हजारीबाग:भारत समेत पूरे विश्व में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस सफ़लतापूर्वक मनाया गया जिसका मकसद है लोगों को पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति जागरूक और सचेत करना। गुलजार प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना करना भी संभव नहीं है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि हम पेड़-पौधों, जंगलों,नदियों,झीलों,भूमि, पहाड़ और अन्य सभी प्राकृतिक संसाधनों और स्थलाकृतियों के महत्व को समझें। इसी के तहत विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हजारीबाग स्थित एनटीपीसी के पकरी बरवाडीह खनन परियोजना में त्रिवेणी सैनिक माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से एक दिन में एक लाख वृक्ष लगाने का संकल्प लिया गया था,जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया। वृक्षारोपण का यह कार्यक्रम सुबह के 6 बजे से शाम के 6 बजे तक सभी पालियों में काम करने वाले हजारों कर्मियों के शामिल होने से धरातल पर उतर सका। टीएसएमपीएल पर्यावरण विभाग की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में सभी कर्मचारियों ने कम से कम 15 या उससे अधिक पौधा लगाया। मुख्य खदान के आस पास अलग-अलग स्थानों पर कर्मचारियों ने सुबह 6 बजे से ही शामिल होकर वृक्षारोपण कार्यक्रम में अपना भरपूर योगदान दिया। इस अवसर पर सभी कर्मचारियों ने पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण का संकल्प भी लिया।
डायरेक्टर ऑपरेशन समेत तमाम कंपनी के सभी बड़े अधिकारी मौजूद थे। सभी वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मुहिम को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मौके पर मौजूद डायरेक्टर ऑपरेशन संजय कुमार खटोड़ ने कहा कि पेड़ है तो जीवन है और पेड़ के बिना जीवन अधूरा है, पेड़ ही हमारे जीवन का आधार है और इसके लिए हम सभी को इमानदारी से प्रयास करने और पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति संकल्प लेने की जरूरत है। हम लोगों को एक दूसरे को पेड़ लगाने के लिए प्रेरित और उत्साहित करना चाहिए। श्री खटोड़ ने कहा कि पर्यावरण दिवस के अवसर पर न सिर्फ हम संकल्प लें, बल्कि उसे अपने आचरण में उतारकर पौधा अवश्य लगाएं,ताकि पर्यावरण का संरक्षण हो सके और जिससे हमें शुद्ध वातावरण मिल सके। उन्होंने इस मौके पर पर्यावरण विभाग समेत सभी विभागों को इस नेक काम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने और इस संकल्प को कामयाब बनाने के लिए धन्यवाद और अपना साधुवाद दिया। प्रत्येक वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस की एक विशेष थीम होती है। इस वर्ष 2024 के लिए विशेष थीम ” भूमि पुनर्स्थापन, मरुस्थलीकरण को रोकना और सूखा लचीलापन ” रखा गया है। जो कि स्वस्थ्य भूमि को वापस लाने, रेगिस्तानों को बढ़ने से रोकने और पानी की कमी से निपटने के बारे वर्णित है।आपको बता दें कि
इस मौके पर सभी देश अलग- अलग तरीके से पर्यावरण के प्रति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन करते हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा 5 जून 1972 को सर्वप्रथम विश्व पर्यावरण दिवस के रुप में मनाने का फैसला लिया गया था।परंतु सबसे पहले स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में उसी साल की शुरुआत में विश्व पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें 119 देशों से भी अधिक राष्ट्रों ने हिस्सा लिया था।




