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Live: सुप्रीम कोर्ट में ‘वकील’ बन ममता बनर्जी ने दीं SIR पर दलीलें, कहा- बंगाल को टारगेट, असम को क्यों नहीं

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Live Dainik

February 4, 2026

Live: सुप्रीम कोर्ट में 'वकील' बन ममता बनर्जी ने दीं SIR पर दलीलें, कहा- बंगाल को टारगेट, असम को क्यों नहीं

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल SIR मामले पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के अपने दो साथी जजों से इनपुट मिले हैं, जिन्होंने बताया कि पास सर्टिफिकेट किस तरह जारी किए जाते हैं, और इसी समझ के कारण इस मुद्दे को शामिल किया गया। इस मामले में पेश हुए सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि लॉजिकल गड़बड़ियों की लिस्ट दिखाई जाए। दीवान ने कोर्ट से याचिकाकर्ता के संक्षिप्त नोट पर विचार करने का आग्रह किया, और बताया कि इस काम को पूरा करने के लिए सिर्फ़ चार दिन बचे हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख वोटर अनमैप्ड हैं, 1.36 करोड़ नाम लॉजिकल गड़बड़ी लिस्ट में हैं, और 63 लाख मामलों में सुनवाई अभी भी बाकी है। उन्होंने यह भी बताया कि 8,300 माइक्रो ऑब्ज़र्वर तैनात किए गए हैं, जो संविधान के तहत नहीं आते। दीवान ने आगे कहा कि डोमिसाइल सर्टिफिकेट, आधार और OBC सर्टिफिकेट सहित कई मंज़ूर दस्तावेज़ खारिज किए जा रहे हैं, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।

सुनवाई में शामिल होने खुद ममता बनर्जी पहुंचीं और वकीलों की कतार में सबसे आगे दिखीं। ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि मैं इसी स्टेट से हूं मैं एक्सप्लेन कर सकती हूं। उन्होंने सबसे पहले तीनों जजों का अभिवादन किया और फिर आगे कहा कि हमें इंसाफ नहीं मिल रहा। मैं सामान्य परिवार से हूं, लेकिन अपनी पार्टी के लिए लड़ रही हूं। इस पर सीजेआई ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार भी केस लड़ रही है। सिब्बल-गोपाल जैसे लीगल लोग बहस कर रहे हैं। इस पर ममता ने कहा कि जब वकील शुरू से लड़ रहे हों, रिकॉर्ड पर बार-बार बातें रखी जा रही हों, छह बार ECI को लिखा गया हो और एक जवाब तक न मिले तो महससू होना स्वाभाविक है कि न्याय कहीं पिछले दरवाजे पर अटक गया है. मुझे पांच मिनट दीजिए। इस पर सीजेआई कहते हैं कि हमें कोई दिक्कत नहीं है, हम 15 मिनट देंगे, लेकिन पहले हमारी बात सुनिए।

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सीजेआई ने ममता से कहा कि  हर समस्या का समाधान होता है।  ⁠इस समस्या का भी हल निकालेंगे।आपकी राज्य सरकार भी यहां मौजूद है। आपकी पार्टी भी यहां है। आपके पास देश के सबसे वरिष्ठ वकील मौजूद हैं। हमने आपकी ओर से उठाई गई समस्याओं को स्वीकार किया है- वे रिकॉर्ड पर हैं, ⁠लेकिन हर समस्या का समाधान होता है। इस पर ममता ने बोला कि पहले मुझे बोलने और खत्म करने की इजाजत दीजिए। मैं कुछ तस्वीरें देना चाहती हूं। सारे बंगाली अखबारों ने छापा है। हम चाहते हैं कि समस्या का समाधान निकले। हम अपने दायित्व से पीछे नहीं हटेंगे।  हम इस बात से सहमत हैं कि ममता बनर्जी द्वारा उठाया गया मुद्दा वास्तविक है।  हम यह भी नहीं चाहते कि भाषा संबंधी दिक्कतों या नामों की वर्तनी में अंतर के कारण किसी को मतदाता सूची से बाहर किया जाए। ममता बनर्जी ने कहा कि कुछ बेटियां शादी के बाद ससुराल चली गई हैं,  लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए हैं. चुनाव आयोग आपके आदेशों का उल्लंघन कर रहा है।  कई BLO की मौत हो चुकी है। बंगाल को टारगेट किया जा रहा है, असम को क्यों नहीं।

 

