एमएस धोनी को 10 लाख रुपये कराने होंगे जमा, 100 करोड़ के मानहानि केस में मद्रास हाईकोर्ट का आदेश

Picture of Live Dainik

Live Dainik

February 12, 2026

एमएस धोनी को 100 करोड़ के मानहानि मामले में नोटिस, 9 अक्टूबर तक कोर्ट में जवाब दाखिल करने का निर्देश

डेस्कः मद्रास उच्च न्यायालय ने धोनी को सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी के खिलाफ मानहानि के मुकदमे में अनुवाद के लिए 10 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। मद्रास हाईकोर्ट के दुभाषिया अनुभाग ने पाया था कि कॉम्पैक्ट डिस्क की सामग्री का प्रतिलेखन और अनुवाद एक बहुत बड़ा कार्य है जिसे पूरा करने में तीन से चार महीने लग सकते हैं। यह मुकदमा उन्होंने एक सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी, कुछ पत्रकारों और टेलीविजन चैनलों के खिलाफ 2013 के इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) सट्टेबाजी घोटाले में उनका नाम घसीटने के लिए दायर किया था।

मशहूर एंकर सरला माहेश्वरी का निधन,दूरदर्शन के गोल्डन एरा का अंत
न्यायमूर्ति आर.एन. मंजुला ने कहा कि सामग्री के प्रतिलेखन और अनुवाद का खर्च केवल वादी को ही वहन करना होगा, खासकर तब जब उच्च न्यायालय के दुभाषिया ने बताया था कि यह एक बहुत बड़ा कार्य है जिसमें एक दुभाषिया और एक टाइपिस्ट को विशेष रूप से नियुक्त करने पर भी लगभग तीन से चार महीने लगेंगे। दुभाषिया अनुभाग ने भी लागत ₹10 लाख आंकी थी।
इसलिए, न्यायाधीश ने क्रिकेटर को 12 मार्च, 2026 या उससे पहले मुख्य न्यायाधीश राहत कोष में 10 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया, ताकि 12 साल पुराने मानहानि के मुकदमे को आगे बढ़ाया जा सके, जो कई अंतरिम मुकदमों के कारण विलंबित हो गया था। यह मुकदमा ज़ी मीडिया कॉर्पोरेशन, पत्रकार सुधीर चौधरी, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार और न्यूज़ नेशन नेटवर्क के खिलाफ दायर किया गया था।

See also  बिहार में रामनवमी के प्रसाद के लिए खूनी जंग, दरभंगा में युवक को तलवार से काटा

PM मोदी की मां को गाली देने वाले शख्स को पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत,5 महीने बाद जेल से आएगा बाहर,देशद्रोह सहित 3 मामले थे दर्ज
मुकदमे में 12 साल की देरी
हालांकि, दोनों पक्षों द्वारा अलग-अलग राहत की मांग करते हुए दायर किए गए कई आवेदनों के कारण मुकदमे की सुनवाई 12 साल से अधिक समय तक टल गई। दिसंबर 2023 में, न्यायमूर्ति एसएस सुंदर (अब सेवानिवृत्त) और सुंदर मोहन की खंडपीठ ने सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी को आपराधिक अवमानना ​​का दोषी ठहराया और उन्हें 15 दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में इस सजा पर रोक लगा दी।
धोनी ने मानहानि के मुकदमे में बचाव करते हुए सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी के खिलाफ अवमानना ​​याचिका दायर की थी। जुलाई 2022 में, तत्कालीन एडवोकेट जनरल आर. शनमुगसुंदरम ने इस बात से संतुष्ट होने के बाद क्रिकेटर को अवमानना ​​याचिका पर आगे बढ़ने की अनुमति दी थी कि श्री कुमार द्वारा मुकदमे के लिखित बयान में की गई टिप्पणियां अदालत की कार्यवाही को बदनाम करने के समान थीं।

See also  झारखंड में उद्घाटन से पहले टूटा करोड़ो की लागत से बन रहा पुल, इस जिले से दो-दो मंत्री है सरकार में शामिल

रांची कलेक्ट्रेट को बम से उड़ाने की धमकी,मचा हड़कंप, डॉग स्क्वॉड की टीम ने की जांच
अंततः 11 अगस्त, 2025 को, न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन ने मुकदमे की शुरुआत का आदेश दिया और धोनी के साक्ष्य को आपसी सहमति से सुविधाजनक स्थान पर दर्ज करने के लिए एक अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त किया, क्योंकि यह महसूस किया गया कि क्रिकेटर की व्यक्तिगत उपस्थिति पर जोर देने से, उच्च न्यायालय परिसर के भीतर स्थित मास्टर की अदालत में परीक्षा और जिरह दोनों के लिए, अराजकता पैदा हो सकती है क्योंकि वह एक सेलिब्रिटी हैं।
संपथ कुमार ने इस आदेश के खिलाफ न्यायमूर्ति एस.एम. सुब्रमण्यम और मोहम्मद शफीक की खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की, जिन्होंने नवंबर 2025 में अपील को यह देखते हुए खारिज कर दिया कि क्रिकेटर की उच्च न्यायालय में उपस्थिति के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता होगी और इसलिए कहीं और उनके साक्ष्य दर्ज करने के लिए एक अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त करने में कुछ भी गलत नहीं था।

See also  ICC T20 World Cup: भारत-पाकिस्तान के मैच पर की सुरक्षा अमेरिकी राष्ट्रपति की सिक्योरिटी से ज्यादा, टिकटों की इतनी क़ीमत की जान कर रह जाएगें दंग
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now