प्रशांत बोस का फर्जी रिश्तेदार बनकर शव लेने पहुंचा, सत्यापन के दौरान हुआ गायब, आज प्रशासन करेगा अंतिम संस्कार

प्रशांत बोस का फर्जी रिश्तेदार बनकर शव लेने पहुंचा, सत्यापन के दौरान हुआ गायब, आज प्रशासन करेगा अंतिम संस्कार

रांचीः प्रतिबंधित संगठन माकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य और ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के सचिव रहे 82 वर्षीय प्रशांत बोस का अंतिम संस्कार रविवार को नहीं हो सका। रिम्स के मोर्चरी से श्मशान तक 72 घंटे से ज्यादा का इंतजार शव को करना पड़ेगा। सोमवार को प्रशांत बोस का अंतिम संस्कार जिला प्रशासन करेगा। यह निर्णय प्रशांत बोस की पत्नी शीला मरांडी के आग्रह पर रांची के जिला प्रशासन ने रविवार शाम को लिया। हालांकि एनएचआरसी की गाइडलाइन के अनुसार, जिस बॉडी की पहले से शिनाख्त रहती है और उसका कोई परिजन नहीं रहता है, तो 24 घंटे में शव का अंतिम संस्कार कर देना है।

एक करोड़ के ईनामी नक्सली प्रशांत बोस का शव लेने कोई नहीं आया, पत्नी ने पत्र लिखकर कहा-कोई परिजन नहीं है
तीन अप्रैल को सुबह 6.29 मिनट पर नक्सलियों के थिंक टैंक माने जाने वाले प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का निधन हो गया था। पत्नी ने प्रशासन से उसके अंतिम संस्कार को करने का आग्रह किया वहीं दूसरी ओर रविवार को एक व्यक्ति होटवार जेल प्रशांत बोस का शव लेने पहुंचा। लेकिन सत्यापन की बात आते ही वह गायब हो गया। उसने खुद को पश्चिम बंगाल का निवासी बताते हुए कहा कि प्रशांत बोस के बड़े भाई ने उसे शव लेने के लिए भेजा है।

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इस संबंध में एक पत्र भी जेल प्रशासन को सौंपा गया। जब जेल प्रशासन ने उससे रिश्ते का प्रमाण मांगा तो उसने खुद को दूर का रिश्तेदार बताया और बड़े भाई की तबीयत खराब होने की बात कही। संदेह होने पर प्रशासन ने एसडीएम से सत्यापन कराने को कहा। स्पष्ट किया गया कि सत्यापन के बाद ही शव सौंपा जाएगा। इसके बाद उक्त व्यक्ति वहां से चला गया और वापस नहीं लौटा।गौरतलब है कि 12 नवंबर 2021 को सरायकेला के गितिलबेड़ा टोल प्लाजा से गिरफ्तार एक करोड़ का इनामी नक्सली प्रशांत बोस होटवार जेल में बंद था। 3 अप्रैल की सुबह उसकी मौत हो गई। तब से अब तक शव लेने कोई नहीं पहुंचा था।

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