ममता ने आगे कहा कि चुनाव आयोग आपके आदेशों का उल्लंघन कर रहा है। कई BLO की मौत हो चुकी है।इसके बाद CJI ने कहा कि आधार पर अभी नहीं बोलेंगे,  हमारा फैसला सुरक्षित है।CJI ममता को बार- बार MADAM MAMTA कह रहे हैं।इस पर ममता ने कहा कि ये लोग सरकारी और डोमिसाइल सर्टिफिकेट नहीं मान रहे हैं,  चुनाव आयोग वाट्सएप कमीशन है।इस पर चुनाव आयोग ने ममता का विरोध किया। ये आरोप गलत है कि आयोग राज्य सरकार से सहयोग नहीं कर रहा है।सीजेआई ने कहा कि मैडम ममता आपके वकील श्याम दीवान की कैपेबलिटी पर कोई शक नहीं है। आपने बहुत अच्छा वकील चुना है।

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याचिका में ममता बनर्जी की प्रमुख मांगें

  • Election Commission of India द्वारा 24 जून 2025 और 27 अक्टूबर 2025 को जारी SIR अधिसूचनाओं को रद्द किया जाए।
  • वर्ष 2026 में होने वाले 18वें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव मौजूदा 2025 की मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएं।
  • नाम की वर्तनी या मामूली त्रुटियों (Logical Discrepancy) वाले मामलों में सुनवाई न हो और रिकॉर्ड के आधार पर स्वतः सुधार किया जाए।
  • ‘अनमैप्ड’ और Logical Discrepancy मामलों की सूची CEO और DEO वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए।
  • Logical Discrepancy के नाम पर पहले से जारी सभी नोटिस वापस लिए जाएं।
  • किसी भी ऐसे मतदाता का नाम न हटाया जाए जो 2002 की मतदाता सूची से सफलतापूर्वक मैप हो चुका है और दस्तावेज़ जमा कर चुका है।
  • Logical Discrepancy मामलों में आधार कार्ड को पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
  • जिन मतदाताओं के खिलाफ Form-7 प्राप्त हुआ है, उनके नाम ऑनलाइन प्रकाशित किए जाएं और आगे किसी भी तरह की सामूहिक Form-7 सबमिशन रोकी जाए।
  • अंतरराज्यीय दस्तावेज़ों के सत्यापन में 5 दिन से अधिक देरी होने पर स्थानीय स्तर पर मामलों का निपटारा करने की अनुमति दी जाए।
  • पश्चिम बंगाल से सभी माइक्रो-ऑब्ज़र्वर हटाए जाएं, या वैकल्पिक रूप से उन्हें किसी भी वैधानिक अधिकार के प्रयोग से रोका जाए।
  • राज्य सरकार के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी सभी दस्तावेज़ों को सत्यापन के लिए मान्य किया जाए।
  • ECI के 24.06.2025 के आदेश के अनुसार स्थानीय/फील्ड जांच की प्रक्रिया का पालन किया जाए और पोर्टल में आवश्यक बदलाव किए जाएं।
  • Form-7 दाखिल करने वाले सभी शिकायतकर्ताओं को सुनवाई के समय उपस्थित रहने का निर्देश दिया जाए।
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तात्कालिक राहत की मांग

ममता बनर्जी ने अदालत से मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।
देर रात दाखिल अंतरिम आवेदन में उन्होंने बताया कि 60 लाख से अधिक मामलों की सुनवाई अब भी लंबित है, जबकि अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित की जानी है।

यह मामला चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकार और प्रशासनिक हस्तक्षेप से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है, जिस पर देश की सर्वोच्च अदालत की निगाह टिकी हुई है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बुधवार को SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू) केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम नंबर–1 में उपस्थित होंगी। यह मामला न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है।

 

ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में करेंगी बहस

अब तक देश के राजनीतिक इतिहास में यह परंपरा रही है कि मुख्यमंत्री या बड़े राजनीतिक नेता अदालतों में अपने वकीलों के माध्यम से ही पक्ष रखते रहे हैं। लेकिन ममता बनर्जी का स्वयं अदालत में पेश होना इसे एक ऐतिहासिक और असाधारण घटना बनाता है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल मामले की राजनीतिक और संवैधानिक गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि सरकार इस प्रकरण को लेकर कितनी संवेदनशील और गंभीर है।

बंगाल में SIR के खिलाफ बहस

SIR को लेकर ममता बनर्जी लगातार बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमला कर रही है । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात के दौरान भी टीएमसी ने गलत बर्ताव का आरोप लगाया है ।

 

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