रामदास सोरेन पंचतत्व में विलिन, जमशेदपुर के घोड़ाबांधा में हुआ राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

रांची:  झारखंड सरकार में शिक्षा मंत्री एवं घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन पंचतत्व में विलिन हो गए।  शनिवार को जमशेदपुर के घोड़ाबांधा स्थित उनके पैतृक आवास पर हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। शाम साढ़े पाँच बजे पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां उनके बड़े पुत्र सोमेश सोरेन ने उन्हें मुखाग्नि दी।

पार्थिव शरीर पहुंचते ही निकले पड़े आंसू

सुबह रांची के बिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर उनका पार्थिव शरीर लाया गया, जिसके बाद विधानसभा परिसर और घाटशिला में अंतिम दर्शन हेतु रखा गया। विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो समेत कई नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। जैसे ही पार्थिव शरीर घोड़ाबांधा आवास पहुंचा, परिवार और समर्थकों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

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बीमारी से जूझते रहे रामदास सोरेन

बाथमरु में फिसलने की वजह से रामदास सोरेन को सिर में गंभीर चो लग गई थी । 14 दिनों से उनकी तबीयत गंभीर थी। पहले उन्हें टाटा मोटर्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उन्हें ब्रेन स्ट्रोक आया। हालत बिगड़ने पर उन्हें एयरलिफ्ट कर दिल्ली के अपोलो अस्पताल ले जाया गया। लंबे समय तक जीवन रक्षक प्रणाली पर रहने के बावजूद डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके।

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श्रद्धांजलि देने उमड़े नेता और कार्यकर्ता

अंतिम संस्कार में राज्य के तमाम बड़े नेता और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, अर्जुन मुंडा, मंत्री दीपक बिरुवा, मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विद्युत वरण महतो, विधायक सविता महतो, मंगल कालिंदी, सुखराम उरांव, कांग्रेस नेता बंधु तिर्की, राजू गिरी, मोहन कर्मकार समेत बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ता और आमजन मौजूद रहे।

अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

विधानसभा परिसर में श्रद्धांजलि देने के बाद उनका पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से मऊभंडार मैदान लाया गया। यहां हजारों लोग मौजूद रहे और अंतिम यात्रा में शामिल हुए। पूरे रास्ते “रामदास सोरेन अमर रहें” के नारों से माहौल गूंज उठा। रामदास सोरेन अपने सरल स्वभाव, शिक्षा सुधार और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उनके निधन से झारखंड की राजनीति और शिक्षा जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।

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