हजारीबागः सदर प्रखंड के मौजा बभनवै की सरकारी भूमि घोटाला मामले में गिरफ्तार तत्कालीन सीओ अलका कुमारी को एसीबी ने मंगलवार को निगरानी के विशेष न्यायालय आशा रानी भट्ट की अदालत में पेश किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया कि अलका को सरकारी गवाह बनाया जाये। न्यायालय ने इस आग्रह को स्वीकर कर लिया।
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विशेष न्यायालय के निर्देश पर, न्यायिक दंडाधिकारी हेमंत कुमार सिंह की अदालत ने धारा-183 के तहत अलका कुमार का बयान कलमबद्ध किया गया। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद एसीबी की टीम उन्हें वापस अपने साथ ले गयी। मामला निगरानी थाना कांड संख्या 11/ 25 के तहत निगरानी थाना में पदस्थापित पदाधिकारी सुमित सौरभ लाकड़ा के बयान पर दर्ज किया गया था। इसमें तत्कालीन अंचलाधिकारी अलका कुमारी, शैलेंद्र कुमार, अंचल निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद सिंह, राजस्व कर्मचारी रामप्रकाश चौधरी और संतोष कुमार वर्मा समेत 68 अन्य को आरोपी बनाया गया है।
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यह मामला हजारीबाग सदर प्रखंड के मौजा बभनवै में 31.76 एकड़ सरकारी, वन, गोचर, गैरमजरूआ आम और खास जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और जमाबंदी में हेराफेरी से जुड़ा है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया। एसीबी सूत्रों के अनुसार, अलका का सरकारी गवाह बनना इस पूरे घोटाले की जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। हजारीबाग एसीबी की टीम ने चतरा में बड़ी कार्रवाई करते हुए चतरा की डीआरडीए निदेशक अलका कुमारी को गिरफ्तार किया था।164 के तहत बयान दर्ज होने के बाद अलका तिवारी एसीबी की हिरासत से बाहर निकल गई।




