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मुंबई पुलिस कमिश्नर बताकर कोडरमा के परिवार को 5 घंटे रखा डिजिटल अरेस्ट, दिल्ली-ब्लास्ट और हवाला के नाम पर डराया

मुंबई पुलिस कमिश्नर बताकर कोडरमा के परिवार को 5 घंटे रखा डिजिटल अरेस्ट, दिल्ली-ब्लास्ट और हवाला के नाम पर डराया

डेस्कः खुद को मुंबई पुलिस कमिश्नर बताकर साइबर ठगों ने एक परिवार को करीब 5 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रखा। हवाला के जरिए लेनेदेन की बात कहने के साथ दिल्ली ब्लास्ट में अरेस्ट ऑडर दिखाया और एक लाख रुपए की ठगी करने की कोशिश की। लेकिन बेटे की सूझ-बूझ से वे ठगने से बच गए। कोडरमा के कालीमुंडा के रहने वाले बसंत मेहता ने इस संबंध में थाना और साइबर सेल में ऑनलाइन आवेदन दिया है।

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मसनोडीह थाने में दिए गए आवेदन के अनुसार, 29 नवंबर की सुबह करीब 10:30 बजे उनके पास मोबाइल नंबर 9278393380 से काल आया। काल करने वाले शख्स ने स्वयं को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके मोबाइल फोन नंबर की जांच चल रही है।उसने दावा किया कि बसंत मेहता के नाम पर एक और सिम 7738941379 जारी हुआ है, जिसका उपयोग देश में हुए बम ब्लास्ट में किया गया है। करीब 11 बजे मोबाइल नंबर 8289921414 से वीडियो काल आया, जिसमें पुलिस अधिकारी की वर्दी पहने एक व्यक्ति दिखाई दिया।

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दो-तीन बार वीडियो काल के दौरान उसने बसंत मेहता और उनकी पत्नी संजू बाला का आधार नंबर ले लिया और उन्हें दोपहर 3:32 बजे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर लगातार डराता-धमकाता रहा। पीड़ित ने बताया कि उनके बेटे न सूझबूझ दिखाते हुए काल को डिस्कनेक्ट कर दिया।इसके बाद कई अन्य नंबरों से लगातार फोन आते रहे, जिन्हें बाद में ब्लाक कर दिया गया। इसी बीच आरोपितों ने वाट्सएप पर कई दस्तावेज भेजे, जिनमें बसंत मेहता का नाम और आधार नंबर जोड़कर उन्हें विभिन्न आपराधिक मामलों में शामिल दिखाया गया था।

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इससे परिवार भयभीत हो गया है। बसंत मेहता ने आशंका व्यक्त की कि ठग उनके व उनकी पत्नी के आधार कार्ड का उपयोग किसी अवैध गतिविधि या ठगी में कर सकते हैं। उन्होंने पुलिस से मामले की त्वरित जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। पुलिस आवेदन पर जांच में जुट गई है।

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पुलिस कभी नहीं करती डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट की धमकी देने वाला ठग सरकारी अधिकारी या पुलिस बनकर काल करते हैं और व्यक्तिगत जानकारी लेकर भय पैदा करने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे पहले शांत रहें और किसी भी अनजान कालर को आधार, ओटीपी, बैंक विवरण या निजी जानकारी बिल्कुल न दें।वीडियो काल पर किसी की वर्दी देखकर विश्वास न करें, क्योंकि यह नकली हो सकती है। काल को तुरंत डिस्कनेक्ट करें और नंबर ब्लाक कर दें। किसी मामले की जांच या गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना कभी फोन पर नहीं दी जाती। ऐसी घटना होने पर तुरंत नजदीकी थाना या साइबर क्राइम पोर्टल में शिकायत दर्ज कराएं।

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