झारखंड में एक बार फिर से हेमंत सरकार, 50 के पार जा सकता है आंकड़ा, नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी चुनाव हारे

झारखंड में एक बार फिर से हेमंत सरकार, 50 के पार जा सकता है आंकड़ा, नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी चुनाव हारे

रांची: झारखंड में एक बार फिर से हेमंत सोरेन के नेतृत्व सरकार बनते नजर आ रही है। झारखंड के रुझानों में झामुमो गठबंधन बहुमत पार: 41 का बहुमत और 50 सीटों पर बढ़त; हेमंत सोरेन सत्ता बचाने में कामयाब होते दिख रहे हैं। तोरपा से JMM की जीत। मैया सम्मान योजना का जादू चल गया, नहीं चला घुसपैठ का मुद्दा। भाजपा को सहयोगी आजसू से हुआ नुकसान। JMM को राजद और कांग्रेस ने दी मजबूती।

झारखंड में अब तक आए रुझानों के अनुसार यहां सत्ताधारी जेएमएम की दोबारा सरकार बन सकती है। ऐसा हुआ तो हेमंत सोरेन राज्य में नया रिकॉर्ड कायम करेंगे। जेएमएम का दोबारा सत्ता में आना इस बात का भी संदेश देगा कि सोरेन के जेल जाने से उनके प्रति जनता में सहानुभूति का सैलाब उमड़ पड़ा।बेरमो सीट से जयराम महतो की बड़ी हार हुई है। कांग्रेस के जयमंगल सिंह बड़े अंतर से चुनाव जीत लिया है।

यह माना जा सकता है कि हेमंत सोरेन का जेल जाना और उन पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई से आदिवासियों में उनके प्रति नई सहानुभूति पैदा कर दी, जिसने सोरेन के खिलाफ राज्य में सरकार की एंटी इन्कंबेंसी को भी खत्म कर दिया। यह भी सवाल है कि क्या हेमंत सोरेन की महिलाओं के खाते में हर माह 1000 रुपये देने की योजना को दोबारा उनकी सरकार आने पर उसे बढ़ाकर 2500 रुपये प्रतिमाह करने के ऐलान ने महिलाओं को उनके पक्ष में मोड़ दिया? मौजूदा रुझान तो फिलहाल इसी ओर इशारा कर रहे हैं।

झारखंड की महिलाओं ने इस बार बढ़चढ़कर हेमंत सोरेन के पक्ष में मतदान किया। इसके पीछे 2 वजहों को मुख्य कारण माना जा सकता है। पहला यह कि उनके खातों में आ रही 1000 रुपये प्रतिमाह की स्कीम का सोरेन की वापसी के बाद बढ़कर 2500 हो जाने की उम्मीद और हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के मैदान में आने से उनके प्रति महिलाओं में उपजी सहानुभूति होगी, जिसने भाजपा को झारखंड में बड़ा झटका दे दिया।

झारखंड में जेएमएम की वापसी होती है तो यह माना जाएगा कि आदिवासियों में हेमंत सोरेन की पैठ और गहरी हुई है। मुख्यमंत्री रहते उनका जेल जाना। फिर जेल से वापस आकर दोबारा सीएम की सीट पर नियंत्रण कर आदिवासियों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उनके अंदर अपने प्रति सहानुभूति की लहर पैदा करने में वह कामयाब रहे। इसलिए सोरेन सरकार की एंटी इनकंबेंसी भी भाजपा को यहां सत्ता में नहीं ला सकी। आदिवासियों ने सोरेन के खिलाफ हुई हर कार्रवाई को संभवतः अपनी अस्मिता से जोड़ा और वह उनके साथ हो चली।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now