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मासस का भाकपा माले में विलय पर बनी सहमति, 50 साल से ज्यादा पुरानी पार्टी का खत्म हो जाएगा अस्तित्व

मासस का भाकपा माले में विलय पर बनी सहमति, 50 साल से ज्यादा पुरानी पार्टी का खत्म हो जाएगा अस्तित्व

रांची: कोयलांचल में मजबूत और सक्रिय राजनीतिक पार्टी मार्क्सवादी समन्वय समिति (मासस) का भाकपा माले में विलय करने के प्रस्ताव पर दोनों संगठनों की केंद्रीय कमेटियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच सहमति बन गई है।

दोनों पार्टियों के केंद्रीय नेतृत्व के बीच हुई बातचीत में कई विचारों और पार्टी लाइन पर सहमति बनी। इसके बाद विलय की प्रक्रिया पर जल्द ही अंतिम फैसला मासस की कें्रदीय कमेटी और भाकपा माले के पोलित ब्यूरो की बैठक में लेने की बात कही गयी है। मासस के महासचिव हलधर महतो और भाकपा माले के पोलित ब्यूरो सदस्य मनोज भक्त ने हस्ताक्षर किये। दोनों ही पार्टियों में आपस में विलय को लेकर 2021 से ही बातचीत चल रही थी।
विलय के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर भट्टार्चा, मासस के पूर्व विधायक अरूप चटर्जी समेत कई नेता मौजूद थे। माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि मार्क्सवादी समन्वय समिति का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लिबरेशन के साथ विलय फासीवाद विरोधी आंदोलन को नई ताकत देगा और कम्युनिस्ट आंदोलन में एकजुटता के साथ मजबूती पैदा करेगा।

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धनबाद से सांसद रहे एके राय ने मासस की स्थापना की थी। मासस का प्रभाव धनबाद और बोकारो जिले में रहा है। 2014 के चुनाव में निरसा से मासस के अरूण चटर्जी चुनाव जीतकर विधायक बने थे। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मासस का भाकपा माले में विलय काफी अहम माना जा रहा है।

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