अवैध कारोबार करने वाले पर होगी सख्ती, लाइसेंसधारियों पर निगरानी के लिए भी कड़े कदम
रांची। झारखंड सरकार ने बुधवार को नई शराब नीति को मंजूरी प्रदान कर दी। नई उत्पाद नीति में शराब के अवैध कारोबार करने वाले लोगों पर अब सख्ती होगी, जबकि लाईसेंसधारियों पर निगरानी के लिए भी कड़े कदम उठाये गये हैं। इसके लिए विधानसभा के आगामी सत्र से उत्पादन नियमावली में आवश्यक संशोधन को लेकर विधेयक भी लाया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी गयी।
बैठक समाप्त होने के बाद कैबिनेट सचिव वंदना दादेल और उत्पाद विभाग के सचिव विनय कुमार चौबे ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि उत्पाद राजस्व बढ़ाने को लेकर पिछले दिनों एक परामर्शी की नियुक्ति की गयी थी, इस एजेंसी ने राजस्व बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से 5 अनुशंसा की गयी हैं, जिसके तहत 1915 में बने बिहार उत्पाद एक्ट में आवश्यक संशोधन का सुझाव दिया गया है, इसमें अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ गैर जमानती धाराएं और अन्य कड़े कानून बनाये जाएंगे, इस विधेयक को विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा। इसके अलावा नई थोक और खुदरा बिक्री नियमावली तथा बार लाइसेंस नियमावली बनाने का भी सुझाव दिया गया हैं।
विनय कुमार चौबे ने बताया कि अभी उत्पाद विभाग की ओर से राज्य में 75 थोक और खुदरा गोदाम रखा गया है, लेकिन यह बात सामने आयी है कि इन गोदामों से ही शराब का विचलन होता है और लाइसेंसधारी ही मुख्य रूप से शराब के अवैध कारोबार को बढ़ावा देने में संलिप्त होते हैं। ऐसी स्थिति में अब 75 की जगह सिर्फ प्रमंडल स्तरीय गोदाम की बनाये रखने का निर्णय लिया गया है और इन गोदामों में ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा। डिजिटल लॉक की व्यवस्था की जाएगी और ई-गोदाम का नियंत्रण पूरी तरह से सरकार के पास रहेगा। हालांकि अभी 50-50 उत्पाद निर्मार्त्ताओं से थोक विक्रेता के माध्यम से ही कारोबार किया जाएगा, लेकिन सारे शराब सरकार के गोदाम में ही रखे जाएंगे। इससे राजस्व में बढ़ोत्तरी होगी और अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लग सकेगा। उन्होंने बताया कि बार लाइसेंस देने में भी एक न्यूनतम गारंटी फिक्स कर दिया जाएगा, क्योंकि अभी यह देखा गया है कि बार लाइसेंधारी बाहर से भी शराब खरीदने की अनुमति दे देते हैं,इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता हैं।
राज्य सरकार ने अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए अब खुदरा दुकानों की संख्या को भी दोगुना कर करीब 1500 करने का निर्णय लिया गय है। उत्पाद सचिव ने कहा कि दुकान कम कर देने से ऐसा नहीं होता है, कि लोग शराब पीना छोड़ देते है और शराब की खपत कम हो जाती है, बल्कि यह देखा गया है कि ऐसी स्थिति में अवैध शराब की बिक्री बढ़ जाती हैं। उन्होंने बताया कि शराब की बोतल पर बार-कोड की व्यवस्था होगी, जिससे यह पता चल पाएगा कि वह किस गोदाम से आया और किस दुकान से बिक्री हुई, वहीं कीमत में भी पारदर्शिता बरती जा सकेगी, इससे अधिक कीमत वसूलने की शिकायत खत्म हो जाएगी।
झारखंड कैबिनेट ने नई उत्पाद नीति को दी मंजूरी

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