भारत के वैज्ञानिक ने निक्कू मधुसूदन ने खोज लिया ब्रह्मांड में धरती से भी बड़ा ग्रह, जीवन के मिले संकेत….जानिए हमें वहां पहुंचने में कितना वक्त लगेगा

nikku madhusudan

डेस्क: वैज्ञानिकों ने एक दूर स्थित विशाल ग्रह K2-18 b पर बाह्य अंतरिक्ष में जीवन के संकेत मिलने का दावा किया है। यह ग्रह पृथ्वी से लगभग 124 प्रकाश वर्ष दूर है और James Webb Space Telescope (JWST) की मदद से की गई इस खोज को अब तक का सबसे मजबूत प्रमाण माना जा रहा है कि सौरमंडल के बाहर भी जीवन मौजूद हो सकता है।

K2-18 b ग्रह: क्या यहां जीवन संभव है?

K2-18 b ग्रह, जो सिंह (Leo) नक्षत्र में स्थित है, पृथ्वी से करीब 9 गुना भारी और 2.6 गुना बड़ा है। यह अपने तारे के उस क्षेत्र में स्थित है जिसे “हैबिटेबल ज़ोन” कहा जाता है—जहाँ जीवन के लिए जरूरी तरल पानी मौजूद हो सकता है।

हमें वहां पहुंचने में कितना वक्त लगेगा ?

 

🚘 यात्रा माध्यमगति🕒 यात्रा में लगने वाला समय
🚗 ऑटो / कार60 मील प्रति घंटालगभग 1 अरब वर्ष
🚄 बुलेट ट्रेन200 मील प्रति घंटालगभग 300 मिलियन वर्ष
✈️ जेट विमान600 मील प्रति घंटालगभग 100 मिलियन वर्ष
🛰️ वॉयेजर स्पेसक्राफ्ट38,000 मील प्रति घंटालगभग 3 लाख वर्ष
🌠 प्रकाश की गति670,616,629 मील प्रति घंटा124 वर्ष ⏳ (यही सबसे तेज़ है!)
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जीवन के रासायनिक संकेत मिले

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर निक्कू मधुसूदन के नेतृत्व में की गई इस स्टडी में, वैज्ञानिकों को K2-18 b की वायुमंडलीय परत में दो खास रसायनों के प्रमाण मिले: डायमेथाइल सल्फाइड (DMS) और डायमेथाइल डिसल्फाइड (DMDS)। ये दोनों तत्व पृथ्वी पर केवल जीवित समुद्री प्लवक (फाइटोप्लैंकटन) द्वारा बनाए जाते हैं।

“यह अब तक का सबसे मजबूत संकेत है कि सौरमंडल के बाहर भी जैविक गतिविधि हो सकती है,” प्रो. मधुसूदन ने कहा। “हमें सावधानी बरतनी होगी, लेकिन यह पल वह हो सकता है जब हमने पहली बार जीवन के ब्रह्मांडीय संकेत देखे।”

super earth nikku madhusudan
सुपर अर्थ- तस्वीर साभार-नासा

क्या यह एलियन जीवन का प्रमाण है?

हालांकि इन रासायनिक यौगिकों की उपस्थिति अपने आप में जीवन का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह एलियन बायोसिग्नेचर की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। JWST ने जब K2-18 b को उसके तारे के सामने से गुजरते हुए देखा, तो DMS और DMDS के अवशोषण के संकेत साफ तौर पर दर्ज हुए।

इन अणुओं की मात्रा पृथ्वी की तुलना में हजारों गुना अधिक पाई गई है, और शोधकर्ताओं ने इसे “तीन-सिग्मा” सांख्यिकीय महत्व के साथ रिपोर्ट किया है—जिसका अर्थ है कि इन संकेतों के संयोग से मिलने की संभावना केवल 0.3% है।

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 सुपर अर्थ (Super Earth)

K2-18 b एक सुपर अर्थ एक्सोप्लैनेट है जो एक M-प्रकार के तारे की परिक्रमा करता है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी से लगभग 8.92 गुना अधिक है। यह अपने तारे का एक चक्कर 32.9 दिनों में पूरा करता है और अपने तारे से इसकी दूरी 0.1429 AU (खगोलीय इकाई) है।
इस ग्रह की खोज वर्ष 2015 में घोषित की गई थी।

लेकिन वैज्ञानिक समुदाय में मतभेद बरकरार

कुछ वैज्ञानिक इस खोज को लेकर संदेह भी जता रहे हैं। उनका मानना है कि DMS जैसे रसायन ग्रह पर उल्कापिंडों से या ज्वालामुखियों और बिजली की गड़गड़ाहट से भी उत्पन्न हो सकते हैं। “जीवन एक संभावना है, लेकिन यह अकेली नहीं है,” स्विट्ज़रलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ बर्न की डॉ. नोरा हैन्नी कहती हैं। फिर भी, यह खोज ब्रह्मांड में जीवन की तलाश के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। प्रो. मधुसूदन कहते हैं, “हमें वहां जाकर जीवन को पकड़ने की जरूरत नहीं है। हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या जीवन के नियम पूरे ब्रह्मांड में एक जैसे हैं।”

कौन हैं डॉक्टर निक्कू मधुसूदन

निक्कू मधुसूदन एक भारतीय-ब्रिटिश खगोलशास्त्री हैं, जो वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोनॉमी में एस्ट्रोफिज़िक्स और एक्सोप्लैनेटरी साइंस के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं । उन्हें एक्सोप्लैनेट्स (सौरमंडल के बाहर के ग्रहों) के वायुमंडलीय गुणों का अध्ययन करने के लिए उन्नत तकनीकों के विकास के लिए जाना जाता है।

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शिक्षा और करियर

  • शिक्षा: निक्कू मधुसूदन ने भारत के IIT-BHU, वाराणसी से बी.टेक किया। इसके बाद उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से एम.एस. और पीएच.डी. की डिग्री प्राप्त की। उनके पीएच.डी. सलाहकार प्रसिद्ध खगोलशास्त्री सारा सीगर थीं ।

  • अनुसंधान और योगदान: उन्होंने एक्सोप्लैनेट्स के वायुमंडलीय गुणों को समझने के लिए “एटमॉस्फेरिक रिट्रीवल” नामक तकनीक में सुधार किया, जिससे इन ग्रहों की रासायनिक संरचना और तापमान संरचना का अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने “हायसियन ग्रह” (Hycean planets) शब्द भी गढ़ा, जो उन ग्रहों को दर्शाता है जिनके पास हाइड्रोजन-समृद्ध वायुमंडल और संभावित तरल जल महासागर होते हैं ।

प्रमुख खोजें

  • K2-18 b ग्रह पर अध्ययन: 2023 में, मधुसूदन और उनकी टीम ने James Webb Space Telescope का उपयोग करके K2-18 b ग्रह के वायुमंडल में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति का पता लगाया, जो संभावित रूप से एक हाइड्रोजन-समृद्ध वायुमंडल के नीचे तरल जल महासागर की उपस्थिति का संकेत देता है ।

  • 2025 की खोज: हाल ही में, उन्होंने K2-18 b के वायुमंडल में डायमेथाइल सल्फाइड (DMS) और डायमेथाइल डिसल्फाइड (DMDS) जैसे यौगिकों की उपस्थिति का संकेत दिया है, जो पृथ्वी पर मुख्य रूप से समुद्री सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पादित होते हैं। यह खोज सौरमंडल के बाहर जीवन के संभावित संकेत के रूप में देखी जा रही है ।

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