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Home | GST रिफॉर्म पर हर सवाल का जवाब यहां समझिए… सप्लाई पहले हुआ हो लेकिन बिल 22 को बना है तो कितना लगेगा जीएसटी ?

GST रिफॉर्म पर हर सवाल का जवाब यहां समझिए… सप्लाई पहले हुआ हो लेकिन बिल 22 को बना है तो कितना लगेगा जीएसटी ?

LiveDainik Desk
September 21, 2025 11:39 PM
By LiveDainik Desk
5 months ago
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gst
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1. GST क्या है?

जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) पूरे भारत में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर एकल अप्रत्यक्ष कर है। यह उत्पाद शुल्क, वीएटी और सेवा कर जैसे कई करों की जगह लेता है, जिससे एक एकीकृत बाजार का निर्माण होता है।

 

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2. संशोधित जीएसटी दरें कब से लागू होंगी?

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जीएसटी परिषद् की सिफारिश के अनुसार, नई जीएसटी दरें 22 सितंबर, 2025 से लागू होंगी।

 

3. 22 सितंबर, 2025 से जीएसटी में क्या बदलाव हुए हैं?

इस तारीख से, जीएसटी परिषद के निर्णयों के आधार पर, कई वस्तुओं और सेवाओं पर संशोधित जीएसटी दरें लागू होंगी। इन बदलावों का उद्देश्य दरों को सरल बनाना, विसंगतियां दूर करना और व्यवसायों व उपभोक्ताओं दोनों के लिए प्रणाली को आसान बनाना है।

 

4. क्या 22 सितंबर, 2025 से जीएसटी पंजीकरण नियम बदल जाएंगे?

नहीं। जीएसटी पंजीकरण की सीमाएं वही रहेंगी। केवल कुछ आपूर्तियों पर टैक्स की दरों में संशोधन किया जा रहा है।

 

5. संशोधित जीएसटी दरों की सूचना किस अधिसूचना के जरिए दी जाएगी?

सरकार द्वारा जारी आधिकारिक दर अधिसूचनाओं के माध्यम से इन परिवर्तनों की सूचना दी जाएगी। ये अधिसूचनाएं सीबीआईसी की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

 

6. यदि वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति जीएसटी दर में बदलाव से पहले की गई थी, लेकिन चालान बाद में जारी किया गया था, तो लागू कर की दर क्या होगी?

ऐसे मामलों में, सीजीएसटी अधिनियम की धारा 14 के अंतर्गत “आपूर्ति का समय” नियम लागू दर तय करेगा। यदि आपूर्ति और भुगतान दोनों 22 सितंबर से पहले किए गए थे, तो पहले वाली दर लागू होगी। हालांकि, यदि आपूर्ति पहले की गई थी, लेकिन चालान या भुगतान 22 सितंबर के बाद आता है, तो संशोधित दर लागू होगी।

 

7. यदि अग्रिम राशि दरों में बदलाव से पहले प्राप्त हुई थी, लेकिन आपूर्ति या चालान बाद में जारी किया गया है, तो जीएसटी की कौन सी दर लागू होगी?

यह दर अग्रिम राशि के भुगतान के समय पर निर्भर करती है। 22 सितंबर से पहले प्राप्त एडवांसेज पर पुरानी दर से टैक्स लगेगा। यदि अग्रिम राशि 22 सितंबर को या उसके बाद प्राप्त होती है, या आपूर्ति बाद में पूरी होती है, तो संशोधित दर पर जीएसटी लागू होगा।

 

8. क्या नई जीएसटी दरें लागू होने पर ट्रांजिट में माल के लिए ई-वे बिल रद्द करके पुनः जारी करने होंगे?

नहीं। दरों में बदलाव से पहले जारी किए गए ई-वे बिल अपनी पूरी अवधि के लिए वैध रहते हैं। वैध ई-वे बिल के साथ पहले से ही चल रहे माल के लिए 22 सितंबर के बाद नए बिल की जरूरत नहीं है।

 

9. यदि दरों में बदलाव की तारीख पर मेरे पास पहले से ही स्टॉक है, तो क्या मुझे आपूर्ति पर संशोधित दर लागू करनी चाहिए?

