गिरिडीह: झारखंड में माओवाद के खिलाफ चल रही निर्णायक जंग में सुरक्षा बलों ने एक ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा-209 बटालियन ने संयुक्त अभियान में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के 25 लाख रुपये के इनामी स्पेशल एरिया कमेटी (SAC) के शीर्ष कमांडर अजय महतो उर्फ मोछू उर्फ टाइगर को गिरफ्तार कर लिया। करीब दो दशक से जंगलों में आतंक का साम्राज्य खड़ा करने वाले इस नक्सली पर हत्या, आईईडी विस्फोट, सुरक्षाबलों पर घातक हमले और सरकारी संपत्तियों को उड़ाने सहित 240 से अधिक मामले दर्ज हैं।
जंगल में घेराबंदी, भागने की कोशिश नाकाम
17 जुलाई को खूखरा थाना क्षेत्र के हरलाडीह ओपी के जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की सटीक सूचना मिलने के बाद गिरिडीह पुलिस ओर कोबरा जवानों ने बिना देर किए विशेष ऑपरेशन शुरू किया। खुफिया सूचना के आधार पर पिपराडीह (खवासटांड़) के घने जंगलों की चारों ओर से घेराबंदी कर दी गई। बच निकलने की हर कोशिश नाकाम हुई और आखिरकार अजय महतो सुरक्षा बलों के शिकंजे में आ गया।

20 साल तक खून, बारूद और दहशत का खेल
पुलिस के अनुसार अजय महतो वर्ष 2005 से माओवादी संगठन में सक्रिय था। संगठन के भीतर उसका कद लगातार बढ़ता गया और वह लेवी वसूली, हथियारों का जखीरा तैयार करने, आईईडी लगाने तथा पारसनाथ, लुगू पहाड़ और सारंडा जैसे इलाकों में कई बड़ी वारदातों का मास्टरमाइंड बन गया। उस पर आम नागरिकों की हत्या, पुलिस मुखबिर होने के शक में लोगों की निर्मम हत्या, सुरक्षाबलों पर हमले और विकास कार्यों को विस्फोट से तबाह करने जैसे गंभीर आरोप हैं।
आठ जिलों में अपराध का लंबा काला इतिहास
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक अजय महतो के खिलाफ गिरिडीह, पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, चतरा, रामगढ़ और सरायकेला समेत कई जिलों में 240 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक 107 मामले पश्चिमी सिंहभूम और 68 मामले गिरिडीह जिले में दर्ज हैं, जो उसके लंबे और हिंसक नक्सली नेटवर्क की गवाही देते हैं।
माओवादी नेटवर्क को करारा झटका
गिरिडीह पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अजय महतो की गिरफ्तारी से पारसनाथ जोन समेत पूरे झारखंड में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। कार्रवाई से नक्सली संगठन की गतिविधियां कमजोर होंगी और क्षेत्र में शांति व विकास की रफ्तार को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही नक्सली संगठनों से जुड़े लोगों से आत्मसमर्पण कर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने की अपील भी की है।








