रांचीः झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने विदेश जाने से पहले मिशन असम की शुरूआत कर दी है। असम में जेएमएम विधानसभा का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। जेएमएम के असम में दस्तक देने से पहले ही हेमंत सोरेन की पुरानी मांग को असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्व सरमा ने कैबिनेट से पास करा लिया जिसमें असम के चाय बगानों में काम करने वाले झारखंड के आदिवासियों के हित की बात की गई थी, उन्हें असम में आदिवासी का दर्जा देने की मांग थी। हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान भी उठाया था लेकिन असम के मुख्यमंत्री जो उस समय झारखंड बीजेपी के चुनाव सह प्रभारी ने हेमंत सोरेन की मांग को मान ली।
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लेकिन हेमंत सोरेन असम में आदिवासियों की वर्तमान दशा को लेकर बहुत चिंतिंत है इसलिए उन्होंने असम के आदिवासियों के उत्थान का संकल्प लिया है। मुख्यमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष हेमंत सोरेन के इसी मंशा को पूरा करने के मकसद से जेएमएम के केंद्रीय समिति असम राज्य में आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति के अध्ययन के लिए एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति असम में आदिवासी समाज की वर्तमान परिस्थितियों का प्रत्यक्ष आकलन करेगी और उनके हितों की रक्षा से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत अध्ययन करेगी।
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पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर गठित इस समिति में सांसद विजय हांसदा, झारखंड सरकार के मंत्री चमरा लिंडा, गुमला विधायक भूषण तिर्की और राजमहल विधायक मो. ताजुद्दीन उर्फ राजा को शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिया गया है कि वह आगामी दस दिनों के भीतर असम का दौरा कर वहां के आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का भौतिक अध्ययन करे। इसके बाद समिति अपनी विस्तृत लिखित रिपोर्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेगी।




