असम के लिए आज का दिन मतदान का नहीं, अपने अधिकार, सम्मान और भविष्य तय करने का दिन है, कल्पना सोरेन ने कहा-‘संघर्ष रुकेगा नहीं, जीतेगा’

असम के लिए आज का दिन मतदान का नहीं, अपने अधिकार, सम्मान और भविष्य तय करने का दिन है, कल्पना सोरेन ने कहा-'संघर्ष रुकेगा नहीं, जीतेगा'

रांचीः असम के 126 सीटों पर हो रहे मतदान के बीच जेएमएम विधायक कल्पना सोरेन ने जनता के नाम एक संदेश अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर जारी किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा है कि असम के लिए आज का दिन मतदान का नहीं, अपने अधिकार, सम्मान और भविष्य तय करने का दिन है। संघर्ष रुकेगा नहीं, संघर्ष जीतेगा।

 

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बाद उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने असम की आदिवासी जनता को एकजुट होकर अपने अधिकार और सम्मान के लिए वोट डालने की अपील की है। असम के 126 विधानसभा सीटों में जेएमएम ने 18 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे है और हेमंत सोरेन के साथ कल्पना सोरेन ने भी पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में कई सभाएं की। कल्पना सोरेन ने एक्स पर असम में हो रहे मतदान के बीच एक और संदेश जारी किया है जिसमें लिखा है कि प्रिय असमवासियों,
मैं यह पत्र केवल एक राजनीतिक प्रतिनिधि के रूप में नहीं,
बल्कि एक संवेदनशील नागरिक और एक स्त्री के रूप में लिख रही हूँ- जिसे इस देश के आदिवासी समाज के दर्द को समझने और महसूस करने का अवसर मिला है।
असम के चाय बागानों में काम करने वाले हमारे आदिवासी भाई-बहनों की कहानी
सिर्फ मेहनत की नहीं,
बल्कि एक लंबे और गहरे अन्याय की कहानी है।
पीढ़ियों पहले उन्हें उनके घरों से दूर लाया गया,
इस धरती से जोड़ा गया,
और उन्होंने बिना किसी शर्त के इसे अपना सब कुछ दे दिया- अपना श्रम, अपना जीवन, अपनी आने वाली पीढ़ियाँ।
लेकिन आज एक सीधा सवाल खड़ा होता है-
क्या इस समाज को उसका हक़ मिला?
सच्चाई यह है कि आज भी असम का आदिवासी समाज
अपने मूल अधिकार-ST के संवैधानिक दर्जे से वंचित है।
यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं,
बल्कि एक ऐसी पीड़ा है
जो हर उस परिवार में महसूस होती है
जहाँ सपनों को पहचान के अभाव में सीमित कर दिया जाता है।
जब किसी बच्चे को यह महसूस कराया जाता है
कि वह इस देश के ढांचे में पूरी तरह स्वीकार नहीं किया गया है,
तो यह केवल उसका नहीं,
बल्कि पूरे समाज का नुकसान है।
और सबसे दुखद यह है कि
दशकों तक इस मुद्दे को टाला गया,
मानो यह कोई प्राथमिकता ही न हो।
मैं पूरे सम्मान और स्पष्टता के साथ कहना चाहती हूँ,
असम के आदिवासियों को ST का दर्जा न मिलना
सिर्फ देरी नहीं,
बल्कि एक निरंतर अन्याय है।
यह राजनीति का विषय नहीं,
यह सम्मान, पहचान और न्याय का प्रश्न है।
अब समय आ गया है कि
हम इस सच्चाई को स्वीकार करें,
इस पीड़ा को समझें,
और इसे सुधारने के लिए ठोस निर्णय लें।
मैं असम की जनता से कहना चाहती हूँ-
आपकी आवाज़ महत्वपूर्ण है,
आपका अधिकार वैध है,
और आपका सम्मान अनिवार्य है।
अब समय है कि
लोकतंत्र इस प्रश्न का स्पष्ट और न्यायपूर्ण उत्तर दे।
आपकी अपनी,
कल्पना सोरेन

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