रांची के न्यू एजी को-ऑपरेटिव कॉलोनी में घोटाला, एक ही परिवार के 3 लोगों को आवंटित हुए प्लॉट,शुरू हुई CID जांच

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July 30, 2025

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रांचीः राजधानी रांची के न्यू एजी को-ऑपरेटिव कॉलोनी में जमीन आवंटन में घोटाला किये जाने का आरोप है। इसकी सीआईडी ने जांच शुरू कर दी है। इस मामले में सीआईडी ने प्राथमिकी के आरोपी पक्ष को नोटिस भेजकर जवाब हासिल किया है। अब सीआईडी केस की जांच में आये तथ्यों का विश्लेषण कर रही है। सीआईडी ने मामले को लेकर नवंबर 2024 में केस दर्ज किया था। केस सेवानिवृत्त सरकारी कर्मी प्रभात कुमार सिन्हा की शिकायत पर दर्ज हुआ था।

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जमीन घोटाले की जांच सीआईडी ने शुरू कर दी है जिसमें एएसपी दीपक कुमार को जांच अधिकारी बनाया गया है। केस में सीआईडी ने न्यू एजी कॉलोनी को-ऑपरेटिव सोसायटी के अध्यक्ष कपिल देव गिरी, उनके बेटे आशुतोष गिरी, पत्नी कलावती बिहारी गिरी, एएन संडवार समेत अन्य कार्यकारिणी सदस्यों को आरोपी बनाया है। आरोप है कि रांची में सोसाइटी के संचालनकर्ताओं के द्वारा कागजों की कूटरचना कर पूर्व आवंटियों की भूमि को अवैध तरीके से अधिग्रहित कर उनकी बिक्री कर दी गई।

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CID में दर्ज FIR में बताया गया है कि बायलॉज की कंडिका 45(2) के अनुसार एक परिवार के एक सदस्य को प्लॉट आवंटित करने का प्रावधान है, जबकि कपिलदेव गिरी के नाम से प्लॉट नंबर 182, उनकी पत्नी कलावती बिहारी गिरी के नाम से प्लाट नंबर 80 आवंटित है। आरोप है कि इनके पुत्र आशुतोष गिरी के नाम पर प्लाट नंबर 191 ए आवंटित है। एफआईआर में आरोप है कि कपिलदेव गिरी के निर्देश पर एक व्यक्ति को चार प्लाट संयुक्त रूप से हस्तांतरित किए गए हैं।

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एजी को-ऑपरेटिव सोसाइटी के किन मामलों में शिकायत
● स्व शशिभूषण मिश्रा को आवंटित प्लॉट संख्या 192 को पूर्व भुगतान के बाद भी आवंटित नहीं किया गया। आरोप है कि उक्त प्लॉट को अवैध रूप से कागजातों की कूटरचना कर आवंटित नियमों का उल्लंघन करते हुए सरदार प्रदीप सिंह को आवंटित कर दिया गया।
● सेवानिवृत ऑडिट अफसर कमलकांत चौधरी को पूर्व में प्लाट संख्या 208 ए आवंटित किया गया था, लेकिन जमीन का कभी हस्तांतरण नहीं हुआ, आरोप है कि दस्तावेजों में हेरफेर कर इसका आवंटन जयकृष्ण सिंह को कर दिया गया।
● स्व परमानंद झा को प्लाट संख्या 193 आवंटित था। आरोप है कि जमीन की ग्रीनलैंड भूमि को कब्जाते हुए घेरा गया। इसके बाद इससे सटे अन्य तीन प्लॉट को हड़पकर बहुमंजिला इमारत बनाने के उदेश्य से आवंटित व्यक्ति को भूमि नहीं दी गई।

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