हाँ। जीएसटी आपूर्ति की तिथि पर लगाया जाता है, खरीद की तिथि पर नहीं। इसलिए, भले ही स्टॉक पहले खरीदा गया हो, 22 सितंबर को या उसके बाद की गई किसी भी आपूर्ति पर नई दरें लागू होंगी।

 

10. जीएसटी दरों में बदलाव से पहले की गई खरीदारी पर आईटीसी का क्या होगा? क्या अब आपको कम दर पर आईटीसी मिलेगा?

आप दरों में बदलाव से पहले की गई खरीदारी पर पूर्ण आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का दावा कर सकते हैं, बशर्ते उस समय जीएसटी सही तरीके से वसूला गया हो। दरों में बदलाव होने के बाद से आपके लिए पहले से उपलब्ध क्रेडिट कम नहीं होगा। संक्षेप में, आपने पहले जो भी टैक्स चुकाया है, वह आपके जीएसटी लेजर में वैध क्रेडिट बना रहेगा।

 

11. मेरी बाहरी आपूर्ति को नई दर अनुसूची के अंतर्गत छूट मिली है, लेकिन मेरे लेजर में पहले से ही आईटीसी मौजूद है। क्या मुझे इसे उलटने की आवश्यकता है?

आप 21 सितंबर, 2025 तक की गई आपूर्ति के लिए आईटीसी शेष का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन 22 सितंबर से, एक बार आपकी आपूर्ति छूट प्राप्त हो जाने के बाद, उससे संबंधित आईटीसी का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा और इसे जीएसटी नियमों के अनुसार उलटना होगा।

 

12. क्या मुझे संशोधित दर की प्रभावी तिथि तक की गई आपूर्ति के लिए इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के अंतर्गत संचित क्रेडिट की वापसी का दावा करने की अनुमति होगी?

नहीं। इन्वर्टेड ड्यूटी के अंतर्गत संचित आईटीसी की वापसी केवल तभी उपलब्ध होती है, जब इनपुट पर स्थायी रूप से आउटपुट की तुलना में अधिक दर से टैक्स लगाया जाता है। यदि अंतर केवल उसी वस्तु पर समय के साथ दर परिवर्तन के कारण है, तो वापसी की अनुमति नहीं है।

 

13. कौन सी जीवन बीमा पॉलिसी जीएसटी छूट के अंतर्गत आती हैं?

यह छूट सभी व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसी पर लागू होती है, जिनमें टर्म प्लान, एंडोमेंट पॉलिसी और यूएलआईपी शामिल हैं। इन निजी पॉलिसियों का पुनर्बीमा भी छूट के दायरे में आता है।

 

14. कौन सी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी जीएसटी छूट के अंतर्गत आती हैं?

निजी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी, जिनमें फैमिली फ्लोटर और वरिष्ठ नागरिक योजनाएं शामिल हैं, जीएसटी से मुक्त हैं। ऐसी निजी पॉलिसी का पुनर्बीमा भी इस निर्णय के अंतर्गत छूट के दायरे में आता है।

 

 

15. निजी स्वास्थ्य और जीवन बीमा सेवाओं को छूट देने के अतिरिक्त, क्या बीमा कंपनियों की किसी भी इनपुट सेवा को भी छूट दी जाएगी?

केवल पुनर्बीमा सेवाओं को छूट दी गई है। कमीशन और ब्रोकरेज जैसे अन्य इनपुट टैक्स योग्य बने रहते हैं, और आउटपुट आपूर्ति को छूट मिलने के बाद बीमा कंपनियां उन पर आईटीसी का दावा नहीं कर सकतीं। ऐसे आईटीसी को वापस लेना होगा।

 

16. क्या यात्री परिवहन सेवाओं पर 18% टैक्स लगेगा?

नहीं। सड़क मार्ग से यात्री परिवहन पर बिना आईटीसी के 5% टैक्स जारी रहेगा, हालांकि ऑपरेटर आईटीसी के साथ 18% का विकल्प चुन सकते हैं। हवाई यात्रा के मामले में, इकोनॉमी क्लास पर 5% टैक्स लगता है, जबकि अन्य श्रेणियों पर 18% टैक्स लागू रहता है।

 

17. माल के मल्टीमॉडल परिवहन पर लागू जीएसटी दर क्या है?

