क्या अबुआ बीर दिशोम अभियान चुनावी साल से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मास्टर स्ट्रोक है । ये सवाल इसलिए क्योंकि झारखंड में वन अधिकार कानून के तहत दिए जाने वाले पट्टे में अब तक भारी कोताही बरती गई है । हज़ारों गाँव के लाखों परिवारों को अभी भी वन अधिकार कानून के तहत उन्हें हक़ नहीं मिला है। माना जा रहा है कि बड़ी आबादी हेमंत सोरेन के अबुआ बीर दिशोम अभियान से लाभान्वित हो सकती है । अगर ये अभियान सफल रहा तो आने वाले चुनावों में इसका फ़ायदा मिल सकता है।
हमर जंगल हमर अधिकार की शुरूआत
रांची के प्रोजेक्ट भवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हमर जंगल , हमर अधिकार के तहत अबुआ बीर दिशोम अभियान की शुरुआत करते हुए कहा कि “ झारखंड देश के अन्य राज्यों से बिल्कुल अलग है। झारखंड की संस्कृति, सभ्यता और शिष्टाचार की अलग पहचान है। यहां के आदिवासी समुदाय के लोग काफी सहनशील और सरल है। राज्य में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत जो कार्य बहुत पहले होना चाहिए था कहीं न कहीं उस कार्य की शुरुआत आज हमारी सरकार ‘अबुआ बीर अबुआ दिशोम अभियान’ के रूप में कर रही है। “
18 साल का इंतज़ार खत्म
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के लागू हुए लगभग 17 से 18 वर्ष होने जा रहे हैं, परंतु झारखंड में इस अधिनियम की गंभीरता को दृष्टिगत नहीं रखा गया बल्कि पूरी तरह नजरअंदाज किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई चुनौतियों के बाद आज हमारी सरकार वन अधिकार अधिनियम को एक मुहिम के तौर पर शुरू कर रही है। इस मुहिम के तहत राज्य के वन क्षेत्रों में निवास करने वाले आदिवासी एवं मूलवासी समुदायों के बीच बड़ी संख्या में वनपट्टा का वितरण करने का लक्ष्य रखा गया है।
80% लोगों को मिलेगा हक़
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखंड में 30% वन क्षेत्र हैं। जंगल-झाड़ मिलाकर देखें तो यह 50% के करीब है। यहां के 80% लोग खेती-बाड़ीपर ही निर्भर हैं। मात्र 20% लोग जो बाजार और शहरों में है, बाकी सभी लोग खेती कार्य से ही जीवनयापन करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे राज्यों को देखें जहां आदिवासियों की बहुलता कम है लेकिन वहां पर अधिकार के तहत वन पट्टों का वितरण निमित बेहतर कार्य हुआ है। मुझे लगता है कि कोई भी कार्य आप सभी अधिकारी ने अगर आज ठान लिया तो वह पूर्ण नहीं होगा ऐसा हो ही नहीं सकता है। झारखंड अलग हुए इतने वर्ष बाद भी वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों की गंभीरता पर हम लोगों ने ध्यान नहीं दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर हम आज इस मुहिम पर ध्यान नहीं दिए होते तो कुछ वर्षों बाद फॉरेस्ट राइट एक्ट के विषय में चर्चा करने की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योंकि इतने गंभीर विषय को पूर्ण रूपेण ठंढे बस्ते पर डालने का प्रयास किया गया था। अब हमारी सरकार की ‘अबुआ बीर अबुआ दिशोम अभियान’ के तहत वनपट्टा वितरण पर विशेष फोकस है।
खेती योग्य ज़मीन पर कोयला निकाला जा रहा
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि इस राज्य के भौगोलिक और इस राज्य के अंदर चल रहे विकास की गतिविधियां आने वाले दिनों में एक दूसरे से परस्पर टकराव की स्थिति उत्पन्न करेगा। वर्तमान में जो खेती योग्य जमीन है उसमें भी कोयला निकाला जा रहा है। आज नहीं तो कल वह खनिज संपदा समाप्त होगा। खनन कंपनियां खनिज संपदा निकालकर ऐसी स्थिति में छोड़ेंगे जिसकी व्याख्या करना मुश्किल है। जो किसान विस्थापित हो रहा है उसका अस्तित्व रहेगा कि नहीं। जहां आज धान की खेती हो रही है, क्या खनन कार्य के बाद उस जमीन पर फिर से वैसी ही खेती हो पाएगी क्या? हमें इस और भी ध्यान देने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने जिला अधिकारियों से कहा कि जिलों में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आप सभी की कार्यशैली राज्य के विकास को बेहतर दिशा देने का काम करती है।
अधिकारी लगाएं वृक्ष
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आदिवासी समाज कभी भी पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचता क्योंकि उसे पता है यही उसका जीवन है। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने कार्यालय परिसरों तथा आवासीय परिसरों पर वृक्षारोपण कर हरा-भरा करें।
10 साल बाद ‘अबुआ बीर अबुआ दिशोम अभियान’ का फल मिलेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम शहर में अतिक्रमण के दंश से जूझ रहे हैं। शहर में इसे रोकना संभव नहीं है लेकिन गांव में हम आज भी इस काम को रोक सकते हैं। लोगों को उनका हक और अधिकार देकर। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक जागरूकता की बात है तो यहां के आदिवासियों और वनवासियों में इसकी कमी नहीं है। कमी है तो सिस्टम के अंदर कार्य करने वाले लोगों की इच्छा शक्ति में। कार्यशैली में काम को लटकाने का तो हम लोगों के पास भरपूर उपाय है लेकिन उसका रास्ता हम कैसे निकले इस पर पसीने छूटने लगते हैं। पता नहीं ऐसा क्यों होता है। सीएम ने कहा कि अगर हम इस अभियान के तहत प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेंगे तो 10 साल के बाद इसका जो परिणाम होगा वह बेहतर नजर आएगा। जिसपर आपको भी गर्व होगा।
नगाड़ा वादन कर अभियान का हुआ शुभारम्भ
इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन एवं मुख्य सचिव श्सुखदेव सिंह ने नगाड़ा वादन कर ‘अबुआ बीर अबुआ दिशोम अभियान’ का विधिवत शुभारम्भ किया । इस अवसर पर राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वंदना दादेल, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे, राजस्व विभाग के सचिव अमिताभ कौशल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजय श्रीवास्तव, आदिवासी कल्याण आयुक्त अजय नाथ झा, सभी जिलों के उपायुक्त, वन अधिकारी सहित अन्य गणमान्य लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।




