रांचीः पुलिस की कार्यशौली पर एक बार फिर से सवाल खड़ा हुआ है। 28 मई की रात को कोतवाली थाना क्षेत्र के अपर बाजार में हुई मारपीट की घटना इसकी मिसाल है। अपर बाजार स्थित बालाजी बुटीक के पास किशोरगंज निवासी महेश कुमार के साथ कुछ युवकों ने हथियार के बल पर मारपीट की। घटना के समय कोतवाली थाना का पीसीआर वैन वहां से गुजर रहा था। पीड़ित ने पुलिस को हाथ हिला कर रोका और मदद के लिए बुलाया। पीसीआर वाहन धीमा जरूर हुआ लेकिन आरोपियों ने पुलिस को आगे बढ़ने का इशारा कर दिया, जिसके बाद पीसीआर वाहन आगे बढ गया। घटनास्थल पर आगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद रांची पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल उठने लगे, इधर, पीड़ित महेश कुमार ने मामले को लेकर कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है।
कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी
घटना के बाद महेश कुमार ने कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।दर्ज शिकायत के अनुसार 28 मई की रात सत्येंद्र सिंह, रोहित सिंह, विशाल घोष, मोटी और ऋषभ सिंह ने हथियार के बल पर उन्हें रोका और जमकर मारपीट की। आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि हमलावरों ने न केवल शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया बल्कि उन्हें लगातार डराने और धमकाने का भी प्रयास किया। प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
पहले भी हो चुकी है मारपीट और छिनतई
महेश कुमार ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि यह पहली बार नहीं है जब इन लोगों ने उनके साथ मारपीट की हो। उन्होंने बताया कि 8 मई 2026 को भी इन्हीं आरोपियों ने किशोरगंज इलाके में उनके साथ मारपीट की थी और उनकी चेन छीन ली थी। उस मामले में सुखदेवनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि उस मामले में भी पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।कार्रवाई नहीं होने के कारण आरोपियों का मनोबल बढ़ गया और उन्होंने दोबारा इस घटना को अंजाम दिया।
सुबह सिटी एसपी से मिला पीड़ित का परिवार, रात में पुलिस ने चार को उठाया
शुक्रवार सुबह तक कोई कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित और उसके परिवार ने सिटी एसपी से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की। इसके बाद, देर रात कोतवाली पुलिस ने चार युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। इधर, घटना को लेकर पुलिस का कहना है कि घटनास्थल के पास कुछ युवक खड़े थे और कुछ युवक बैठे हुए थे। इससे पीसीआर को किसी तरह की मारपीट का संदेह नहीं हुआ, ऐसा होता, तो पुलिस जरूर रूकती।


