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ED चार्जशीट में दावाः हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन घोटाला में कई सबूतों को नष्ट करने का प्रयास, DC की भूमिका संदिग्ध, टैगोर परिवार के जमीन से छेड़छाड़

रांची : पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन घोटाला मामले में रांची के शेड्यूल एरिया रेगुलेशन(SAR) कोर्ट की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। ईडी ने हेमंत सोरेन समेत 5 आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट में दावा किया है कि एसएआर के समक्ष दायर केस संख्या 81 /2023-24 की सुनवाई में जल्दीबाजी की गई। इस मामले में कई साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया गया। हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन की जमाबंदी आनन फानन में रद्द की गई। एसएसआर कोर्ट ने 103 शिकायतों में सिर्फ 4 चार का निपटारा किया। डीसी और एसएआर अधिकारी की भूमिका भी पूरे मामले में संदिग्ध बताई गई है।
ईडी ने कोर्ट को बताया कि एसएआर कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई जल्दीबाजी में की। कोर्ट में कुल 103 शिकायतें आई थी, केस नंबर 81 से पहले 80 शिकायतें मिल चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद भी हेमंत सोरेन से जुड़े जमीन के मामले की सुनवाई हुई। इस मामले में एसएआर कोर्ट ने केस नंबर 81 समेत सिर्फ चार मामले में आदेश दिये, जबकि बाकी मामले अभी भी लंबित है। ईडी ने कोर्ट को बताया कि जब हेमंत सोरेन के दिल्ली स्थित आवास पर छापेमारी चल रही थी तभी एसएआर कोर्ट ने जल्दीबाजी में सुनवाई पूरी कर आदेश जारी किया और पहले की जमाबंदी रद्द कर दी। पूरी कार्रवाई एसएआर अधिकारी ने 9 से 29 जनवरी के बीच की थी, एसएआर अधिकारी की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए ईडी ने कहा कि 16 जनवरी को सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों को तीन नोटिस दिया गया, उन्हे 19,24 और 29 जनवरी को पेश होने को कहा गया, उसी दिन जमाबंदी रद्द कर दी गई और सह अभियुक्त राजकुमार पाहन के पक्ष में जमाबंदी दे दी गई।
ईडी ने एसएआर अधिकारी के अलावा रांची डीसी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं । ईडी ने लिखा है कि एसएआर से जब मामले में उनका पक्ष पूछा गया तो उन्होंने लिखा है कि डीसी को किसी भी जमीन की जमाबंदी रद्द करने का अधिकार है, इसके लिए किसी आवेदन की जरूरत नहीं है।

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ईडी ने लिखा है कि इन परिस्थितियों में भी रांची डीसी और एसएआर ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, क्योंकि खेवट 10 में कुल 39.4 एकड़ भूरी जमीन थी । अगर खेवट 10 की पूरी जमीन की जमाबंदी रद्द की जाती तो 39.4 एकड़ की जमाबंदी रद्द होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं कर आरोपी हेमंत सोरेन से जुड़ी 8.86 एकड़ जमीन की जमाबंदी रद्द की गयी।
वही जांच एजेंसी ने चार्जशीट में नया खुलासा करते हुए कहा है कि बड़गाई अंचल के राजस्व उप निरीक्षक भानू प्रताप के घर से मिले कागजात में कवि और भारत रत्न रबींद्रनाथ टैगोर के संबंधी हिमेंद्र नाथ टैगोर की जमीन के भी दस्तावेज मिले थे। इस जमीन के कागजात में हेराफेरी के सबूत मिले है, इसकी जांच चल रही है। उनके 3.81 एकड़ जमीन के कागजात में हेराफेरी की गई है। रबिंद्रनाथ के रिश्तेदार हिमेंद्र की जमीन फर्जी वंशज खड़ा करके हड़पने की कोशिश हुई थी।

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