JMM सांसद जोबा मांझी ने लोकसभा में की जनगणना  में सरना धर्म कोड की मांग, महिला आरक्षण पर कही बड़ी बात

Joba manjhi

नई दिल्ली: झारखंड की सांसद जोबा मांझी ने लोकसभा में महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन पर बोलते हुए सरना धर्म कोड की मांग की । जोबा मांझी ने कहा कि आदिवासियों के लिए जनगणना  में अलग से सरना धर्म कोड होना चाहिए । उन्होंने जाति जनगणना पर जोर देते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए । उन्होंने कहा है कि उनकी पार्टी महिलाओं के लिए तैंतीस प्रतिशत आरक्षण के समर्थन में हैं लेकिन 2023 में लागू होने के बाद भी इसे ठंडे बस्ते में रखा गया । जोबा मांझी ने जाति जनगणना की मांग की और आदिवासियों के लिए अलग से सरना धर्म कोड की मांग की ।

 संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर जारी बहस के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद जोबा मांझी ने सरकार पर कई अहम सवाल खड़े किए। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए इसके क्रियान्वयन के तरीके और समयसीमा पर गंभीर आपत्तियां जताईं।

जोबा मांझी ने अपने संबोधन की शुरुआत पार्टी नेतृत्व और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार जताते हुए की। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक और परिसीमन जैसे मुद्दों पर बोलने का अवसर मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने सवाल उठाया कि पहले लाए गए संविधान संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के बावजूद इसे लंबे समय तक लागू क्यों नहीं किया गया, और अब नया संशोधन विधेयक लाने की क्या जरूरत पड़ी।

मांझी ने यह भी कहा कि विपक्ष ने 2024 के आम चुनाव से ही महिला आरक्षण लागू करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन के बाद 2029 तक लागू करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन की बात कर रही है, जो मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।

सांसद ने जनगणना और जातिगत आंकड़ों को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने पूछा कि जब सरकार संसद में जातिगत जनगणना की बात कर रही है, तो फिर सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ रुख क्यों अपनाया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि जनगणना शुरू हो चुकी है, तो उसका स्पष्ट प्रशासनिक आधार देश के सामने रखा जाना चाहिए।

जोबा मांझी ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां बड़ी संख्या में महिलाओं को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है, जो महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल खड़ा करता है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन बिना जातिगत जनगणना के यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि सभी वर्गों—आदिवासी, ओबीसी और अनुसूचित जाति—की महिलाओं को इसका समान लाभ मिल सके।

अपने संबोधन के अंत में मांझी ने आदिवासी समाज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में लगभग 12 करोड़ आदिवासी हैं, लेकिन उनकी अलग पहचान सुनिश्चित करने के लिए जनगणना मेंसरना कोडको शामिल करना जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मांग पर ठोस कदम उठाने की अपील की।

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