रांचीः 14वीं जेपीएससी में कथित गड़बड़ी को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सीआईडी की टीम पूरे एक्शन मोड़ में है। सीआईडी ने मंगलवार देर रात गोड्डा के पोड़ैयाहाट प्रखंड के आपूर्ति पदाधिकारी अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सरकारी नौकरी में आने से पहले वह TDPL कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत था और JSSC-JPSC की कई परीक्षाओं में सफलता हासिल की।शिकायत के अनुसार, अभय तिवारी ने PGT, JSSC CGL, ACF PT, MRO PT और FSO समेत कई परीक्षाएं पास की हैं। इन परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोपों की CID जांच कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, CID ने पोड़ैयाहाट के बांझी रोड स्थित उसके किराए के मकान पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया। छापेमारी के दौरान करीब 5 लाख रुपये नकद बरामद होने की भी सूचना है। CID की पूछताछ में परीक्षा सिंडिकेट से जुड़े कई अहम नाम सामने आने की संभावना है।वहीं दूसरी ओर मंगलवार देर शाम झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एल खियांगते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया जिसे राज्यपाल संतोष गंगवार ने बुधवार को स्वीकार कर लिया।
पूर्व मुख्य सचिव रह चुके हैं एल. खियांगते
वर्ष 1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी रहे एल. खियांगते जेपीएससी अध्यक्ष बनने से पहले झारखंड के मुख्य सचिव का अहम पद संभाल चुके थे। अपनी सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने 27 फरवरी 2025 को जेपीएससी के अध्यक्ष पद का प्रभार ग्रहण किया था।उनका कार्यकाल 25 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित था, लेकिन परीक्षा विवाद और प्रशासनिक दबाव के बीच उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ना पड़ा।
सीएम हेमंत सोरेन को लगातार मिल रही थी गड़बड़ी की शिकायत
सीआईडी ने मंगलवार को जेपीएससी के उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, अन्य स्टाफ और आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल के ठिकाने भी शामिल हैं। टीडीपीएल का पूरा नाम टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड है और यह जेपीएससी से जुड़े परीक्षा कार्यों में शामिल रहती है। इस एजेंसी को जेएसएससी ने ब्लैकलिस्टेड कर दिया था। इस एजेंसी के डायरेक्टर सतपाल सिंह और रणवीर सिंह बताये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत संरिन के पास जेपीएससी गड़बड़ी को लेकर लगातार शिकायतें पहुंच रही थीं। फिलहाल टीम जेपीएससी की उप-परीक्षा नियंत्रक और टीडीपीएल के स्टाफ सहित आठ को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। 20 मई 2025 को परीक्षाओं में अनियमितता को लेकर जेएसएससी ने टीडीपीएल कंपनी को काली सूची में डाल दिया था। लेकिन उसके बाद भी यह एजेंसी जेपीएससी में न केवल परीक्षाओं का संचालन कर रही थी, बल्कि सभी आठ तरह के संवेदनशील काम यही कर रही थी वहीं इससे पहले परीक्षा में अलग-अलग एजेंसियों से अलग-अलग काम लिये जाते थे।


