झांसी के जिस अस्पताल में 10 नवजात जल कर मरे वहां यूपी के डिप्टी सीएम के स्वागत के लिए डाला जा। रहा था चूना, वायरल वीडियो से भड़के लोग

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Live Dainik

November 16, 2024

brijesh pathak jhasi

झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के दौरे से पहले साफ-सफाई और सड़क पर चूना छिड़कने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन की जमकर आलोचना की। इस घटना को संवेदनहीनता का प्रतीक बताया जा रहा है, खासकर अस्पताल में हुए दस नवजात शिशुओं की मौत के बाद।

 

सोशल मीडिया पर जनता और राजनीतिक दलों की कड़ी प्रतिक्रिया

वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर सरकार की निंदा शुरू हो गई।

कांग्रेस पार्टी ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए इसे “बेशर्मी का उदाहरण” कहा। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने बयान जारी करते हुए कहा, जब परिवार अपने बच्चों की मौत पर रो रहे थे, तब उपमुख्यमंत्री के स्वागत के लिए सड़क पर चूना छिड़ककर साफसफाई हो रही थी। यह सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। यह घटना भाजपा सरकार की प्राथमिकताओं को उजागर करती है, जो केवल प्रचार पर आधारित है।

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कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में लिखा, एक तरफ नवजात शिशुओं की मौत हो रही है और दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री के स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं। परिवारों का कहना है कि परिसर में फैली गंदगी को केवल मंत्री के दौरे से पहले साफ किया गया। यह शर्मनाक है।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का बयान और कार्रवाई का निर्देश

इस विवाद के बाद, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने घटना का संज्ञान लिया और झांसी के जिलाधिकारी को जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने एक वीडियो बयान में कहा, मेरे मेडिकल कॉलेज दौरे से पहले परिसर में चूना छिड़कते देखा गया। यह निंदनीय और चौंकाने वाला है। मैं जिलाधिकारी से अपील करता हूं कि इस गतिविधि के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई करें।

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फायर सेफ्टी को लेकर भी हुआ विवाद

मीडिया में यह दावा किया गया कि झांसी मेडिकल कॉलेज में अग्निशमन यंत्र खराब या एक्सपायर थे। हालांकि, उपमुख्यमंत्री ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा, फरवरी में कॉलेज में फायर सेफ्टी ऑडिट हुआ था और जून में मॉक ड्रिल की गई थी। सभी अग्निशमन उपकरण ठीक थे, और हमारे डॉक्टर और बचाव दल ने बच्चों को बचाने के लिए बहादुरी से काम किया।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र सिंह सेंगर ने भी अग्निशमन यंत्रों के खराब होने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा, कॉलेज में 146 अग्निशमन यंत्र हैं, जो समयसमय पर ऑडिट किए जाते हैं। घटना के समय एनआईसीयू वार्ड का अग्निशमन यंत्र भी इस्तेमाल किया गया। यह दावा पूरी तरह गलत है कि यंत्र खराब थे।

निष्कर्ष

इस घटना ने प्रशासन और सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जहां एक तरफ हादसे के पीड़ित न्याय और राहत की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक तैयारियों का यह वीडियो आम जनता के गुस्से का कारण बन गया है।

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