यदि मल्टीमॉडल परिवहन में कोई हवाई यात्रा शामिल नहीं है, तो उस पर सीमित आईटीसी (मूल्य के 5% तक सीमित) के साथ 5% टैक्स लगता है। यदि किसी हिस्से में हवाई परिवहन शामिल है, तो लागू दर पूर्ण आईटीसी के साथ 18% है।

 

18. ईसीओ के माध्यम से प्रदान की जाने वाली स्थानीय डिलीवरी सेवाओं पर जीएसटी का भुगतान कौन करेगा?

यदि किसी अपंजीकृत व्यक्ति की ओर से ई-कॉमर्स ऑपरेटर (ईसीओ) के माध्यम से स्थानीय डिलीवरी सेवाएं प्रदान की जाती हैं, तो ई-कॉमर्स ऑपरेटर जीएसटी का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। यदि सेवा प्रदाता पंजीकृत है, तो वह प्रदाता टैक्स का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है।

 

19. स्थानीय डिलीवरी सेवाओं पर लागू जीएसटी दर क्या है?

स्थानीय डिलीवरी सेवाओं पर 18% टैक्स लगता है। यदि आपूर्तिकर्ता पंजीकृत है, तो आपूर्तिकर्ता जीएसटी का भुगतान करता है। यदि आपूर्तिकर्ता अपंजीकृत है और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से सेवाएं प्रदान करता है, तो ऑपरेटर जीएसटी का भुगतान करता है।

 

20. क्या ईसीओ के जरिए प्रदान की जाने वाली स्थानीय डिलीवरी सेवाएं जीटीए के दायरे में आती हैं?

नहीं। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए स्थानीय डिलीवरी सेवाओं को माल परिवहन एजेंसी (जीटीए) नहीं माना जाता है। उन्हें सेवा की एक अलग श्रेणी के रूप में माना जाता है।

 

21. क्या 22 सितंबर, 2025 से पहले आपूर्ति श्रृंखला में पहले से मौजूद दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को वापस लेना और पुनः लेबल करना आवश्यक है? पुनः लेबलिंग कैसे की जाएगी?

स्टॉक को वापस लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। निर्माताओं को केवल संशोधित मूल्य सूची जारी करनी होगी और उन्हें डीलरों, खुदरा विक्रेताओं और नियामकों के साथ साझा करना होगा। बाजार में पहले से मौजूद स्टॉक की बिक्री जारी रह सकती है, बशर्ते बिलिंग में नई कीमतें दिखाई दें।

 

22. सभी दवाओं को जीएसटी से पूरी तरह छूट क्यों नहीं दी गई है?

दवाओं को छूट देने से निर्माता कच्चे माल और इनपुट पर आईटीसी का दावा नहीं कर पाएंगे, जिससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। ये लागत आखिरकार उपभोक्ताओं पर डाल दी जाएगी। दवाओं को रियायती 5% दर (शून्य दर पर निर्दिष्ट दवाओं को छोड़कर) पर रखने से उनकी सामर्थ्य सुनिश्चित होती है और साथ ही आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से आईटीसी का प्रवाह बना रहता है।

 

23. कृषि मशीनरी को जीएसटी से पूरी तरह छूट क्यों नहीं दी गई है?

यदि कृषि मशीनरी को पूरी तरह टैक्स-मुक्त कर दिया जाता है, तो निर्माता कच्चे माल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट खो देंगे, जिससे उनकी लागत बढ़ जाएगी। ये बढ़ी हुई लागतें किसानों पर डाल दी जाएंगी, जिससे मशीनें और महंगी हो जाएंगी। इसलिए, किसानों को राहत और निर्माताओं की व्यवहार्यता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए, इसे रियायती दर पर टैक्स योग्य रखा गया है।

 

 

24. कच्चे कपास पर जीएसटी क्यों नहीं हटाया गया?

