ट्रेजरी घोटाले की होगी CID जांच, DSP और SP भी जांच के घेरे में, मास्टरमाइंड शंभु हेलीकॉप्टर से दीघा गया था पार्टी करने

ट्रेजरी घोटाले की होगी CID जांच, DSP और SP भी जांच के घेरे में, मास्टरमाइंड शंभु हेलीकॉप्टर से दीघा गया था पार्टी करने

रांचीः ट्रेजरी से वेतन निकासी में हुए घोटाले की सीआईडी जांच होगी। राज्य सरकार ने इसके साथ ही महालेखाकर से सभी ट्रेजरी औश्र एसपी ऑफिस का स्पेशल ऑडिट करने का फैसला भी लिया है। इसका प्रस्ताव सीएमओ पहुंच चुका है। सीएम की मंजूरी मिलने ही आदेश जारी हो जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन में बैठक बुलाई। इसमें मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव गृह वंदना दादेल, डीजीपी तदाशा मिश्रा और वित्त सचिव प्रशांत कुमार मौजूद थे। इस मैराथन बैठक में डीजीपी ने कहा कि सभी जिलों में एसपी को अपने कार्यालयों में हुई निकासी की जांच कर एक सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। वहीं वित्त सचिव ने बताया कि पूरे मामले की जांच विभागीय कमेटी से कराई जा रही है।

पटना में हाईटेक लूट का पर्दाफाश, यू-ट्यूब देख नकली कस्टम अधिकारी बने,20 करोड़ का सोना उड़ाया
मुख्यमंत्री ने इस गड़बड़ी पर गंभीर नाराजगी जताई। उन्होंने चल रही जांच के बारे में विस्तृत जानकारी ली। अधिकारियों से कहा कि पूरे मामले की जांच सीआईडी को सौंपे। वित्त सचिव इस आशय का प्रस्ताव तैयार करें। बैठक में सभी ट्रेजरी स्पेशल ऑडिट कराने पर भी सहमति बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में दोषियों को नहीं बख्शेगी।
हजारीबाग और बोकारो के पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी ट्रेजरी घोटाले में संदेह के घेरे में है। हजारीबाग के वर्तमान डीएसपी अमित कुमार डीडीओ का चार्ज संभाल रहे हैं, जबकि बोकारो जिले में डीएसपी अनिमेष गुप्ता यह जिम्मेदारी निभा रहे है। हजारीबाग में जांच के क्रम में पुलिस अधिकारियों को जानकारी मिली है कि यह मामला वर्ष 2014 से चल रहा था। आमतौर पर जिले में डीएसपी को एसपी डीडीओ का चार्ज देते हैं, लेकिन हजारीबाग जिले में बीच में एसपी भी डीडीओ का चार्ज संभाल चुके है। इधर ट्रेजरी घाटाले की जांच का दायरा जैस-जैसे बढ़ रहा है, राज्य में और जगहों पर भी ऐसी ही गड़बड़ियों के संकेत मिलने लगे है। बोकारो, हजारीबाग के बाद पलामू ट्रेजरी में गड़बड़ी का मामला उजागर हुआ है। पलामू में भी कुबेर पोर्टल में ज्यादा भुगतान किये जाने का शक जताया गया है। तीन से चार ऐसे मामले पकड़े गये है, जिसमें ज्यादा भुगतान किया गये हैं, जिनमें ज्यादा भुगतान किया गया है। पलामू में भी पुलिसकर्मियों को ही वेतन मद में ज्यादा भुगतान करने की आशंका जताया गयी है। मामला सामने आने के बाद विभागीय सचिव ने पलामू डीसी से रिपोर्ट मांगी है।अब तक पलामू ट्रेजरी में 30 करोड़ से ज्यादा के अवैध निकासी का मामला सामने आया है।

