोड़ लिया है। बागी सांसदों के टीएमसी से अलग होने की घोषणा के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की। इसके अलावासुदीप बंद्योपाध्याय ने बाद में पुष्टि की कि बागी गुट का एनसीपीआई में विलय हो गया है, इस विलय ने एनसीपीआई को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया है।

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