डेस्कः सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सुरक्षा बलों के लगातार ऑपरेशन के बीच माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा के करीबी नक्सली नरहरि उर्फ विश्वनाथ उर्फ संतोष ने पत्नी सुजाता उर्फ पूनम के साथ तेलंगाना में आत्मसमर्पण कर दिया है। हनुमाकोंडा जिले के काजीपेट मंडल के सोमदी गांव के निवासी नरहरि पर 25 लाख रुपये का इनाम था।
बताया जा रहा है कि विश्वनाथ संगठन के टेक्निकल विंग का प्रमुख माना जाता था। वह लंबे समय से संगठन के दस्तावेज, डिजिटल संचार, पोस्ट, वीडियो और गोपनीय रिकार्ड संभालने की जिम्मेदारी निभा रहा था। उसकी पत्नी पूनम उर्फ शोभा भी संगठन में रीजनल कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय थी।
खुफिया जानकारी के अनुसार, नरहरि माओवादी पार्टी के भीतर बिहार-झारखंड विशेष क्षेत्र समिति के प्रभारी, पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के प्रभारी और झारखंड तकनीकी प्रभाग के प्रभारी के रूप में कार्यरत थे। उनकी पत्नी पूनम, जो मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गुंटूर क्षेत्र की रहने वाली हैं, कथित तौर पर क्षेत्रीय समिति की सदस्य के रूप में काम कर रही थीं।
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा बलों की लगातार दबिश और मुठभेड़ों में नुकसान के बाद संगठन कमजोर पड़ा है। जनवरी से अब तक कई बड़े नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। अब मिसिर बेसरा के पूर्व बॉडीगार्ड सनत समेत दर्जनभर नक्सलियों के भी सरेंडर करने की चर्चा है। इधर, लंबे समय से सक्रिय महिला नक्सली आशा दी उर्फ बेला भी कोलकाता में गिरफ्तार हो चुकी है।
नरहरि उर्फ विश्नाथ कॉलेज के दिनों ही संगठन से जुड़ा
नरहरि ने 1980 के दशक की शुरुआत में वारंगल के एलबी कॉलेज में अपनी डिग्री की पढ़ाई के दौरान माओवादी आंदोलन में प्रवेश किया। बताया जाता है कि वे तत्कालीन जनयुद्ध के नेताओं पुली अंजैया और क्रांति राणादेव से प्रभावित थे।बताया जाता है कि वह 1981 में भूमिगत हो गया था और तब से अपने परिवार से दूर रहा है, यहां तक कि त्योहारों या पारिवारिक अवसरों पर भी घर नहीं लौटता था।