कपास पर रिवर्स चार्ज के तहत कर लगाया जाता है, इसलिए किसान सीधे जीएसटी का भुगतान नहीं करते हैं। यह प्रणाली कपड़ा उद्योग के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट श्रृंखला को बरकरार रखती है, जिससे लागत स्थिर रहती है और उपभोक्ताओं को लाभ होता है।

 

25. क्या जियोटेक्सटाइल और एग्रो-टेक्सटाइल जैसे तकनीकी वस्त्रों को अधिक उलटफेर का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि इनमें मुख्य रूप से पॉलीइथाइलीन और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे प्लास्टिक घटकों का उपयोग होता है?

भारत की ओर से अपनाई गई अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण प्रणाली के अंतर्गत, जियोटेक्सटाइल और एग्रो-टेक्सटाइल जैसे तकनीकी कपड़े को प्लास्टिक नहीं, बल्कि कपड़ा माना जाता है। हालांकि कुछ उलटफेर रह सकता है, लेकिन जीएसटी ऐसे मामलों में इकट्ठा इनपुट क्रेडिट की वापसी की मंजूरी देता है। प्रक्रिया सुधारों के साथ, इन रिफंड की प्रक्रिया तेजी से की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि निर्माताओं पर बोझ न पड़े।

 

26. बिना ऑपरेटर के लीज या किराए पर दी गई सेवाओं के लिए क्या टैक्स है?

अधिकतर बिना ऑपरेटर के लीज या किराए पर दी गई सेवाओं पर उसी दर से टैक्स लगता है जिस दर से वस्तुओं पर लगता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कार पर 18% टैक्स लगता है, तो बिना ड्राइवर के उस कार को किराये पर लेने या पट्टे पर देने पर भी 18% टैक्स लगता है। यही नियम दूसरी वस्तुओं पर भी लागू होता है, किराए पर लेने पर लगने वाला टैक्स, खरीदने पर लगने वाले टैक्स के बराबर होता है।

 

27. क्या संशोधित जीएसटी दरें आयातित वस्तुओं पर भी लागू होंगी?

हां। आयात पर आईजीएसटी 22 सितंबर से संशोधित जीएसटी दरों पर लगाया जाएगा, केवल उन मामलों को छोड़कर, जहां कोई विशिष्ट छूट प्रदान की गई हो।

 

28. यूएचटी (अल्ट्रा हाई टेंपरेचर) दूध को छूट दी गई है। क्या यह छूट वनस्पति-आधारित दूध पर भी लागू होती है?

नहीं। यह छूट केवल डेयरी यूएचटी दूध के लिए है। प्लांट-बेस्ड मिल्क ड्रिंक्स (जैसे बादाम दूध) पर पहले 18% और सोया मिल्क ड्रिंक्स पर 12% जीएसटी लगता था। अब सोया दूध सहित सभी वनस्पति आधारित दूध पेय पदार्थों पर 5% टैक्स लगेगा।

 

29. फेस पाउडर और शैंपू पर जीएसटी क्यों कम किया गया है, और क्या इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों और लग्जरी ब्रांडों को भी लाभ नहीं होगा?

फेस पाउडर और शैंपू समाज के सभी वर्गों में इस्तेमाल होने वाली आम घरेलू वस्तुएं हैं। हालांकि प्रीमियम या लग्जरी ब्रांडों को भी इसका लाभ मिलेगा, लेकिन दरों में कटौती का मुख्य उद्देश्य जीएसटी प्रणाली को सरल बनाना है। ब्रांड या कीमत के आधार पर अलग-अलग दरें होने से कर संरचना जटिल और प्रशासन के लिए कठिन हो जाएगी।

 

30. धातुकृत प्लास्टिक फिल्म से बनी नकली ज़री पर उल्टे शुल्क की वापसी प्रतिबंधित क्यों है, जबकि प्लास्टिक या रबर से बने अन्य कपड़ा उत्पादों पर ऐसा कोई प्रतिबंध लागू नहीं होता है?

जीएसटी परिषद् ने अपनी 52वीं बैठक में धातुकृत प्लास्टिक फिल्म से बनी नकली जरी पर रिफंड को प्रतिबंधित करने का निर्णय पहले ही ले लिया था। मौजूदा प्रक्रिया केवल जीएसटी दरों को सरल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए है, ताकि पहले लिया गया निर्णय जारी रहे।

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