रांचीः गुरूवार को बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर कॉर्डिनेशन कमेटी की बैठक हुई। इस बैठक में 6 सहयोगी दल शामिल हुए लेकिन झारखंड की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी जेएमएम को नहीं बुलाया गया। तेजस्वी यादव के आवास पर हुई बैठक में नहीं बुलाये जाने को लेकर जेएमएम ने गहरी नाराजगी जताई है।
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पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडे ने कहा कि हमारी पार्टी इंडिया गठबंधन की पार्टनर है। पार्टी की अनदेखी करना ठीक नहीं होगा। अगर अनदेखी हुई तो झारखंड मुक्ति मोर्चा नई रणनीति अपनाएगी। इसका खुलासा जल्द ही किया जाएगा। उन्होने आगे कहा कि जेएमएम ने अपने राष्ट्रीय महाधिवेशन में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया था। इसी हिसाब से तैयारी चल रही है। बिहार में पार्टी संगठन को मजबूत करने का काम चल रहा है। हमारी रणनीति क्या होगी, कितने सीटों पर पार्टी चुनाव लड़ेगी, इस पर मंथन हो रहा है। हालांकि यह पहली बैठक है, अभी कई दौर की बैठक होगी। पर इतना तय है कि जेएमएम अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और वो बिहार में विधानसभा का चुनाव लड़ेगी।
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झारखंड मुक्ति मोर्चा की बिहार के 16 सीटों पर नजर है जो कि झारखंड से सटे हुए है। जेएमएम कटोरिया, चकाई, ठाकुरगंज, कोचाधामन, रानीगंज, बनमनखी, धमदाहा, रूपौली, प्राणपुर, छातापुर, सोनवर्षा, झाझा, रामनगर, जमालपुर, तारापुर और मनिहारी सहित 16 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। अगर बिहार में जेएमएम को दरकिनार किया तो पार्टी करीब एक दर्जन सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। 2010 के विधानसभा चुनाव में सुमित सिंह जेएमएम के टिकट पर चकाई से जीते थे जो अभी वर्तमान में नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री है और 2020 में निर्दलीय चुनाव जीतकर आये थे।
जेएमएम अभी झारखंड की सबसे बड़ी राजनीतिक दल है, राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जिस तरह की बंपर जीत पार्टी और गठबंधन को मिली उससे जेएमएम बहुत उत्साहित है। वो राज्य से बाहर अपने संगठन को मजबूत करने और राष्ट्रीय पार्टी बनाने के मिशन पर आगे बढ़ रही है। बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा जैसे झारखंड से सटे राज्यों में वो विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और फिर उनकी रिहाई के बाद से आदिवासी चेहरे के रूप में जिस तरह से हेमंत सोरेन का राजनीतिक कद बढ़ा है उसे पार्टी अपने लिए एक अवसर मानकर झारखंड के बाहर जेएमएम को मजबूत करने का मौका मानकर चल रही है। महिला नेत्री के रूप में कल्पना सोरेन की राष्ट्रीय स्तर पर जो छवि बनी और लोकसभा-विधानसभा चुनाव के दौरान जिसतरह से स्टार प्रचारक के रूप में वो सामने आई उसका फायदा जेएमएम बिहार में लेना चाहती है। हेमंत और कल्पना की जोड़ी बिहार विधानसभा चुनाव में महिला और आदिवासी वोटरों के बीच मजबूत प्रभाव छोड़ सकती है जेएमएम इन संभावनाओं को देखते हुए बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ना चाहती है। अगर जेएमएम इंडिया गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेगी तो स्टार प्रचारक के रूप में हेमंत-कल्पना की जोड़ी का गठबंधन को बिहार में फायदा हो सकता है।
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इंडिया गठबंधन की गुरूवार को जो बैठक हुई उसमें तय किया गया कि एनडीए के नैरेटिव का जवाब देना है। गठबंधन की बैठक में ये भी तय किया गया कि 15 हजार से ज्यादा जिस सीट पर 2020 में उम्मीदवार की हार हुई थी वहां उम्मीदवार और सिंबल दोनों बदला जाएगा। हर एक सीट की स्क्रीनिंग होगी जिसमें तय किया जाएगा कि कौन उम्मीदवार वहां एनडीए को टक्कर दे सकता है, उसे ही टिकट दिया जाएगा। मुख्यमंत्री के चेहरे पर लगभग सहमति बन गई है। बैठक में तेजस्वी यादव को सीएम फेस कह कर संबोधित किया गया। 5 जुलाई को आरजेडी के अध्यक्ष का निर्वाचन और राष्ट्रीय अधिवेशन होना है इसके बाद सीट बंटवारे की प्रक्रिया तेज होगी। बैठक में तय हुआ कि सभी छह दल मिलकर प्रचार करेंगे, चौक-चौराहों से लेकर हर गा गोष्ठियों में एनडीए के झूठे प्रचार का जवाब देंगे। पंचायत स्तर पर गठबंधन का साझा कार्यक्रम बनेगा और हर उम्मीदवार के लिए एकजुट होकर प्रचार किया जाएगा।




