अल फलाह के मालिक ने धोखा देकर 400 करोड़ से ज्यादा की कमाई की, गल्फ भागने का खतरा: ED

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Live Dainik

November 20, 2025

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दिल्ली की एक अदालत ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के प्रमुख और संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया कि जवाद ने छात्रों और उनके अभिभावकों को धोखा देकर 415 करोड़ रुपये की कमाई की और उनके खाड़ी के देशों में भाग जाने का खतरा है जहां उनके पारिवारिक रिश्ते हैं।

अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद अहमद के वकील ने दावा किया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत हैं। सिद्दीकी को मंगलवार देर रात गिरफ्तार करने से पहले दिनभर अल फलाह समूह के कई ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की। यूनिवर्सिटी 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए आत्मघाती हमले के बाद जांच के दायरे में आ गई। जिस आतंकी मॉड्यूल ने इस हमले को अंजाम दिया उसके कई सदस्य अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे।

जवाद को एडिशनल सेशंस जज शीतल चौधरी प्रधान के सामने प्रस्तुत किया गया। ईडी ने 14 दिनों की रिमांड मांगी थी। अदालत ने 1 दिसंबर तक के लिए जवाद को ईडी की हिरासत में भेज दिया। रिमांड आवेदन में ईडी ने अदालत को बताया कि सिद्दीकी के पास बहुत आर्थिक संसाधन और प्रभाव हैं। उनका परिवार गल्फ में मौजूद है और उनके भी भाग जाने की संभावना है।

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एजेंसी ने कहा कि सिद्दीकी और उनके निर्देशन में काम करने वाले अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने छात्रों और अभिभावकों को NAAC मान्यता और UGC की पहचान के बारे में झूठे दावे कर गुमराह करके ₹415.10 करोड़ की राशि जुटाई। अदालत ने कहा कि आरोपी का गंभीर आर्थिक अपराधों का इतिहास रहा है। आशंका है कि यदि उसे गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह फरार हो सकता है, संपत्तियों को इधर-उधर कर सकता है या जांच में बाधा डाल सकता है।

ईडी ने दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की दो एफआईआर का संज्ञान लिया है। इनमें अल फलाह यूनिवर्सिटी पर मान्यता की स्थिति को फर्जी तरीके से दिखाकर छात्रों को दाखिले के लिए आकर्षित करने का आरोप लगाया गया है। ईडी की ओर से पेश हुए वकीलों ने बताया कि विश्वविद्यालय ने NAAC और UGC के प्रमाण-पत्रों को जालसाजी से तैयार किया, जिससे वह छात्रों का दाखिला जारी रख सके।

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एजेंसी ने दावा किया कि ट्रस्ट ने धोखाधड़ीपूर्ण तरीकों से फीस और शिक्षा संबंधी प्राप्तियों के रूप में 400 करोड़ से अधिक राशि जुटाई और इन धनराशियों को सिद्दीकी के व्यक्तिगत और निजी हितों के लिए मोड़ दिया।

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