CAA के मुद्दे पर होगा चुनावी रण, चुनावी चंदे को लोग जाएगें भूल, मास्टरस्ट्रोक का विश्लेषण

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Live Dainik

March 11, 2024

Citizenship, amendment act and electoral bond

दिल्लीः संयोग है या प्रयोग मगर है दिलचस्प, लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी चंदे को जगजाहिर करने का अल्टीमेटम दे सरकार को झटका दिया तो सरकार ने भी शाम होते-होते नागरिकता संशोधन कानून यानि सीएए की अधिसूचना जारी कर दी । अब बीजेपी दफ्तरों में जश्न मनाए जाने लगा है , सोशल मीडिया पर इसके समर्थन में पोस्ट की बाढ़ आ चुकी है । चुनावी चंदा रमजान की चांद की तरह नजर आया और मोदी विरोधियों को खुश होने का मौका दे गायब हो गया । देश में सियासी खेल अब नए मोड़ पर आ चुका है । मंदिर पुरानी बात हो चुकी है । सिटीजनशिप एमेंडमेंट एक्ट लागू से  इसके विरोधियों को ये समझ नहीं आ रहा है कि इस पर प्रतिक्रिया कैसे दे । तीखी प्रतिक्रिया होती है तो इसका फायदा सीधे-सीधे वोटों के ध्रुवीकरण से दक्षिणपंथी राजनीति को होनेवाला है क्योंकि इस कानून के जरिए पड़ोसी राज्यों के मुस्लिम छोड़ हर धर्म के लोगों के भारत में बसने में मदद मिलने वाली है । 

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मोदी सरकार ने एससबीआई को फटकार और चुनावी चंदे की हेडलाइंस को कम से कम एक कुछ दिनों के लिए मैनेज जरुर कर लिया । अब सोशल मीडिया पर मुकाबला सीएए बनाम एसबीआई चल रहा है । मोदी विरोधी उस सीलबंद लिफाफे के खुलने के इंतजार में है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने हर हाल में जनता के सामने पेश करने का आदेश दिया है वहीं दूसरी और मोदी समर्थक सीएए के  लागू होने के जश्न की शोर में तमाम विरोधी आवाजों को अनसुना कर देने की रणनीति अपना चुके हैं। 

सवाल ये है कि सीएए के लागू होने से क्या चुनावी फायदा मिलेगा । क्योंकि लोगों याददाश्त कमजोर होती है इसलिए ये बताना जरुरी है कि  संसद ने चार पहले इस कानून को पास कर दिया था । देश भर में सीएए के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन हुआ था और महीनों चला । सरकार ने विरोध देखते हुए कानून की अधिसूचना जारी नहीं होने दी । क्योंकि अब संकट बड़ा है और चुनावी चंदे के बहाने विरोधी मोदी सरकार  और बीजेपी पर हमलावर हो सकती है इसलिए सीएए लॉन्च कर दिया गया है । अगर निशाने पर लगा तो बीजेपी को फायदा और अगर मिस हुआ तो फौरी तौर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनावी चंदे या इलेक्टोरल बॉन्ड की खबर दब तो जाएगी ही । 

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मगर असली खेल तब होगा जब इलेक्टोर बॉन्ड का सच आएगा सामने  , चंदे की हकीकत जानने के बाद इस पर वोटर्स की प्रतिक्रिया ही नतीजे तय करेंगी । देश के दूसरों राज्यों की अपेक्षा बंगाल में इसका क्या असर होता है  ये देखने वाली बात होगी क्योंकि ममता बनर्जी सीएए पर सबसे मुखर विरोधी हैं। इघर झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में भी सीएए बड़ा मुद्दा बन सकता है क्योंकि बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे इसे लागू करने की मांग करते रहे हैं। 

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