झारखंड में फर्जी कागज बनाकर बेच दी थी 103 एकड़ जमीन, अब राजस्व विभाग ने DC से मांगी रिपोर्ट

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Live Dainik

August 3, 2025

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बोकारोः झारखंड के बोकारो के तेतुलिया मौजा में वन और राजस्व विभाग की 103 एकड़ सरकारी भूमि फर्जी दस्तावेज के आधार पर बेचे जाने के मामले में राजस्व विभाग ने बोकारो डीसी से रिपोर्ट मांगी है। साथ ही मंत्री दीपक बिरूआ ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में तीन माह के भीतर समीक्षा कर दोषी सरकारी कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। झारखंड विधानसभा की एक्शन टेकन रिपोर्ट में उमाकांत रजक के सवाल के जवाब में यह जानकारी दी गई है। विभाग ने 25 जुलाई को बोकारो डीसी को पत्र भेजकर जमीन कब्जे के मामले में विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई के संबंध में अद्यतन रिपोर्ट मांगी है।

बोकारो जमीन घोटाले में सीआईडी ने अबतक तीन आरोपियों को जेल भेजा है। गिरफ्तार आरोपियों में पुरूलिया से फर्जी दस्तावेज बनाने वाले अख्तर हुसैन व इजहार हुसैन शामिल हैं। दोनों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर इसे शैलेश कुमार सिंह नाम के व्यक्ति को पावर ऑफ अटार्नी दी थी। इसके बाद शैलेश ने पॉवर आफ अटार्नी के जरिए जमीन को अपने ही रिश्तेदारों के द्वारा बनायी गई कंपनी उमायुष मल्टीकॉम को जमीन की रजिस्ट्री कर दी थी।

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इस मामले में उमायुष मल्टीकॉम में पैसे भेजने वाले राजवीर कंस्ट्रक्शन के मालिक पुनीत अग्रवाल को भी सीआईडी ने गिरफ्तार किया था। केस में सीआईडी कई बार पटना में शैलेश कुमार की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर चुकी है।

सरकारी पदाधिकारी, अंचल अधिकारी समेत अन्य की भूमिका पर जांच: राजस्व विभाग के द्वारा पूरे जमीन घोटाले में संलिप्तत रहे अंचल अधिकारी, राजस्व उपनिरीक्षक, कर्मचारी से लेकर डिप्टी रजिस्ट्रार व डीसी तक की भूमिका की जांच की जाएगी। इसके बाद संबंधित सरकारी कर्मियों व पदाधिकारियों पर भी जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। राजस्व विभाग डीसी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।

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फर्जी दस्तावेज के आधार पर साल 2012 में कर्मचारी निर्मल मिंज की रिपोर्ट पर जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई थी। लेकिन गड़बड़ी सामने आने के बाद तत्कालीन डीसी राय महिमापत रे ने रजिस्ट्री रद्द कर दी थी। इसके बाद संबंधित पक्ष ने हाईकोर्ट में जाकर राहत पायी। हालांकि कोर्ट ने केस में टाइटल सूट जारी रखने का आदेश दिया था। जिसमें वन विभाग को पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। साल 2022 में शैलेश कुमार सिंह ने उमायुष मल्टीकॉम के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करायी थी।

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जमीन की बिक्री के ठीक पहले दो लाख की कैपिटल से कंपनी की रजिस्ट्री करायी गई थी। इसके बाद उमायुष के खाते में तकरीबन चार करोड़ रुपये डाले गए थे। राजवीर कंस्ट्रक्शन से पैसे मिलने के बाद ही इस जमीन की रजिस्ट्री हुई थी। केस में सीआईडी के अलावे ईडी की जांच भी चल रही है। ईडी ने भी अप्रैल 2025 में सभी संदिग्धों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। तब राजवीर कंस्ट्रक्शन के संचालक के ठिकानों से 1.35 करोड़ रुपये बरामद किए गए थे।

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