सुप्रीम कोर्ट का झारखंड बीजेपी को निर्देशः विपक्ष का नेता करे नामित ताकि हो सके सूचना आयुक्त का चयन

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January 7, 2025

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रांचीः सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को झारखंड में मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की लंबित नियुक्तियों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एक अहम निर्देश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बीजेपी को कहा कि वे नेता विपक्ष के नाम का एलान करे ताकि सूचना आयुक्त का चयन किया जा सके ।

झारखंड में अभी तक नेता विपक्ष नहीं

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) की अनुपस्थिति के कारण चयन समिति की बैठक आयोजित नहीं हो पा रही है। यह बैठक इन महत्वपूर्ण नियुक्तियों को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी है। एलओपी इस चयन समिति का एक महत्वपूर्ण सदस्य होता है, लेकिन झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद से यह पद खाली है। भाजपा, जो विधानसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है, अब तक अपने सदन नेता का चयन नहीं कर पाई है।

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सुप्रीम कोर्ट का बीजेपी को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा को निर्देश दिया कि वह झारखंड विधानसभा में अपने निर्वाचित सदस्यों में से एक को विपक्ष का नेता नामित करे। यह नामांकन दो सप्ताह के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।

अदालत ने कहा, “चयन समिति तीसरे सप्ताह से चयन प्रक्रिया शुरू करेगी और इसे छह सप्ताह के भीतर पूरा करने का प्रयास करेगी। चयन समिति से सिफारिशें प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर नियुक्तियां की जाएंगी।”

मुख्य सचिव को हलफनामा देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के मुख्य सचिव को इस निर्देश के अनुपालन की पुष्टि करने वाला हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि चयन समिति नामांकन के तुरंत बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेगी।

नियुक्तियों में देरी के कारण

झारखंड सरकार के वकील ने तर्क दिया कि चयन समिति में कोरम की कमी के कारण नियुक्तियां विलंबित हुई हैं। राज्य के पूरक हलफनामे में बताया गया कि इन पदों के लिए जून 2024 में विज्ञापन जारी किया गया था। हालांकि, विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति ने प्रक्रिया को बाधित कर दिया।

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सूचना आयोग की निष्क्रियता से बढ़ी समस्याएं

याचिकाकर्ता ने कहा कि झारखंड का राज्य सूचना आयोग 2020 से निष्क्रिय है। मुख्य सूचना आयुक्त समेत कई पद खाली होने के कारण आरटीआई से संबंधित हजारों मामले लंबित हैं। इससे राज्य में पारदर्शिता और सुशासन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

 

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