देश में बेरोजगारी कम करने के लिए हर साल 78.5 लाख नौकरियां का सृजन जरूरी, महंगाई से जनता त्रस्त : सूर्यकांत शुक्ला

रांचीः आर्थिक मामलों के जानकार सूर्यकांत शुक्ला का कहना है कि जीडीपी के फास्ट ग्रोथ का सच यह है कि देश की इकोनॉमी अरबपति तो पैदा कर रही है, लेकिन आम आदमी को अपने घरेलू खर्चों को पूरा करने में काफी कठिनाई हो रही है। देश में बेरोजगारी और महंगाई से जनता त्रस्त हैं। उन्होंने बताया कि अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी को कम करने के लिए हर साल गैर कृषि क्षेत्र में 78.5 लाख नौकरियों का सृजन करना होगा। देश में इतनी अधिक महंगाई है कि आरबीआई फरवरी 2023 से ब्याज दरों को कम नहीं कर पा रही है। महंगाई से जनता त्रस्त है।
सूर्यकांत शुक्ला ने कहा कि 31 जनवरी को अंतरिम बजट के पहले जो इकोनॉमिक सर्वे पेश किया गया, उसमें जीडीपी ग्रोथ की दर 7 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन सोमवार 22 जुलाई को सर्वे आया है, उसमें जीडीपी ग्रोथ की दर को 6.5 से 7 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सेक्टर में पिछले एक दशक से नौकरियों का सृजन कमजोर बना रहा है।  अभी सर्विस सेक्टर ही नौकरियां देने वाला मुख्य सेक्टर है। हालांकि कंस्ट्रक्शन में भी नौकरियां आ रही हैं। दूसरी तरफ फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट भी घटा है। वित्त वर्ष 2022-23 में 47.6 बिलियन डॉलर फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट था, जो वर्ष 2023-24 में घटकर 45 बिलियन डॉलर हो गया।

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