लोहरदगा : आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ की शुरुआत की गई। इसी कड़ी में लोहरदगा नगर भवन में तीन दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन शनिवार को किया गया। जिसका शुभारंभ उपायुक्त डा. कुमार ताराचंद, डीडीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत सहित अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मौके पर उपायुक्त डा. ताराचंद ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता गांव के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। तभी सही मायने में जनजातीय विकास का लक्ष्य पूरा हो सकेगा। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाकर कार्य करने से ही समाज के वंचित तबकों को लाभ मिलेगा। आदिवासी समाज को सहायता पाने वाला वर्ग नहीं, बल्कि स्वावलंबी और सशक्त समुदाय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। जिसे लेकर लोहरदगा में तीन दिवसीय आदि कर्मयोगी अभियान कार्यशाला की शुरुआत हुई। उपायुक्त डा. ताराचंद ने कहा कि सतत् विकास के सूचकांक में जो अंतिम पायदान का व्यक्ति है उसे मुख्यधारा में जोड़ने की आवश्यकता है। इसके लिए सभी सूचकांकों पर कार्य करने की जरूरत है। पदाधिकारी अपने कार्यशैली में सुधार लाएं और आमजनों से बेहतर व्यवहार करें। आज देश की आजादी के इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी अनुसूचित जनजाति वर्ग पीछे छूट गए हैं। हमें इस विषमता को ठीक करना है। आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति वर्ग में जो वंचित परिवार व व्यक्ति है, उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाना है। सरकार द्वारा जो निर्धारित बिंदु हैं उन सूचकांकों पर जिला की स्थिति बेहतर करना है। डीसी ने कहा कि सभी वॉलेंटियर को विभागीय अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर कार्य करना होगा, ताकि योजनाओं का असर धरातल पर दिखाई दे। सरकार की मंशा है कि समाज का अंतिम व्यक्ति भी मुख्यधारा से जुड़े और सम्मानजनक जीवन जी सके। उप विकास आयुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कई योजनाएं चलाती हैं। समय-समय पर अभियान के रूप में भी इसे चलाया जाता है। आदि कर्म योगी अभियान का उद्देश्य ऐसी मानव श्रृंखला तैयार करना है जिससे आने वाले समय में आदिवासी समुदाय को नियमित समय-समय पर जागरूक किया जा सके। साथ ही इस जिले को हमलोग विकास की ओर आगे ले जा सके। इस जिले को हम सभी को मिलकर सशक्त बनाना है। कार्यक्रम में आए भारत सरकार की ओर से जनजातीय कार्य मंत्रालय के हिंदी प्रभाग से आए सौरभ कुमार वर्मा ने भी अपने विचार रखे। जिला कल्याण पदाधिकारी सरस्वती ने भी अभियान संबंधी जानकारी दी। कार्यक्रम में डीसी-डीडीसी ने सभी लोगों को अभियान से संबंधित शपथ दिलाई। कार्यक्रम में उपायुक्त डा. कुमार ताराचंद, डीडीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, सिविल सर्जन डा. राजू कच्छप, आइटीडीए परियोजना निदेशक सुषमा नीलम सोरेंग, जिला पंचायत राज पदाधिकारी अंजना दास, जिला शिक्षा पदाधिकारी दास सुनंदा चंद्रमौलेश्वर, सभी मास्टर लेवल ट्रेनर्स समेत अन्य उपस्थित थे।
आत्मविश्वास और स्वावलंबन की ओर बढ़ेगा कदम
इस अवसर पर डीसी ने कहा कि आदिवासी समाज को केवल सहायता प्राप्त करने वाला वर्ग नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और परिवर्तन लाने वाला समुदाय बनाने की दिशा में यह अभियान मील का पत्थर साबित होगा। इसके जरिए सामाजिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक स्तर पर व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल व्यक्तिगत स्तर पर विकास को गति देगा, बल्कि संस्थागत ढांचा भी मजबूत होगा। आत्मविश्वास, स्वावलंबन और सामाजिक परिवर्तन की नई ऊर्जा इस अभियान से जनजातीय समाज में पनपेगी।
45 वॉलेंटियर करेंगे पंचायत स्तर पर काम
लोहरदगा जिले के सभी 66 पंचायतों में जनजातीय समुदाय तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 45 प्रशिक्षित वॉलेंटियर तैयार किए जा रहे हैं। ये वॉलेंटियर न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे बल्कि ग्रामीणों को इनसे जुड़ने और लाभ लेने में भी सहयोग करेंगे। अभियान का मकसद आदिवासी समाज को जागरूक कर आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। ये सभी वॉलेंटियर पंचायतों में जाकर योजनाओं की जानकारी देंगे और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करेंगे।
बड़े आंदोलन का रूप लेगा अभियान
जनजातीय कार्य मंत्रालय की इस पहल को लेकर जिले में उत्साह देखने को मिला। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्यक्रम एक बड़े आंदोलन का रूप लेगा। अब तक आदिवासी समुदाय को योजनाओं तक सीमित पहुंच ही मिलती थी, लेकिन अब जागरूकता और प्रशिक्षण से बदलाव की लहर गांव-गांव पहुंचेगी।
सिंगल विंडो सिस्टम डेवलप करें
उपायुक्त ने कहा कि प्रखंड स्तर पर एक सिंगल विंडो सिस्टम की शुरूआत करें। जिसमें लोग आकर अपनी समस्याओं को रख सकें। बीते विभिन्न तरह के अभियानों में सूचकांकों के सुधार का अवसर मिला था, लेकिन उसमें अपेक्षा अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके। सामाजिक स्तर पर हम विभिन्न वर्गों में बंटे हुए हैं, इसे दूर करना है। सभी वंचित को एक मंच पर लाना है। जिसे समेकित विकास का लक्ष्य पूरा हो सके। सभी पदाधिकारी अपने स्तर से सूचकांकों पर कार्य करें और अभियान के उद्देश्य को पूरा करें। अनुसूचित जनजाति वर्ग के अंतिम व्यक्ति को भी अच्छे स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, आधारभूत संरचना जैसी चीजों का अधिकार है








