पटनाः बिहार की सियासत में पूर्व सांसद Anand Mohan Singh के लगातार बयानों से सियासी तापमान बढ़ गया है। जनता दल यूनाइटेड ने आनंद मोहन को पार्टी और नेतृत्व पर बयानबाजी करने से पहले ‘सोच-समझकर बोलने’ की नसीहत दी है।जदयू नेताओं ने साफ कहा कि आनंद मोहन पार्टी के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें पार्टी के अंदरूनी फैसलों और नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
“ निशांत कुमार को स्वास्थ्य मंत्रालय इसलिए दिया गया क्योंकि दोनों बाप — बेटे को डॉक्टर की ज़रूरत है। ”
— आनंद मोहन pic.twitter.com/7ufnLLysAO
— Tejashwii Yadav (@TejashwiYdvRJD) May 18, 2026
'नीतीश कुमार को कोई दफन नहीं कर सकता'
भवन निर्माण मंत्री Leshi Singh ने सोमवार को पलटवार करते हुए कहा कि जदयू में कभी 'थैली की राजनीति' नहीं रही।उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar करोड़ों लोगों के दिल में बसते हैं और उनकी पहचान को कोई मिटा नहीं सकता।
दरअसल, आनंद मोहन हाल के दिनों में लगातार आरोप लगा रहे हैं कि जदयू के भीतर कुछ लोग नीतीश कुमार की राजनीतिक पहचान खत्म करने में जुटे हैं।उन्होंने टिकट और मंत्री पद के बदले पैसे लेने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए थे।
जदयू प्रवक्ताओं ने भी दिया जवाब
जदयू के मुख्य प्रवक्ता Neeraj Kumar समेत अन्य नेताओं ने कहा कि पार्टी से जुड़े फैसले नेतृत्व का विषय हैं।बाहर के लोगों को उस पर टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।डा. निहोरा प्रसाद यादव और अंजुम आरा ने भी कहा कि नीतीश कुमार की पहचान बिहार की राजनीति में मजबूत है और उसे कमजोर करने की कोई कोशिश सफल नहीं होगी।जदयू नेताओं ने यह भी याद दिलाया कि आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद पार्टी की सांसद हैं, जबकि उनके पुत्र चेतन आनंद जदयू विधायक हैं।
टिकट बेचने के आरोप पर नया विवाद
इधर बिहार सवर्ण आयोग के सदस्य Rajkumar Singh ने भी आनंद मोहन पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि टिकट बेचने का अनुभव आनंद मोहन को ही है।
राजकुमार सिंह ने दावा किया कि जब आनंद मोहन की बिहार पीपुल्स पार्टी थी, तब टिकट बेचे जाते थे। उन्होंने कहा कि वह खुद उस पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे हैं और उनके हिस्से का टिकट भी बेच दिया गया था।


