39 टुकड़ों में मिली थी भगवान विष्णु की 5 मीटर की एक हजार वर्ष पुरानी कांस्य प्रतिमा, देखना हैं तो जाना पड़ेगा इस शहर में…

Picture of Live Dainik

Live Dainik

April 30, 2025

Musée Guimet vishnu

पेरिस: भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की सबसे बड़ी और कांसे की सबसे पुरानी मूर्ति पहली बार फ्रांस की राजधानी पेरिस में दुनिया देख सकेगी । 39 टुकड़ों में मिली भगवान विष्णु की ये प्रतिमा भारत में नहीं बल्कि कंबोडिया में मिली थी जिसका लगभग 90 वर्षों के बाद रिस्टोरेशन कर प्रदर्शित किया जा रहा है । 

5 मीटर की है विष्णु की मूर्ति

पांच मीटर लंबी लेटे हुए विष्णु की ये प्रतिमा एक हजार वर्ष से पुरानी है । इतनी बड़ी और पुरानी मूर्ति का मिलना फिर उसे 39 टुकड़ों को जोड़ कर फिर से तैयार करना अपने आप में असंभव जैसा काम था लेकिन दुनिया के नामी-गिरामी शोधकर्ताओं और पुरातत्तवेत्ताओं ने इसे मुमकिन कर दिया है ।

Musée Guimet vishnu

विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में एक

पांच मीटर लंबी आंशिक रूप से पुनः संग्रहित भगवान विष्णु की प्रतिमा अब फ्रांस के पेरिस स्थित Guimet National Museum (गुईमेत राष्ट्रीय संग्रहालय) में प्रदर्शित की जा रही है । यह प्रतिमा विश्व की सबसे बड़ी खोजी गई खमेर कांस्य प्रतिमाओं में से एक है, जिसकी मरम्मत और पुनः संयोजन का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

See also  घाटशिला उपचुनाव से पहले BJP को झटका, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने जिलापरिषद उपाध्यक्ष समेत कई नेता JMM में हुए शामिल

Musée Guimet vishnu

1936 में मिली थी विष्णु की प्रतिमा

11वीं शताब्दी की यह ऐतिहासिक प्रतिमा 30 अप्रैल से लेकर सितंबर के अंत तक पेरिस में प्रदर्शनी के लिए उपलब्ध रहेगी। यह प्रतिमा कंबोडिया के सिएम रीप प्रांत में स्थित बेराय टेउक थला जलाशय के मध्य स्थित वेस्टर्न मेबोन मंदिर से प्राप्त हुई थी। इसकी खोज वर्ष 1936 में फ्रांसीसी शोधकर्ताओं द्वारा की गई थी और इसके बाद इसे कंबोडिया की राजधानी फ्नॉम पेन के राष्ट्रीय संग्रहालय में संरक्षित किया गया।

Musee Guimet

कई टुकड़ों को जोड़ गया

पिछले वर्ष मई में इस विशाल विष्णु प्रतिमा के 39 अलग-अलग खंडों को फ्रांस भेजा गया था, जहां उनका सावधानीपूर्वक पुनर्निर्माण और सफाई की गई।  कंबोडिया के संस्कृति और ललित कला मंत्रालय के संग्रहालय विभाग के संरक्षण कार्यालय के उपप्रमुख वोन नोएन ने नॉम पेन्ह पोस्ट को इसकी जानकारी दी कि इन सभी खंडों को नांतेस शहर में यथासंभव पुनः संरचित किया गया और अब यह प्रतिमा पेरिस में प्रदर्शनी के लिए पहुंच चुकी है ।

See also  ईडी के अफसरों को फंसाने की हो रही है साजिश, बीजेपी बोली- मामले की सीबीआई जांच हो

vishunu

अभी भी कई टुकडे नहीं जुट पाए

भगवान विष्णु की प्रतिमा के प्रत्येक खंड को साफ करके गंदगी और अन्य अवशेषों को हटाया गया। जो खंड आपस में मेल खाते थे, उन्हें जोड़ा गया। जो भाग मुख्य मूर्ति से जुड़ते थे, उन्हें उसमें स्थापित किया गया। हालांकि, सभी 39 टुकड़े एक साथ नहीं जुड़ पाए, इसलिए शेष टुकड़ों को अलग से संरक्षित किया गया है।”

Musée Guimet vishnu

कंबोडिया की ऐतिहासिक धरोहर

पिछले वर्ष पेरिस स्थित Centre for Research and Restoration of French Museums (C2RMF) में विश्लेषण और नांतेस के Arc’Antique प्रयोगशाला में पुनःस्थापन के बाद, यह प्रतिमा दोबारा खोजी गई – विशेषकर उसके पैरों और धड़ के हिस्से के रूप में। यह पुनःसंरचना उन खंडों के माध्यम से संभव हुई जो वर्षों से उसके मूल स्थल से एकत्रित किए गए थे, लेकिन अब तक संग्रह में ही रखे हुए थे।

लक्ष्मी की मूर्ति नहीं मिली

हालांकि, यह वर्तमान स्वरूप मूल प्रतिमा से बहुत भिन्न है। मूल में भगवान विष्णु एक विशाल नाग (शेषनाग) पर लेटे हुए थे, जिसके कई सिर उनके सिर के ऊपर फैले हुए थे। उनके चरणों में, संभवतः लक्ष्मी देवी – सौंदर्य और समृद्धि की देवी – उनके चरण दबा रही थीं।

See also  हेमंत सोरेन का मास्टर स्ट्रोक है अबुआ बीर दिशोम अभियान ?

प्रतिमा का संदेश

विशेषज्ञ पियरे बैप्टिस्ट बताते हैं, “इस प्रतिमा की नाभि से एक कमल का फूल निकलता है, जो आकाश की ओर उगता है और जिस पर ब्रह्मा जी विराजमान होते हैं – हिन्दू धर्म के सृष्टिकर्ता, जिनके चार मुख होते हैं और जो नवीन सृष्टि की रचना करते हैं।”

वे आगे कहते हैं, “असल में, यही इस प्रतिमा का गूढ़ संदेश है – यह विश्व सृजन का प्रतीक है।”

पेरिस के बाद यह प्रतिमा अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शित की जाएगी, जहां यह 2027 तक खमेर संस्कृति की समृद्ध विरासत को विश्व के सामने प्रस्तुत करती रहेगी।


WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now