डेस्कः 19 मार्च को रमजान का 29वां दिन था और भारत में चांद नजर नहीं आया। शव्वाल का चांद नहीं देखे जाने के बाद इमारत ए शरिया ने भारत में 21 मार्च को ईद मनाए जाने की घोषणा कर दी है। लोग अपनी नग्न आंखों से या दूरबीन की मदद से आसमान में शव्वाल का चांद तलाशने में जुटे रहे। हालांकि, खराब मौसम होने पर टेलीस्कोप का इस्तेमाल भी किया गया। लेकिन आज चांद देखने में सफलता नहीं मिली।
सऊदी अरब में बुधवार को ईद का चांद नहीं देखा जा सका, इसलिए वहां अब गुरुवार की जगह शुक्रवार को ईद मनाई जाएगी। इसके साथ ही, तुर्किये और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भी शुक्रवार, 20 मार्च को ही ईद मनाने की घोषणा की है।
इस्लामी परंपरा के अनुसार, चांद देखना एक धार्मिक प्रक्रिया है। मुस्लिम समुदाय पैगंबर मोहम्मद की दी गई सीख का पालन करता है। नियम के मुताबिक, चांद देखकर ही रोजा शुरू किया जाता है और महीने के आखिर में चांद देखकर ही रोजा खोला जाता है। अगर चांद दिखता है तो रमजान खत्म होता है और अगले दिन ईद होती है, वरना 30 दिन पूरे किए जाते हैं।
चांद का दिखना भौगोलिक स्थिति (Geography), मौसम और टाइम जोन पर निर्भर करता है। यही कारण है कि सऊदी अरब और भारत में अक्सर अलग-अलग दिनों पर ईद मनाई जाती है। आमतौर पर भारत में सऊदी अरब के एक दिन बाद ईद होती है, हालांकि कई बार दोनों जगह एक ही दिन भी त्योहार मनाया गया है। सऊदी अरब का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि वहां मक्का और मदीना जैसी इस्लाम की सबसे पवित्र मस्जिदें हैं।
इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है। इसमें हर महीना नए चांद के साथ शुरू होता है। नए चांद को अरबी में ‘हिलाल’ कहते हैं। लूनर कैलेंडर के महीने 29 या 30 दिन के होते हैं। हालांकि आजकल एस्ट्रोनॉमिकल कैलकुलेशन का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन आज भी परंपरा के तौर पर चांद को आंखों से देखना ही सबसे विश्वसनीय माना जाता है।









