21 महीने तक मणिपुर को ‘जलाने’ के बाद सीएम बीरेन सिंह का इस्तीफा, अविश्वास प्रस्ताव पेश होने से पहले गद्दी छोड़ी

biren singh

इंफालः मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष को शुरू हुए इक्कीस महीने बीत चुके हैं। इस बीच, राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने रविवार शाम इंफाल में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को अपना इस्तीफा सौंप दिया।  सूत्रों के अनुसार, रविवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा भी शामिल थे। इसके बाद, सिंह भाजपा के पूर्वोत्तर संयोजक संबित पात्रा के साथ इंफाल लौटे। 

राजनीतिक हलचल के बीच इस्तीफा

रविवार शाम को बीरेन सिंह, संबित पात्रा और मणिपुर भाजपा के वरिष्ठ नेता, जिनमें कैबिनेट मंत्री थॉन्गम बिस्वजीत सिंह, सापम रंजन सिंह, गोविंदास कोंथौजम और थॉन्गम बसंता सिंह शामिल थे, राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मिले। इस दौरान सिंह ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। 

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यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही थी और सोमवार से विधानसभा सत्र शुरू होने वाला था। 

भाजपा विधायकों का असंतोष और दबाव

* इंडियन एक्सप्रेस* की रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर के कई भाजपा विधायक मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के नेतृत्व और राज्य के संकट को संभालने के पार्टी के तरीके से नाखुश थे। इन विधायकों ने पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था। 

कुछ असंतुष्ट भाजपा विधायकों ने संकेत दिया था कि यदि नेतृत्व में बदलाव नहीं हुआ तो वे विधानसभा सत्र मेंबड़ा और अभूतपूर्वकदम उठा सकते हैं। वहीं, कांग्रेस पहले ही अविश्वास प्रस्ताव लाने की चर्चा कर रही थी। सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा सत्र फिलहाल निलंबित रह सकता है। 

इस्तीफे के पीछे पांच प्रमुख मांगें

अपने इस्तीफे में बीरेन सिंह ने केंद्र सरकार से पांच प्रमुख मांगें रखीं

1. राज्य की भौगोलिक अखंडता  बनाए रखना। 

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2.  अवैध प्रवासियों  के खिलाफ सख्त कार्रवाई। 

3.  ड्रग्स और नार्कोआतंकवाद  के खिलाफ लड़ाई जारी रखना। 

 4.बायोमेट्रिक चेक के साथ फ्री मूवमेंट रीजीम  की निरंतरता। 

5.  भारतम्यांमार सीमा पर बाड़  का निर्माण। 

इन मुद्दों पर उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान जोर दिया था। 

कांग्रेस का हमला: ‘बहुत देर से आया इस्तीफा

कांग्रेस ने सिंह के इस्तीफे कोबहुत देर से लिया गया फैसलाबताया। मणिपुर कांग्रेस प्रभारी गिरीश चोंडकर ने कहा “अगर उन्होंने पहले इस्तीफा दिया होता, तो कई लोगों की जान बच सकती थी, संपत्तियों और व्यापार को नुकसान नहीं होता, और बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होती। उन्हें डेढ़ साल पहले इस्तीफा दे देना चाहिए था। राज्य जिस पीड़ा से गुजरा है, उसे बदला नहीं जा सकता।”  कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीरेन सिंह अल्पमत की सरकार चला रहे थे और अपनी ही पार्टी के विधायकों का समर्थन खो चुके थे। कांग्रेस ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि उनके पास बहुमत नहीं था। बीरेन सिंह ने इस राज्य को बर्बाद कर दिया है।

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