लोहरदगा: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन पत्र को खारिज किए जाने के मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। कांग्रेस नेताओं ने इस निर्णय को लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला बताते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन के साथ जो हुआ है, वह केवल लोकतंत्र का गला घोंटना नहीं, बल्कि उसकी निर्मम हत्या है।सुखदेव भगत ने कहा कि झारखंड में राज्यसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को आपत्तियों और त्रुटियों पर स्पष्टीकरण देने का पूरा अवसर दिया गया था, लेकिन मीनाक्षी नटराजन के मामले में ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी प्राथमिकी (एफआईआर) अथवा आपराधिक मामले के बावजूद उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया, जो लोकतांत्रिक परंपराओं और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया में समान मानदंड लागू नहीं किए जाएंगे तो लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होंगे। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक दबाव और पक्षपातपूर्ण रवैये का परिणाम है। पार्टी ने चुनाव आयोग से हस्तक्षेप कर निर्णय की समीक्षा करने की मांग की है तथा न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की भी बात कही है। सुखदेव भगत ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता तथा चुनावी अधिकारों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक और कानूनी विकल्प का उपयोग करेगी।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता, समान अवसर और न्याय सर्वोपरि हैं तथा किसी भी राजनीतिक दल या नेता के साथ भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं में व्यापक आक्रोश है तथा विभिन्न स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं।







