नेत्रा ड्रोन नक्सलियों के लिए बना काल, जंगल में भी नहीं मिल रही पनाह, सुरक्षाबल लोकेशन देखकर कर रही है कार्रवाई

नेत्रा ड्रोन नक्सलियों के लिए बना काल, जंगल में भी नहीं मिल रही पनाह, सुरक्षाबल लोकेशन देखकर कर रही है कार्रवाई

डेस्कः नक्सल प्रभावित इलाकों में अब माओवादियों की मुश्किलें और बढ़ गई है। सुरक्षाबलों के लिए तीसरी आंख साबित हो रहा नेत्रा ड्रोन नक्सलियों पर लगातार निगरानी रख रहा है। झारखंड-ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगल में अब हालत ये हो गए है कि नक्सली अब जमीन के साथ-साथ आसमान पर भी नजर रखने को मजबूर हो गए हैं। कहीं ऊपर उड़ता ‘नेत्रा’ उनकी गतिविधियों की जानकारी सुरक्षाबलों तक न पहुँचा दे।

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यह आधुनिक ड्रोन जंगलों के भीतर छिपे माओवादियों की गतिविधियों को ऊपर से कैप्चर कर रियल टाइम में कंट्रोल रूम तक तस्वीरें और वीडियो भेजता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि यह कम ऊंचाई पर बेहद कम आवाज में उड़ान भर सकता है, जिससे दुश्मन को इसकी भनक तक नहीं लगती।पहले आपने आसमान में बाज और चील जैसे पक्षियों को जमीन पर निगरानी करते देखा होगा, लेकिन अब उन्हीं के आकार का एक हाई-टेक यंत्र भी आसमान में उड़ता नजर आता है। यही है ‘नेत्रा’ ड्रोन, जो पुलिस और सुरक्षाबलों के लिए एक प्रभावी निगरानी उपकरण बन चुका है।

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दिन हो या रात — नेत्रा हर समय काम करने में सक्षम है। जिस इलाके में इसे तैनात किया जाता है, वहां की हर गतिविधि की तस्वीरें सीधे कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखाई देती हैं। इससे सुरक्षाबलों को ऑपरेशन की सटीक योजना बनाने में मदद मिलती है।

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नेत्रा ड्रोन की प्रमुख खासियतें
जंगल में छिपे नक्सलियों की सटीक लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी देता है
सीधी (वर्टिकल) उड़ान भरने और जमीन पर उतरने में सक्षम
दिन और रात दोनों समय साफ़ तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करता है
आसमान में देखने पर पक्षी जैसा दिखाई देता है, जिससे पहचान मुश्किल
बेहद कम ध्वनि, पास से गुजरने पर भी पता लगाना कठिन
वजन लगभग डेढ़ किलो
अत्याधुनिक कैमरों और सेंसर से लैस
तकनीक के इस बढ़ते इस्तेमाल ने जंगलों में छिपकर काम करने वाले नक्सलियों के लिए हालात पहले से ज्यादा कठिन कर दिए हैं। अब उन्हें सिर्फ सुरक्षाबलों से ही नहीं, बल्कि आसमान से भी खतरा है।

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