राज्यपाल संतोष गंगवार ने लौटाई सूचना आयुक्तों की नियुक्ति वाली फाइल, RTI कानून और कोर्ट के फैसलों का हवाला
मास्टरमाइंड शुंभु हेलीकाप्टर से दीघा गया पार्टी करने, रोज का खर्च 30-40 हजार रुपये
ट्रेजरी घोटाले का मास्टरमाइंड आरोपी शंभु 2014-15 में दोस्तों के साथ हेलीकॉप्टर रिजर्व कर दीघा पार्टी करने गया था। वहां उसने दोस्तों को शराब की पार्टी दी थी। ट्रेजरी घोटाले की प्रारंभिक जांच में ही काली कमाई का बड़ा साम्राज्य साने आ रहा है। वेतनमद से करोड़ों की फर्जी निकासी मामले के मास्टरमाइंड शंभु कुमार की लाइफस्टाइल लग्जरी भी थी। जांच में सामने आया कि शंभु का दैनिक खर्च 30 से 40 हजार रुपये था। हर दिन विभिन्न एटीएम के माध्यम से 30 से 40 हजार रुपये की निकासी की गयी है। वह सठ्टा खेलता था और आलीशान जीवन जीता था। सूत्रों के अनुसार, शंभू हर साल न्यू ईयर पर भव्य पार्टी देता था, जिसमें लाखों रुपये खर्च किये जाते थे। फर्जी निकासी की जांच जारी है। जांच में पता चला है कि आरोपियों ने कई ठिकानों पर जमीन और महंगी गाड़ी स्कॉर्पियो, थार और इनोवा खरीदी है।
इस मामले के मास्टरमाइंड सिपाही शंभू कुमार को जैसे ही बोकारो ट्रेजरी में गड़बड़ी पकड़े जाने की सूचना मिली, उसने तुरंत तीन करोड़ रुपए अपनी साली, साला, सरहज और अन्य रिश्तेदारों के खाते में ट्रांसफर कर दिया। सूत्रों के अनुसार, इससे पहले साल 2018 में भी उसने चेक के जरिए एक दारोगा के खाते में 10 लाख रुपए जमा किया था। इस मामले में एसबीआई के 21 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है। हजारीबाग ट्रेजरी में बीते आठ साल में 28 करोड़ रुपए की फर्जी तरीके से निकासी की गई है।ट्रेजरी घोटाले में पुलिस ने अकाउंट सेक्शन में कार्यरत तीन सिपाहियों मास्टरमाइंड शंभु कुमार, धीरेंद्र कुमार सिंह और रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इसके अलावा शंभु और रजनीश की पत्नी को भी न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसके अलावा शंभु और रजनीश की पत्नी को भी न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इस तरह कुल पांच आरोपियों को अब तक जेल भेजा गया है। पुलिस अब आरोपियों के परिजनों और ससुराल पक्ष के लोगों से भी पूछताछ की तैयारी में है। पुलिस ने बताया कि शंभु कुमार 2012 से ही इस गबन को अंजाम दे रहा था। वर्ष 2019 में इसकी जानकारी रजनीश और धीरेंद्र को हुई, जिसके बाद शंभु ने दोनों को इस गोरखधंधे में अपने साथ जोड़ लिया। इसके बाद तीनों ने मिलकर फर्जी खातों से लगातार पैसे ट्रांसफर किये। हजारीबाग जिला प्रशासन की जांच टीम ने शंभु कुमार की एपी कॉलोनी स्थित पैतृक घर की तलाशी ली, जहां जमीन खरीददारी से जुड़े कई दस्तावेज जब्त किये है। जांच में पता चला है कि शंभु ने नया मकान बनावाने के लिए पुराने का रिनोवेशन भी कराया। वहीं हजारीबाग बाईपास के साथ पुराने रजनीश उर्फ पंकज के नए घर की भी तलाशी ली गई, जहां से जमीन से जुड़े कागजात मिले हैं।
जांच में पता चला कि अकाउंट सेक्शन में तैनात सिपाही शंभू कुमार, रजनीश कुमार सिंह और धीरेंद्र सिंह बाल सिपाहियों के वेतन के मद से ज्यादा पैसे निकाल लेते थे। उसे चिन्ह्रित खातों में ट्रांसफर करते थे। फिर तय राशि बाल सिपाहियों के खातों में भेज दिया जाता था। बाल सिपाहियों को यह जानकारी नहीं होती थी कि उन्हें कितना वेतन मिलना चाहिए और किस खाते से भुगतान होना है। पैसे मिलते ही वो संतुष्ट हो जाते थे।
सिपाही शंभू कुमार ने 14 साल की नौकरी में हजारीबाग और गयाजी में 15 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति बना ली। गयाजी के एपी कॉलोनी-मुस्तफाबाद इलाके में उसकी करीब 7 करोड़ रुपए की आलीशान बिल्डिंग है। वो भी एसपी कोठी पीछे है। गोरखधंधे में शामिल रजनीश कुमार सिंह चतरा के प्रतापपुर का रहनेवाला है। उसने हजारीबाग में भारत माता चौक के पास तीन कट्ठा जमीन पर दो मंजिला आलीशान मकान बनवाया है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now