मणिपुर में फिर भड़की हिंसा: चुराचांदपुर में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों की झड़प, कूकी विधायकों के सरकार में शामिल होने का विरोध

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Live Dainik

February 5, 2026

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5 फरवरी 2026 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच जोरदार झड़प हुई। यह विरोध कूकी-जो समुदाय के विधायकों द्वारा नवगठित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने के खिलाफ किया गया।

कूकी-जो परिषद समेत कई कूकी संगठनों ने शपथ लेने वाले विधायकों के खिलाफ “सामाजिक बहिष्कार” का ऐलान किया है। संगठनों का कहना है कि यह फैसला अलग प्रशासन की मांग और समुदाय के सामूहिक राजनीतिक रुख के साथ विश्वासघात है।

तुइबोंग बाजार में आगजनी, पथराव के बाद लाठीचार्ज

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब तुइबोंग बाजार के पास प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन के खिलाफ नारेबाजी की। अधिकारियों के मुताबिक, जब सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की तो पथराव शुरू हो गया, जिसके बाद लाठीचार्ज करना पड़ा।

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इस झड़प में दो लोगों के मामूली रूप से घायल होने की सूचना है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
“स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।”

 

राष्ट्रपति शासन के बाद बनी सरकार पर आदिवासी संगठनों की नाराजगी

मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह जहां एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं आदिवासी संगठनों का आरोप है कि मेइती-प्रधान सत्ता व्यवस्था उनके राजनीतिक मत और सामूहिक निर्णयों को नजरअंदाज कर रही है।

यह विरोध ‘जॉइंट फोरम ऑफ सेवन’ द्वारा बुलाए गए “पूर्ण बंद” के बाद और तेज हो गया, जिससे पहाड़ी इलाकों में व्यापक असंतोष साफ नजर आ रहा है।

मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि

मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हैं। कूकी-जो संगठनों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जब तक केंद्र सरकार की ओर से केंद्र शासित प्रदेश को लेकर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक वे सरकार की किसी भी प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे।

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ऐसे में पांच विधायकों का सरकार में शामिल होना—जिससे 2025 की शुरुआत में लगे राष्ट्रपति शासन का अंत हुआ—पहाड़ी इलाकों में समुदाय के जनादेश के उल्लंघन के तौर पर देखा जा रहा है।

फिलहाल संभावित हिंसा और आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए कई आदिवासी विधायकों के आवासों के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

 

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